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Varanasi News: बनारसी साड़ी और कपड़ों की कीमतों में 10 से 15% की बढ़ोतरी
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वाराणसी। जिले में बृहस्पतिवार से बनारसी साड़ी, सूट, दुपट्टा, शेरवानी और अन्य फैब्रिक से जुड़े कपड़ों के दामों में 10 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि प्रभावी हो गई है। बिजली की बढ़ी दरों और कच्चे माल (यार्न) की कीमतों में बेतहाशा उछाल के चलते स्थानीय बुनकरों व व्यापारियों ने मिलकर यह कदम उठाया है।
बुनकरों के अनुसार, जो कपड़े पहले 1000 रुपये में मिलते थे, अब वह 1100 से 1200 रुपये तक मिलेंगे। इसी प्रकार 5000 में मिलने वाली साड़ी की कीमत 5500 रुपये तक हो गई है। बुनकर उद्योग मंडल के महासचिव ज़ुबैर आदिल ने बताया कि बिजली की दरों में करीब सात गुना वृद्धि होने से बुनकर वर्ग पहले से ही भारी आर्थिक तंगी का सामना कर रहा था। इसके अलावा पिछले कुछ समय में यार्न सहित अन्य कच्चे माल के दामों में 20 से 25 प्रतिशत तक की तीव्र बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कच्चे माल के लगातार महंगे होने से कपड़ों की उत्पादन लागत अत्यधिक बढ़ गई थी, जिसके कारण पुराने दामों पर व्यापार चलाना संभव नहीं रह गया था।
उत्पादन लागत के बढ़ते दबाव को देखते हुए बुनकर बिरादराना तंजीम, बुनकर उद्योग मंडल और हिंदू बुनकर कल्याण समिति समेत विभिन्न गिरस्ता व व्यापारी बंधुओं की साझा बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है। बैठक में तय हुआ कि सभी तैयार माल (साड़ी, सूट, शेरवानी एवं फैब्रिक) की बिक्री 10 से 15 प्रतिशत बढ़ी हुई कीमतों पर ही की जाएगी। कपड़ों के मूल्य में की गई इस बढ़ोतरी का लाभ सीधे कारीगरों तक भी पहुंचेगा और उनकी मजदूरी में भी इजाफा किया जाएगा।
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बुनकरों के अनुसार, जो कपड़े पहले 1000 रुपये में मिलते थे, अब वह 1100 से 1200 रुपये तक मिलेंगे। इसी प्रकार 5000 में मिलने वाली साड़ी की कीमत 5500 रुपये तक हो गई है। बुनकर उद्योग मंडल के महासचिव ज़ुबैर आदिल ने बताया कि बिजली की दरों में करीब सात गुना वृद्धि होने से बुनकर वर्ग पहले से ही भारी आर्थिक तंगी का सामना कर रहा था। इसके अलावा पिछले कुछ समय में यार्न सहित अन्य कच्चे माल के दामों में 20 से 25 प्रतिशत तक की तीव्र बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कच्चे माल के लगातार महंगे होने से कपड़ों की उत्पादन लागत अत्यधिक बढ़ गई थी, जिसके कारण पुराने दामों पर व्यापार चलाना संभव नहीं रह गया था।
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उत्पादन लागत के बढ़ते दबाव को देखते हुए बुनकर बिरादराना तंजीम, बुनकर उद्योग मंडल और हिंदू बुनकर कल्याण समिति समेत विभिन्न गिरस्ता व व्यापारी बंधुओं की साझा बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है। बैठक में तय हुआ कि सभी तैयार माल (साड़ी, सूट, शेरवानी एवं फैब्रिक) की बिक्री 10 से 15 प्रतिशत बढ़ी हुई कीमतों पर ही की जाएगी। कपड़ों के मूल्य में की गई इस बढ़ोतरी का लाभ सीधे कारीगरों तक भी पहुंचेगा और उनकी मजदूरी में भी इजाफा किया जाएगा।
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