वाराणसी में रोपवे का विरोध: काशी विद्यापीठ के सेवानिवृत्त शिक्षकों ने कहा- स्वतंत्रता आंदोलन की जन्मभूमि से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
वाराणसी कैंट स्टेशन से गोदौलिया तक बनने वाले रोपवे से महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की सुरक्षा एवं भविष्य की रणनीति प्रभावित होगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कुलाधिपति व राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व प्रदेश सरकार से इस मामले में अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
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वाराणसी स्थित महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में रोपवे स्टेशन और पिलर को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं।। कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी के बाद कर्मचारी संघ और सेवानिवृत्त शिक्षकों ने खुलकर विरोध दर्ज कराया। बृहस्पतिवार को गैर शैक्षणिक विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ की बैठक में रोपवे रूट का विरोध किया गया।
काशी विद्यापीठ में पूर्व अध्यक्ष डॉ. आनंद सिंह अन्नू की अध्यक्षता में हुई बैठक में कर्मचारी नेताओं ने कहा कि जनप्रतिनिधियों से मिलकर रोपवे का रूट विश्वविद्यालय परिसर के ऊपर से निर्धारित करने पर आपत्ति दर्ज कराने का निर्णय लिया गया। बता दें कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी कुलाधिपति व राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व प्रदेश सरकार से इस मामले में अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। कहा है कि रोपवे के लिए प्रस्तावित जमीन के कारण विश्वविद्यालय के कई विभाग प्रभावित होंगे।
कुलपति प्रो. एके त्यागी ने बताया कि रोपवे परियोजना के तहत विश्वविद्यालय परिसर की भूमि में छह टॉवर और एक स्टेशन प्रस्तावित किया गया है। इसके कारण विश्वविद्यालय का समाज विज्ञान संकाय, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संकाय, प्रशासनिक भवन, मानविकी संकाय, कुलपति आवास, अतिथि गृह, चित्रकला विभाग, भारत माता मंदिर की जमीन के साथ ही विभाग भी प्रभावित होंगे।
हाई वोल्टेज मार्केंटिंग स्टंट है रोपवे योजना
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय राय ने रोपवे योजना को सरकार का हाई वोल्टेज मार्केटिंग स्टंट बताया है। बृहस्पतिवार को वक्तव्य जारी करते हुए अजय राय ने कहा कि पुरातन सभ्यता व संस्कृति के शहर काशी में रोपवे कारगर साबित नहीं होगा। काशी के लिए मेट्रो परियोजना बेहतर रहेगी, जिस पर सरकार को विचार करना चाहिए। रोपवे योजना से काशी विद्यापीठ के कई संकाय, भवन और साथ ही भारत माता मंदिर भी प्रभावित होगा। सरकार पुनर्विचार कर रोपवे योजना वापिस ले और काशी को मेट्रो योजना की सौगात दे।