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लॉकडाउन में विकसित हुई जीवन जीने की नई कला
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वाराणसी। लाकडाउन में लोग अपने घरों में हैं। बच्चों की ऑनलाइन क्लास चल रही है तो पेंटिंग, कल्चरल कंपीटीशन सहित अन्य प्रतियोगिताओं के भी आयोजन हो रहे हैं। इस बीच बहुत से ऐसे शिक्षक जो सामान्य दिनों की तरह ही शैक्षिक गतिविधियों में खुद को व्यस्त रखे हुए हैं। इन्हीं में से एक हैं महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर योगेंद्र सिंह। पूर्व में जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया के संस्थापक कुलपति रहे प्रो. योगेंद्र सिंह प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत नामक पुस्तक को लिख रहे हैं। इसके अलावा विभिन्न विश्वविद्यालयों, शिक्षण संस्थानों में ऑनलाइन वेबिनार में इतिहास के विविध पहलुओं पर अपनी बात रखने के साथ ही घर में बनी लाइब्रेरी में भी खूब समय दे रहे हैं। उनका कहना है कि शुरू में कुछ दिन तो कठिन जरूर गुजरे, लेकिन अब तो सामान्य अनुभूत होने लगा है। जीवन जीने की एक नई कला विकसित हो गई है।
लॉकडाउन में अध्ययन का अलग ही अनुभव
प्रोफेसर योगेंद्र सिंह का कहना है कि लॉकडाउन में अध्ययन का एक अलग अनुभव मिल रहा है। रोजाना सुबह कुछ किताबों के साथ ही कंप्यूटर पर देश-विदेश की जानकारी हासिल करना और इसके बाद छात्रों, शिक्षकों से परामर्श चल रहा है। लॉकडाउन ने जिंदगी को अनुशासित और व्यवस्थित कर दिया है। भागदौड़ की जिंदगी अपने आप चली गई है। अवसाद के क्षणों में भी कैसे जिया जा सकता है, इसकी समझ आने लगी है। लंबित कार्यों को पूरा करने का भी पर्याप्त समय मिल गया है।
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लॉकडाउन में अध्ययन का अलग ही अनुभव
प्रोफेसर योगेंद्र सिंह का कहना है कि लॉकडाउन में अध्ययन का एक अलग अनुभव मिल रहा है। रोजाना सुबह कुछ किताबों के साथ ही कंप्यूटर पर देश-विदेश की जानकारी हासिल करना और इसके बाद छात्रों, शिक्षकों से परामर्श चल रहा है। लॉकडाउन ने जिंदगी को अनुशासित और व्यवस्थित कर दिया है। भागदौड़ की जिंदगी अपने आप चली गई है। अवसाद के क्षणों में भी कैसे जिया जा सकता है, इसकी समझ आने लगी है। लंबित कार्यों को पूरा करने का भी पर्याप्त समय मिल गया है।
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