फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Purvanchal's tallest 75 feet Ravana burnt in Bareka

Varanasi News: बरेका में जला पूर्वांचल का सबसे ऊंचा 75 फीट का रावण

Mon, 14 Oct 2024 02:25 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 14 Oct 2024 02:25 AM IST
विज्ञापन
Purvanchal's tallest 75 feet Ravana burnt in Bareka
31 बाणों से
विज्ञापन

- असत्य पर सत्य की जीत के प्रतीक स्वरूप हुआ रावण दहन
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। असत्य पर सत्य की जीत के प्रतीक स्वरूप विजयदशमी का पर्व उल्लास के साथ मनाया गया। शहर से लेकर गांव तक रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन हुआ। बरेका में तो पूर्वांचल के सबसे ऊंचे 75 फीट के रावण का पुतला जलाकर दशहरे का पर्व मनाया गया।

बनारस रेल इंजन कारखाना में विजयादशमी समिति की ओर से केंद्रीय खेलकूद मैदान पर रावण दहन हुआ। बरेका महाप्रबंधक एसके श्रीवास्तव और महिला कल्याण संगठन की अध्यक्ष गौरी श्रीवास्तव ने प्रभु श्रीराम-जानकी जी की आरती उतारी। रामचरित मानस पर आधारित रूपक राम वन गमन से रावण वध तक की लीला की मनमोहक प्रस्तुति हुई। भगवान राम के बाण चलाते ही रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जल उठे। रावण दहन के दौरान आकर्षक आतिशबाजी आकर्षण का केंद्र रही।
विज्ञापन

1543 से होती आ रही श्रीआदि लाटभैरव की रामलीला में भगवान राम ने एक साथ 31 बाण चलाकर रावण का वध किया। गंगा-वरुणा संगम स्थल पर होने वाली इस रामलीला में भगवान राम के स्वरूप द्वारा धनुष से एक साथ 31 बाण छोड़े गए। इनमें से 20 रावण की भुजाओं पर, 10 बाण उसे सिरों पर और एक बाण उसकी नाभि में लगता है। लीला समिति के प्रधानमंत्री एडवोकेट कन्हैयालाल यादव ने बताया कि शास्त्र कहते हैं कि विभीषण की सलाह पर श्रीराम ने एक साथ 31 बाण रावण पर छोड़े थे। लीला के दौरान छोड़े जाने वाले बाणों को लूटने की होड़ दर्शकों में थी। कुछ इस बाण को श्रद्धा से अपने पास रखते हैं तो कुछ इसे जला कर प्राकृतिक दवाएं बनाते हैं। इस बार 70 फीट के रावण, 65 फीट के मेघनाथ और 60 फीट के कुंभकरण का पुतला जलाया गया। इसके अलावा मलदहिया, शिवपुर, लोहता, हुकुलगंज समेत कई इलाकों में रावण दहन हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन


----
रामनगर में विभीषण ने रावण को दी मुखाग्नि
रामनगर। राज मद व अहंकार में डूबे रावण का अंततः श्रीराम ने वध कर देवगणों व ऋषियों को रावण के राक्षसी राज से मुक्ति दिलाई। रामनगर में चल रही विश्वप्रसिद्ध रामलीला में शनिवार को रावण का रणक्षेत्र में मृत्यु शय्या पर शयन और श्रीराम विजय की लीला हुई। विश्वप्रसिद्ध रामलीला के 26वें दिन बाणों की वर्षा के बीच श्रीराम रावण के हृदय में बाण मारकर उसे विचलित कर देते हैं। फिर एक बाण नाभि में मारकर रावण की इहलीला समाप्त कर देते हैं। रावण की मृत्यु के बाद विभीषण को दुखी देख श्रीराम रावण का अंतिम संस्कार करने को कहते हैं। रात्रि में निर्धारित समय 10.25 बजे विभीषण पूरे विधि विधान से रावण को मुखाग्नि देकर उसके शव को जलाते हैं। देवलोक व भूलोक में सर्वत्र खुशियां छा जाती है।संपूर्ण लंका भूमि श्रीराम के जयकारे से गूंज उठती है तथा यहीं पर आरती के पश्चात लीला को विश्राम दिया जाता है।

---
रामनगर में होता है रावण का अंतिम संस्कार
देशभर में दशहरे पर रावण का पुतला जलाया जाता है लेकिन रामनगर में बाकायदा रावण का अंतिम संस्कार होता है। रामलीला में चूंकि सारा कुछ मानस पर आधारित होता है इसलिए प्रसंग के मुताबिक विभीषण और रावण के कुछ परिजन आग लेकर रावण के पुतले के पांच चक्कर लगाते हैं। विभीषण ही रावण के खानदान के इकलौते चिराग बच गए होते हैं इसलिए वहीं रावण को मुखाग्नि देते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed