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Varanasi News: चीनी और कताई मिल की भूमि उद्योग विभाग को देने का प्रस्ताव

Sun, 08 Jan 2023 11:03 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 08 Jan 2023 11:03 PM IST
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Proposal to give land of sugar and spinning mill to industry department
रसड़ा स्थित बंद पड़ी कताई मिल। - फोटो : BALLIA
बलिया। नई औद्योगिक नीति के तहत जिले को 300 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य दिया गया है। इसमें लगभग 200 करोड़ के निवेश के लिए प्रस्ताव उद्योग विभाग को मिल भी चुका है। जनपद को उद्योग स्थापित करने के लिए निवेश के प्रस्ताव तो मिल रहे हैं, लेकिन इन उद्योगों के लिए भूमि उपलब्ध कराना भी विभाग के लिए चुनौती के समान है। इस समस्या के समाधान के लिए जिला प्रशासन ने रसड़ा स्थित बंद पड़ी चीनी मिल और कताई मिल की भूमि को उद्योग विभाग को हस्तांतरित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा है।
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नई औद्योगिक नीति के तहत मिल रहे प्रस्ताव में जिले में अब तक बड़ा प्रस्ताव 75 करोड़ की लागत से पॉलिस्टर धागा बनाने की फैक्ट्री लगाने का प्रस्ताव मिला है। विभाग के अनुसार, फैक्ट्री लगाने के लिए लगभग 50 एकड़ भूमि की आवश्यकता है। ऐसे ही कई अन्य प्रस्ताव भी मिले हैं। उद्योग विभाग के पास एक स्थान पर 50 एकड़ भूमि उपलब्ध नहीं है। ऐसे में भूमि के लिए जिला प्रशासन के साथ बैठक कर रणनीति बनाई गई है। इस रणनीति के तहत रसड़ा की बंद पड़ी चीनी मिल और कताई मिल की भूमि को उद्योग विभाग को हस्तांतरित करने के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। यदि शासन से भूमि हस्तांतरित करने की अनुमति मिलती है तो उद्योग विभाग की समस्याओं का समाधान हो सकता है।
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खाली हैं 41 प्लाट
बलिया। मिनी इंडस्ट्रियल इस्टेट के रूप में जिगनी खास औद्योगिक परिक्षेत्र लगभग 30 वर्ष पहले अस्तित्व में आया था। इंडस्ट्रियल इस्टेट घोषित होने के बाद भी आज तक यहां मूलभूत सुविधाओं की बहाली नहीं हो सकी है। विभागीय उपेक्षा और परिक्षेत्र की देखरेख के अभाव में अधिकांश भूखंड पर ग्रामीणों ने कब्जा जमा रखा है। तीन दशक बाद भी यहां एक भी उद्यम स्थापित नहीं हो सका है। जिगनी खास मिनी औद्योगिक परिक्षेत्र में 128 वर्गमीटर के कुल 41 प्लॉट खाली हैं।
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86 एकड़ में पावर कारपोरेशन को दी गई 26 एकड़ भूमि
बलिया। रसड़ा में जो हाल चीनी मिल का है, उससे भी बदतर स्थिति कताई मिल की। पिछले 23 साल से बंद पड़ी मिल को चालू कराने को लेकर आंदोलित सैकड़ों श्रमिक आज भी उम्मीद लगाए हुए हैं। कई बार प्रदर्शन हुए पर शासन ने कोई कदम नहीं उठाया। रसड़ा के नागपुर गांव के समीप लगभग 86 एकड़ जमीन पर 23 करोड़ से 10 अगस्त 1986 को मिल की स्थापना हुई थी। उन दिनों 1500 श्रमिक कार्य करते थे। मिल को बीमार और घाटे का उपकरण दिखाकर मार्च 1999 में बंद कर दिया गया। यहां 86 एकड़ भूमि में 26 एकड़ भूमि पावर कारपोरेशन को दी जा चुकी है। बची 50 से 60 एकड़ भूमि के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
1974 में रखी गई थी चीनी मिल की नींव
बलिया। रसड़ा में द किसान सहकारी चीनी मिल की नींव 1974 में समीपवर्ती माधवपुर गांव में रखी गई थी। करीब 81 एकड़ में चीनी मिल परिसर फैला था। मिल का 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने शिलान्यास किया था। 1975-76 में जिलाधिकारी ने मिल का पेराई सत्र भी चालू कराया। प्रबंध तंत्र के लूटखसोट का आलम था कि प्रतिवर्ष करोड़ों के घाटे में चलने लगी। लगभग डेढ़ अरब से ज्यादा का घाटा होने पर शासन ने सत्र 2012-13 में पेराई सत्र को बंद कर दिया। उस समय मिल में 1200 के आसपास स्थायी और अस्थायी कर्मचारी कार्यरत थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रसड़ा चीनी मिल को दोबारा शुरू करने के लिए साल 2018-19 के बजट में 350 करोड़ की धनराशि का प्रावधान किया था। टेंडर भी निकला लेकिन इस मिल को संचालित करने के लिए कोई देवदूत आगे नहीं आया। दोनों मिलों को फिर चलाने के लिए कई आंदोलन भी हुए, लेकिन इसका नतीजा सिफर ही रहा।

जिलाधिकारी सौम्या अग्रवाल ने बताया कि रसड़ा की चीनी और कताई मिल की भूमि बेकार पड़ी हुई है। इसकी भूमि उद्योग विभाग को हस्तांतरित करने के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। यहां उद्योग लगते हैं तो लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
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