रावण को दहन करने की तैयारियां जोरों पर, इस राम की लीला में कलाकार नहीं करते संवाद
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वाराणसी के डीरेका में हो रही रामलीला की तैयारियां जोरों-शोरों पर हैं। दशहरे की तैयारियां अब शुरू कर दी हैं। इकलौता दशहरे के दिन डीरेका के खेल मैदान में होने वाले रामचरित मानस पर आधारित ढाई घंटे के रूपक का मेगा रिहर्सल डीरेका के संस्थान में शुरू हुआ। आयोजकों का दावा है को ऐसा कहीं नहीं होता है।
डीरेका में दशहरे के दिन होने वाले रामचरित मानस पर आधारित राम वन गमन से लेकर रावण वध तक की लीला को ढाई घंटे में रूपक के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। जिसमें हजारों की संख्या में लोग पहुचते हैं। यहां के रूपक में पात्र संवाद नहीं बोलते है। संवाद सिर्फ मंच से किया जाता है।
यहां पर 60 प्रतिशत दृश्य और 40 प्रतिशत श्रब्य होते हैं। यहां पर संवाद मंच से बोले जाते हैं और पात्र मूक अभिनय करते हैं। इसमें रामचरित मानस की चौपाइयों के गीत, कजरी और हिंदी की सभी विधाओं का प्रयोग किया जाता है।
विजया दशमी समिति डीरेका के निदेशक एसडी सिंह ने बताया कि यहां पर हजारों की संख्या में दर्शक आते हैं। 8 अक्टूबर को रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन होगा।