{"_id":"6a4abe9d3fc79924b70186a2","slug":"public-interest-litigation-filed-regarding-the-ms-admission-process-at-bhu-varanasi-news-c-20-vns1011-1455394-2026-07-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Varanasi News: बीएचयू में एमएस भर्ती प्रक्रिया पर जनहित याचिका दाखिल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Varanasi News: बीएचयू में एमएस भर्ती प्रक्रिया पर जनहित याचिका दाखिल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में मेडिकल सुपरिटेंडेंट (एमएस) के पद पर चल रही भर्ती प्रक्रिया को जनहित याचिका दाखिल कर चुनौती दी गई है। छात्र नेता मृत्युंजय तिवारी की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि विवि ने अपने ही विज्ञापन में निर्धारित अनिवार्य पात्रता शर्तों का प्रारंभिक चयन सूची में पालन नहीं किया।
याचिका के अनुसार विज्ञापन में स्पष्ट रूप से 300 या उससे अधिक बेड वाले अस्पताल के प्रशासन में वरिष्ठ पद पर न्यूनतम सात वर्ष का अनुभव आवश्यक बताया गया था। इसके बावजूद प्रारंभिक रूप से चुने गए उम्मीदवारों का अनुभव स्पष्ट रूप से प्रदर्शित नहीं किया गया है। याचिका में कहा गया है कि विभागाध्यक्ष, प्रोफेसर इंचार्ज या नोडल अधिकारी के अनुभव को पूरे अस्पताल के प्रशासन के समकक्ष नहीं माना जा सकता।
याचिका में यह भी आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के नियामक ढांचे, भारत सरकार, शिक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और बीएचयू के बीच त्रिपक्षीय समझौते के उद्देश्यों की अनदेखी की गई है। याचिका में भारत संघ, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, भर्ती, मूल्यांकन सेल और चिकित्सा विज्ञान संस्थान को प्रतिवादी बनाया गया है। ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
याचिका के अनुसार विज्ञापन में स्पष्ट रूप से 300 या उससे अधिक बेड वाले अस्पताल के प्रशासन में वरिष्ठ पद पर न्यूनतम सात वर्ष का अनुभव आवश्यक बताया गया था। इसके बावजूद प्रारंभिक रूप से चुने गए उम्मीदवारों का अनुभव स्पष्ट रूप से प्रदर्शित नहीं किया गया है। याचिका में कहा गया है कि विभागाध्यक्ष, प्रोफेसर इंचार्ज या नोडल अधिकारी के अनुभव को पूरे अस्पताल के प्रशासन के समकक्ष नहीं माना जा सकता।
विज्ञापन
याचिका में यह भी आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के नियामक ढांचे, भारत सरकार, शिक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और बीएचयू के बीच त्रिपक्षीय समझौते के उद्देश्यों की अनदेखी की गई है। याचिका में भारत संघ, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, भर्ती, मूल्यांकन सेल और चिकित्सा विज्ञान संस्थान को प्रतिवादी बनाया गया है। ब्यूरो
विज्ञापन