'ईदगाह का हामिद' छुड़ाएगा बच्चों से मोबाइल की लत, प्रेमचंद की कहानियों में है जीवन का मर्म
'कलम के सिपाही' कहे जाने वाले प्रेमचंद (Premchand) की लिखी कहानियां और उपन्यास आज भी सबके दिलों पर राज करते हैं। मुंशी प्रेमचंद (Munshi premchand) की कहानी 'ईदगाह' किसे नहीं याद होगी। लेकिन अब ये कहानी बच्चों से मोबाइल की लत को छुड़ाएगा।
मनोचिकित्सकों के अनुसार प्रेमचंद की ईदगाह का पात्र हामिद बच्चों की बुरी आदतों से परेशान मां-बाप के लिए उदाहरण बन सकता है। यदि मां-बाप अपने बच्चों को हामिद की तरह बनाएं तो बच्चों के बिगड़ने की संभावना कम हो जाएगी।
हामिद की तरह सोच बच्चों को कई बुराईयों से मुक्ति दिलाएगी, खासकर मोबाइल गेम से। हामिद का चरित्र आज के बच्चों के लिए आदर्श बन सकता है जो अपनी बूढ़ी दादी की चिंता करता है।
ये है ईदगाह की कहानी
वाराणसी के लमही में विशाल भारत संस्थान की ओर से मुंशी प्रेमचंद की कहानियों का मंचन किया जा रहा है। जिसमें ईदगाह कहानी की पात्र बूढ़ी दादी आमिना के लिए ईद पर पैसे का अभाव परेशानी का सबब है।
वह सेंवई बनाने और अपने पोते हामिद को मेला घूमने के लिए तीन पैसा देना नहीं भूली। गांव वालों के साथ हामिद भी ईदगाह गया। बच्चों ने अपने लिए खिलौने और मिठाई खरीदी लेकिन हामिद ने दादी के लिए चिमटा खरीदा।
हामिद ने खिलौने और मिठाई का त्याग किया और बूढ़ी दादी का ख्याल रखा। जब आमिना को हामिद ने चिमटा मोल लेने का प्रयोजन बताया तो उसकी दादी की आंखे भर आई।
विशाल भारत संस्थान के अध्यक्ष डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि मुंशी जी ने कहानियों के माध्यम से समाज को व्यावहारिक शिक्षा दी है। कार्यक्रम में अर्चना भारतवंशी, नजमा परवीन, नाजनीन अंसारी, डॉ. मृदुला जायसवाल, शिवेंद्र सिंह, धनंजय यादव, ताजीम, मो. अजहरूद्दीन, राशिद, तबरेज, शालिनी, पौरिक सिंह राणावत आदि ने भाग लिया।