कौन थीं प्रो.अन्नपूर्णा शुक्ला: 2019 के चुनाव से पहले पीएम मोदी ने क्यों छूए थे इनके पैर, ये फोटो हुई थी वायरल
प्रो. अन्नपूर्णा शुक्ला वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावक बनी थीं। 26 अप्रैल 2019 को नामांकन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रो. अन्नपूर्णा शुक्ला के पास गए। यहां उन्होंने प्रो. अन्नपूर्णा शुक्ला का पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इसके बाद नामांकन करने गए।
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महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की मानस पुत्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावक रही प्रो. अन्नपूर्णा शुक्ला (94) का शनिवार को निधन हो गया। वह पिछले कुछ दिनों से बुखार से ग्रसित थीं। रविंद्रपुरी स्थित एक निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। शनिवार देर शाम हरिश्चंद्र घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके छोटे बेटे डॉ. डॉ. कृष्णकांत शुक्ल ने मुखाग्नि दी।
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गोरखपुर विश्वविद्यालय में 1980 से 83 तक कुलपति रहे स्वर्गीय प्रो. बेनीमाधव शुक्ला की पत्नी प्रो. अन्नपूर्णा शुक्ला बीएचयू महिला महाविद्यालय की पूर्व प्राचार्या थीं। महिला महाविद्यालय में गृह विज्ञान विभाग की स्थापना और इस विषय की पढ़ाई शुरू कराने का श्रेय प्रो. अन्नपूर्णा शुक्ला को ही जाता है। करौंदी स्थित नंदनगर कॉलोनी में प्रो. शुक्ला अपने बेटे डॉ. कृष्णकांत शुक्ल के साथ रहती थीं। इनके तीन बेटे डॉ. कमलकांत शुक्ला, डाॅ. कौशलकांत शुक्ला और डॉ. रमाकांत शुक्ला विदेश में रहते हैं। निधन से शहर के प्रबुद्धजनों के साथ ही महिला महाविद्यालय बीएचयू व अन्य विभागों के शिक्षक, अधिकारियों व विद्यार्थियों ने शोक जताया।
चुनाव में नामांकन से पहले पीएम मोदी ने छूए थे पैर
प्रो. अन्नपूर्णा शुक्ला वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावक बनी थीं। 26 अप्रैल 2019 को नामांकन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रो. अन्नपूर्णा शुक्ला के पास गए। यहां उन्होंने प्रो. अन्नपूर्णा शुक्ला का पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इसके बाद नामांकन करने गए।
सामाजिक कार्यों में भी निभाई अहम जिम्मेदारी
बीएचयू महिला महाविद्यालय में करीब 40 वर्षों तक प्रोफेसर रहीं प्रो. अन्नपूर्णा शुक्ला सामाजिक कार्यों में भी बढ़चढ़कर भागीदारी करती थीं। काशी अनाथालय लहुराबीर परिसर में ही उन्होंने वनिता पाॅलीटेक्निक की स्थापना की। यहां छात्राओं को स्वावलंबी और हुनरमंद बनाने की दिशा में कई पाठ्यक्रम व कार्यक्रम शुरू कराया।
महामना का वादा पूरा किया
प्रो. अन्नपूर्णा शुक्ला 1935 में पहली बार महामना पंडित मदन मोहन मालवीय मिली थीं। गणित के प्रोफेसर रहे अपने पिता स्वर्गीय पंडित बाबू लाल त्रिपाठी के साथ मालवीय भवन में महामना से मिलने गई थीं। उस वक्त महामना ने उनसे बात की। उनसे पूछा कि बड़ी होकर क्या बनना चाहती हो? उन्होंने जवाब दिया था डॉक्टर बनना चाहती हूं। इस पर मालवीय जी ने उनके पिता से कहा था कि बिटिया को खूब पढ़ाना ताकि ये बीएचयू की सेवा कर सके। इसके बाद उन्होंने पढ़ाई की, पटना से एमबीबीएस किया और डॉक्टर बन गईं। डॉक्टर बनने के बाद वो बीएचयू से जुड़ गईं। महिला महाविद्यालय के हॉस्टल डिस्पेंसरी की मेडिकल अफसर बनीं। इसके बाद डोमेस्टिक साइंस की लेक्चरर। इसके बाद गृहविज्ञान विभाग से लेकर महिला महाविद्यालय की प्राचार्य तक का सफर तय किया।