Fog Alert: 15 दिनों में 6 हजार से 10 हजार तक पहुंची गेंदे की माला, पाले की भेंट चढ़ीं फूलों की कलियां; चिंता
Varanasi News: चिरईगांव, राजातालाब, सेवापुरी समेत कई ग्रामीण क्षेत्रों में सैकड़ों किसान गेंदे और गुलाब की खेती करते हैं। किसानों के अनुसार माघ मेला शुरू होते ही फूलों की मांग कई गुना बढ़ जाती है।
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माघ मेला और घने कोहरे से फूलों की महंगाई बढ़ गई है। घने कोहरे ने फूलों की खेती और कारोबार दोनों को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। इन दिनों फूलों के दाम अचानक आसमान छूने लगे हैं। किसानों के मुताबिक, कोहरे और धूप की कमी के कारण फूलों की पैदावार घट गई है और बाजार में आपूर्ति कम हो गई है।
माली राजेश कुमार ने बताया कि मलदहिया स्थित फूलमंडी में 15 दिन पहले जो गेंदे की माला 6000 रुपये प्रति सैकड़ा मिल रही थी, वहीं अब उनकी कीमत 8 हजार से 10 हजार रुपये प्रति सैकड़े तक पहुंच गई है।
गुलाब के फूल जो 1500 से 2000 रुपये सैकड़े मिल रहे थे, वह अभी 2500 से 3000 रुपये में सौ मिल रहे हैं। यही हाल रजनीगंधा और बेले की माला का भी है। माली और खुदरा व्यापारी बताते हैं कि लागत बढ़ने के बावजूद ग्राहक पुराने दाम पर ही माला मांग रहे हैं। शहर के बांसफाटक और मलदहिया स्थित फूलमंडी को जिले की सबसे बड़ी थोक मंडी माना जाता है।
माघ में कम हुई गेंदा की पैदावार
राजातालाब से आए व्यापारी सरताज अली बताते हैं कि माघ में गेंदे के फूल की पैदावार में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है। सामान्य मौसम में जिन किसानों के खेतों से रोजाना दस टोकरी गेंदे के फूल निकलते थे, अब बमुश्किल चार टोकरियां ही फूल मिल पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि कोहरे की वजह से कलियों पर पाले का असर पड़ रहा है। धूप के बिना फूल पूरी तरह खिल नहीं पाते।
| फूल | कीमत (15 दिन पहले) | कीमत (अब) |
| गेंदे की बड़ी माला | 6000 | 8-10 हजार रुपये प्रति सैकड़ा |
| गुलाब | 1500 से 2000 | 2500 से 3000 रुपये प्रति सैकड़ा |
| रजनीगंधा | 400 से 500 | 600 से 750 रुपये प्रति सैकड़ा |
| बेले की माला | 700 से 800 | 1000 से 100 रुपये प्रति सैकड़ा |
धूप की कमी से कमजोर हो रहीं गुलाब की पंखुड़ियां
वहीं, गुलाब की खेती करने वाले किसानों की परेशानी कुछ अलग है। चिरईगांव के किसान रामेश्वर पाल बताते हैं कि ठंड और कोहरे में गुलाब की पैदावार तो होती है, लेकिन धूप की कमी से पंखुड़ियां कमजोर हो जाती हैं। तोड़ने और बांधने के दौरान पंखुड़ियां झड़ जाती हैं, जिससे साबुत फूल कम बचते हैं।