वाराणसी में फर्जी तरीके से बंदी रिहा: आजाद अधिकार सेना ने लगाया आरोप, शासन से जांच की मांग; जानें मामला
आरोपी अलीगढ़ का रहने वाला है। आजाद अधिकार सेना ने इस मामले में शासन से जांच करवाकर कार्रवाई की मांग की है। बताया है कि आरोपी के खिलाफ आईटी एक्ट में कई मामले दर्ज हैं।
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फर्जी रिहाई आदेश के आधार पर जिला कारागार से एक बंदी को रिहा कर दिया गया। मामला सोनभद्र स्थानांतरित किए गए कारागार अधीक्षक डॉ. उमेश कुमार सिंह के कार्यकाल का बताया जा रहा। मामले की शिकायत आजाद अधिकार सेना के अध्यक्ष ने शासन से की है।
आजाद अधिकार सेना के अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने सोमवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी की। उन्होंने बताया कि अलीगढ़ निवासी सुनील के खिलाफ अलीगढ़, मेरठ, बरेली और वाराणसी सहित अन्य जिलों में आईटी एक्ट के मुकदमे दर्ज हैं। वह कुछ दिन पहले तक वाराणसी के जिला कारागार में बंद था।
अन्य मामलों में सुनील को जमानत मिल गई है, लेकिन अलीगढ़ के आईटी एक्ट के मुकदमे में उसे जमानत नहीं मिली है। अलीगढ़ के एसीजेएम-4 का एक फर्जी रिहाई आदेश वाराणसी के जिला कारागार में 4 मार्च 2025 को प्राप्त होना दिखाया गया।
उसके आधार पर सुनील को एक-दो दिन बाद कारागार से छोड़ दिया गया। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में उसकी जमानत याचिका संख्या लंबित है, जिसकी सुनवाई 25 मार्च को होनी है। अमिताभ ठाकुर ने कहा कि यह पूरा प्रकरण जिला कारागार के पूर्व अधीक्षक डॉ. उमेश कुमार सिंह के कार्यकाल का है।
बोले अधिकारी
सोशल मीडिया के माध्यम से मामला संज्ञान में आया है। मामले की जांच कराई जाएगी और सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। - राजेश कुमार श्रीवास्तव, डीआईजी कारागार