{"_id":"665b309a5e5d2ff12506a3fe","slug":"professor-got-job-in-panchkarma-department-of-bhu-on-basis-of-fake-caste-certificate-2024-06-01","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"आरटीआई: फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर बीएचयू के पंचकर्म विभाग में मिली नौकरी, कुलपति से की शिकायत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आरटीआई: फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर बीएचयू के पंचकर्म विभाग में मिली नौकरी, कुलपति से की शिकायत
Sat, 01 Jun 2024 08:04 PM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Sat, 01 Jun 2024 08:04 PM IST
सार
बीएचयू के पंचकर्म विभाग में फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर प्रोफेसर की नौकरी मिल गई। इसका खुलासा आरटीआई में हुआ। उसने राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय में भी फर्जी जाति प्रमाणपत्र पर दाखिला लिया था।
विज्ञापन
BHU
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बीएचयू के पंचकर्म विभाग में नियुक्ति के लिए फर्जी जाति प्रमाणपत्र का इस्तेमाल का मामला सामने आया है। पंचकर्म विभाग में नियुक्त प्रोफेसर ने ना सिर्फ नियुक्ति बल्कि बीएमएस में दाखिले के लिए भी इसका इस्तेमाल किया है। इसकी शिकायत बीएचयू के कुलपति और आयुर्वेद महाविद्यालय के प्राचार्य से की गई है।
विज्ञापन
बीएचयू के आयुर्वेद संकाय के पंचकर्म विभाग में कार्यरत प्रो. जयप्रकाश सिंह ने नियुक्ति और दाखिले में फर्जी जाति प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया है। इसका खुलासा आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना में हुआ है। जनसूचना अधिकारी ने अपने पत्र में कहा है कि प्रो. जयप्रकाश सिंह का जाति प्रमाणपत्र तहसील से जारी नहीं किया गया है।
विज्ञापन
शिकायतकर्ता गौतम घोष ने कुलपति को लिखे गए शिकायती पत्र में कहा है कि बीएचयू के आयुर्वेद संकाय के पंचकर्म विभाग में कार्यरत प्रो. जयप्रकाश सिंह ने आरक्षण का लाभ लेने के लिए जिस जाति प्रमाणपत्र का उपयोग किया है वह फर्जी है।
विज्ञापन
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि जिस जाति प्रमाणपत्र को आधिकारिक दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल किया गया है, उसकी जांच कराई जाए। वहीं प्रो. जयप्रकाश सिंह का कहना है सारे आरोप निराधार हैं। उन्होंने कोई फर्जी दस्तावेज नहीं इस्तेमाल किया है।
बीएमएस में दाखिले के लिए भी लिया था इसी जातिप्रमाण पत्र का सहारा
राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के प्राचार्य से भी इस मामले की शिकायत की गई है। इसके अनुसार प्रो. जयप्रकाश सिंह ने 1998 में राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय में सन 1998 में बीएमएस कोर्स में दाखिले के लिए इसी जाति प्रमाणपत्र का सहारा लिया था। राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. शशि सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में आने पर जांच की जाएगी।
1997 में जारी हुआ जाति प्रमाणपत्र लगाया
प्रो. जयप्रकाश सिंह ने जो जाति प्रमाणपत्र लगाया है वह 22 जनवरी 1997 को जमानिया तहसील से जारी किया गया है। इसमें तहसीलदार की मुहर और दस्तखत भी है। शिकायतकर्ता गौतम घोष ने एक मार्च 2024 को तहसीलदार एवं जनसूचना अधिकारी जमानिया को आरटीआई के तहत जाति प्रमाणपत्र के संदर्भ में जानकारी मांगी थी। जवाब नहीं मिलने पर प्रथम अपीलीय जनसूचना अधिकारी से प्रथम अपील की थी। इसके बाद उनको जानकारी दी गई कि जाति प्रमाणपत्र फर्जी है।
बीएमएस में दाखिले के लिए भी लिया था इसी जातिप्रमाण पत्र का सहारा
राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के प्राचार्य से भी इस मामले की शिकायत की गई है। इसके अनुसार प्रो. जयप्रकाश सिंह ने 1998 में राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय में सन 1998 में बीएमएस कोर्स में दाखिले के लिए इसी जाति प्रमाणपत्र का सहारा लिया था। राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. शशि सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में आने पर जांच की जाएगी।
1997 में जारी हुआ जाति प्रमाणपत्र लगाया
प्रो. जयप्रकाश सिंह ने जो जाति प्रमाणपत्र लगाया है वह 22 जनवरी 1997 को जमानिया तहसील से जारी किया गया है। इसमें तहसीलदार की मुहर और दस्तखत भी है। शिकायतकर्ता गौतम घोष ने एक मार्च 2024 को तहसीलदार एवं जनसूचना अधिकारी जमानिया को आरटीआई के तहत जाति प्रमाणपत्र के संदर्भ में जानकारी मांगी थी। जवाब नहीं मिलने पर प्रथम अपीलीय जनसूचना अधिकारी से प्रथम अपील की थी। इसके बाद उनको जानकारी दी गई कि जाति प्रमाणपत्र फर्जी है।