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पं. अशोक द्विवेदी की दोबारा ताजपोशी के संकेत
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 28 Aug 2016 01:50 AM IST
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काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष पद की कुर्सी रविवार को खाली हो जाएगा। अध्यक्ष का तीन वर्षीय कार्यकाल खत्म होने से पहले ही इस प्रतिष्ठापरक पद के लिए जोड़ तोड़ शुरू हो गई है। इस रेस में न्यास के कुछ सदस्य तो एड़ी चोटी लगाए ही हैं पूर्व अध्यक्ष के भी लखनऊ में डेरा डालने की चर्चा है। धर्मार्थ कार्य मंत्रालय से लेकर मुख्यमंत्री दरबार तक की परिक्रमा का प्रतिफल क्या निकलेगा, अभी कुछ कहा नहीं जा सकता लेकिन इस दिशा में जल्द ही चौंकाने वाले परिणाम आने के भी संकेत मिले हैं। उच्चपदस्थ सूत्रों का कहना है कि शासन आचार्य अशोक द्विवेदी की निरंतरता बनाए रखने पर भी विचार कर सकता है।
न्यास अध्यक्ष की कुरसी पर आचार्य अशोक द्विवेदी की दोबारा ताजपोशी होगी या किसी और के सिर सेहरा बंधेगा, इसे लेकर कयासबाजी तेज हो गई है। सियासी गलियारों से लेकर ब्यूरोक्रेट्स तक के बीच न्यास अध्यक्ष की कुर्सी हथियाने के लिए लामबंदी कर ली गई है। कोई मंत्री को साधाने में जुटा है तो अफसर को। वर्ष 2012 तक न्यास अध्यक्ष रहे आचार्य पं. हरिकर कृपालु जी महाराज को इस रेस में दूसरे दावेदारों की तुलना में अधिक प्रभावशाली माना जा रहा है। पता चला है कि विश्वनाथ मंदिर में आचार्य के पद पर सेवारत पद्मश्री प्रो. देवी प्रसाद द्विवेदी भी इस दौड़ में शामिल हैं और न्यास परिषद के सदस्य पंडित प्रसाद दीक्षित भी।
हाल में मंदिर में हुए कई विवादों को लेकर इन सदस्यों के विरुद्ध शिकायतों का पिटारा भी खुल चुका है। जाली पैड प्रकरण के अलावा कई ऐसे विवादों की आंच इन तक आ सकती है। ऐसे में सियासी गलियारों में आचार्य पं. अशोक द्विवेदी के भी नाम की चर्चा है। आचार्य द्विवेदी को कुछ अफसरों की पसंद के तौर पर देखा जा रहा है। अखिलेश सरकार का भी कार्यकाल अब सिर्फ एक वर्ष रह गया है, ऐसे में विश्वनाथ मंदिर की अधूरी योजनाओं को मूर्त रूप देना और विस्तारीकरण का सपना साकार करने में सक्षम व्यक्तित्व को प्राथमिकता दी जा सकती है।
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न्यास अध्यक्ष की कुरसी पर आचार्य अशोक द्विवेदी की दोबारा ताजपोशी होगी या किसी और के सिर सेहरा बंधेगा, इसे लेकर कयासबाजी तेज हो गई है। सियासी गलियारों से लेकर ब्यूरोक्रेट्स तक के बीच न्यास अध्यक्ष की कुर्सी हथियाने के लिए लामबंदी कर ली गई है। कोई मंत्री को साधाने में जुटा है तो अफसर को। वर्ष 2012 तक न्यास अध्यक्ष रहे आचार्य पं. हरिकर कृपालु जी महाराज को इस रेस में दूसरे दावेदारों की तुलना में अधिक प्रभावशाली माना जा रहा है। पता चला है कि विश्वनाथ मंदिर में आचार्य के पद पर सेवारत पद्मश्री प्रो. देवी प्रसाद द्विवेदी भी इस दौड़ में शामिल हैं और न्यास परिषद के सदस्य पंडित प्रसाद दीक्षित भी।
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हाल में मंदिर में हुए कई विवादों को लेकर इन सदस्यों के विरुद्ध शिकायतों का पिटारा भी खुल चुका है। जाली पैड प्रकरण के अलावा कई ऐसे विवादों की आंच इन तक आ सकती है। ऐसे में सियासी गलियारों में आचार्य पं. अशोक द्विवेदी के भी नाम की चर्चा है। आचार्य द्विवेदी को कुछ अफसरों की पसंद के तौर पर देखा जा रहा है। अखिलेश सरकार का भी कार्यकाल अब सिर्फ एक वर्ष रह गया है, ऐसे में विश्वनाथ मंदिर की अधूरी योजनाओं को मूर्त रूप देना और विस्तारीकरण का सपना साकार करने में सक्षम व्यक्तित्व को प्राथमिकता दी जा सकती है।
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