नई दिशा: घंटों रील देखने वालों को पांच साल बाद होगी मानसिक बीमारी, 30 सेकंड में भावनाओं का बदलना खतरनाक
Varanasi News: संत अतुलानंद कॉन्वेंट स्कूल में अमर उजाला की ओर से भविष्य की सफलता सिर्फ परीक्षा के अंकों पर निर्भर नहीं करती की थीम पर कार्यक्रम हुआ। इस दौरान उन्होंने 500 विद्यार्थियों को दो घंटे तक संबोधित किया।
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वाराणसी जिले में कोइराजपुर स्थित संत अतुलानंद कॉन्वेंट स्कूल में अमर उजाला की ओर से नई दिशा भविष्य की ओर पहला कदम कार्यक्रम ने बच्चों को प्रेरणा और उत्साह से भर दिया। भविष्य की सफलता सिर्फ परीक्षा के अंकों पर निर्भर नहीं करती की थीम पर बताया गया कि अंक आपके जीवन वृत्त में 5 प्रतिशत भी हिस्सेदारी नहीं रखते हैं। पांच साल बाद लोगों को रील देखने से होने वाली मानसिक बीमारी का पता चलेगा। इसमें 30 सेकंड में ही भावनाएं बदलने लगती हैं, जो बेहद खतरनाक है। कार्यक्रम में भगवान कृष्ण के अर्जुन को दिए तीन मंत्र कर्म, धैर्य और साहस को अपनाकर पूरी दुनिया फतह करने की सीख भी दी गई।
मुख्य अतिथि आईआईटी-बीएचयू के काउंसलर और मनोचिकित्सक डॉ. लक्ष्मण कुमार ने कक्षा 9वीं और 11वीं के 500 विद्यार्थियों को दो घंटे तक संबोधित किया। साथ ही बच्चों के सवालों का जवाब दिया और गुस्सा कम करने और एकाग्रता बढ़ाने की प्रैक्टिस कराई। अंत में मेडिटेशन के टिप्स बताए। शुरुआत प्राचार्य डॉ. नीलम सिंह और डॉ. लक्ष्मण कुमार ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन कर किया।
उन्होंने कहा कि घंटों रील देखने का साइड इफेक्ट लोगों को पांच साल बाद पता चलेगा। इनमें हर 20-30 सेकंड में आपकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ होता है। इसे देखने वाले कभी गुस्सा, कभी डर, प्यार तो कभी राष्ट्रवाद, फिर अचानक जोर के ठहाके लगाने लग जाते हैं। अगले 5 साल में ऐसे लोगों को बड़ी मानसिक बीमारी हो सकती है।
साथ ही उन्होंने बताया कि वीडियो गेम से भी लोगों के दिमाग की क्षमता सिकुड़ रही है।
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क्यों परीक्षा आते ही गुल हो जाती है दिमाग की बत्ती
परीक्षा आते ही दिमाग की बत्ती गुल हो जाती है। शुरू के 10 से 15 मिनट तक कुछ आता ही नहीं है। क्योंकि हमारे दिमाग के अगले हिस्से प्री फेंडल कॉर्टेक्स में डर की वजह से कुछ समझ ही नहीं आता हालांकि बाद में दिमाग अपने आप को ढाल लेता है। आप लोग अपने दिमाग को कंट्रोल कर सकते हो।
आपका अहम है ट्रैफिक पुलिस जैसा
पहले नहीं होता था डिप्रेशन
प्राचार्य डॉ. नीलम सिंह ने कहा कि रील वाली बात बच्चों ने सबसे कम तालियां बजाईं, क्योंकि आप सभी रील देखते हो। हमारे समय में किसी भी बच्चे को तनाव नहीं होता था, लेकिन आज हर बच्चे को डिप्रेशन और तनाव है। इसे हमें ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से खत्म करना होगा। कार्यक्रम का संचालन जितेंद्र पांडेय ने किया।