लोक निर्माण विभाग की अलग यूनिट बनवाएगी काशी विश्वनाथ धाम
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गंगा घाट से काशी विश्वनाथ मंदिर तक बनने वाले भव्य काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण के लिए शासन से लोक निर्माण विभाग की अलग इकाई गठित की जाएगी। यह अलग यूनिट पूरी परियोजना की मॉनिटरिंग करेगी। माना जा रहा है कि 10 अक्तूबर तक शासन से अलग यूनिट का गठन कर दिया जाएगा। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू कराई जाएगी।
प्रदेश कैबिनेट से काशी विश्वनाथ धाम का डीपीआर मंजूर होने के बाद अब अधिकारी टेंडर प्रक्रिया में जुट गए हैं। अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना के लिए शासन से अलग इकाई का गठन किया जाएगा और उसी देखरेख में निर्माण कार्य कराया जाएगा। दरअसल, डीपीआर के अनुसार दुनियाभर से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए काशी विश्वनाथ धाम में आवश्यकता के अनुसार कार्य कराया जाना है।
इसमें ज्यादातर काम सीमेंट, कांक्रीट और लोहे व स्टील से जुड़ा है। तकनीकी पहलुओं का ध्यान रखने के लिए इसकी जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग को सौंपी गई है। यहां बता दें कि काशी विश्वनाथ धाम की आधारशिला रखने के साथ ही राजकीय निर्माण निगम को निर्माण का जिम्मा सौंपा गया था। मगर, राजकीय निर्माण निगम ने परियोजना की लागत में 12 फीसदी कंसलटेंट चार्ज जोड़ा था।
डीपीआर की लागत कम करने के लिए शासन की वित्त एवं व्यय समिति ने कई कामों को अलग कर दिया है। इसमें डीपीआर में जोड़ी गई जीएसटी को अलग कर दिया गया है। इसके अलावा फर्नीचर सहित अन्य कामों को हटाया गया है।
अलग-अलग पत्थरों मंदिर परिसर को भव्यता
डीपीआर के अनुसार मंदिर परिसर में मकराना मार्बल, ग्रेनाइट और चुनार के पत्थरों का उपयोग किया जाएगा। इसमें अलग-अलग आवश्यकता के अनुसार अलग पत्थर उपयोग में लिए जाएंगे। इसके अलावा पूरे परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रसाधान, जलपान गृह, लाइब्रेरी, मल्टीपरपज हाल सहित अन्य केंद्र विकसित होंगे। काशी विश्वनाथ धाम के तीनों प्रवेश द्वार पर जन सुविधा केंद्र स्थापित होंगे।
गंगा घाट से मंदिर के बीच दो एस्केलेटर
गंगा स्नान कर सीधे काशी विश्वनाथ के दर्शन के लिए आने वाले बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था होगी। गंगा घाट से मंदिर के बीच दो एस्केलेटर होंगे। इनमें श्रद्धालु आसानी से चढ़ाई के बिना ही ऊपर आ जाएंगे।
मंडलायुक्त, दीपक अग्रवाल ने बताया कि राजकीय निर्माण निगम की जगह लोक निर्माण विभाग को काशी विश्वनाथ धाम की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पीडब्ल्यूडी की अलग इकाई इसमें काम करेगी। डीपीआर मंजूर होने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू कराई जाएगी।