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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Pradosh Kaal of 31 October Deepawali celebrated Panchang makers gave the final decision

Diwali 2024 : 31 अक्तूबर को 2.24 घंटे का प्रदोष काल, इसी दिन मनेगी दीपावली; पंचांगकारों ने सुनाया अंतिम निर्णय

Wed, 16 Oct 2024 04:39 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Wed, 16 Oct 2024 04:39 PM IST
सार

Varanasi News: दीपावली की तिथि को लेकर बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय, काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट, काशी विद्वत परिषद और पंचांगकारों ने बैठक की। इस बैठक में विभिन्न विषयों को लेकर भी चर्चा की गई।

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Pradosh Kaal of 31 October Deepawali celebrated Panchang makers gave the final decision
दीपावली की तारीख को लेकर संशय की स्थिति पर चर्चा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देशभर में दीपावली 31 अक्तूबर को मनाई जाएगी। 31 अक्तूबर को अपराह्न 3:52 बजे अमावस्या की शुरुआत हो रही है जो एक नवंबर की शाम 5.13 बजे तक रहेगी। इसी दिन शाम से रात्रिव्यापिनी अमावस्या लग जाएगी। इस वजह से ही 31 अक्तूबर को दीपोत्सव का मुहूर्त बन रहा है। 

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दीपावली हमेशा प्रदोष में मनाई जा जाती है और 31 अक्तूबर को 2.24 घंटे का प्रदोष काल है। जबकि एक नवंबर को देश के कुछ हिस्से में 10 मिनट से लेकर अधिकतम 60 मिनट ही प्रदोष काल है। ऐसे में उस दिन दीपावली मना पाना संभव नहीं है। यदि कोई मनाता है तो वो शास्त्रों के नियम से परे होगा।
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बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय, काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट, काशी विद्वत परिषद और पंचांगकारों का कहना है कि धर्मसंगत रूप से दीपावली 31 अक्तूबर को ही होगी। मंगलवार को बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि एक नवंबर को लेकर जो संदेह था, अब खत्म हो गया है। इस साल पंचांगों में अमावस्या 31 अक्तूबर को पूर्ण प्रदोष काल में है। जबकि एक नवंबर को अमावस्या प्रदोष काल के कुछ भाग में ही मिल रही है। ऐसे में शास्त्रों को मानते हुए 31 अक्तूबर ही दीपावली के लिए सबसे उचित दिन है।

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पश्चिमी राज्यों के पंचांगों में दो दिन की अमावस्या
ज्योतिष विभाग के प्रो. विनय पांडेय ने बताया कि राजस्थान, गुजरात और केरल के पंचांगों में दो दिन अमावस्या की बात थी। चूंकि वहां पर सूर्यास्त भारत के बाकी हिस्सों से थोड़ा देर से होता है। ऐसे में एक नवंबर को कहीं 10 मिनट, कहीं 45 मिनट तो कहीं पर एक घंटे की अमावस्या है। जबकि, 31 अक्तूबर को ही पूरे देश में अमावस्या है। अयोध्या समेत पूरे देश में दीपावली 31 अक्तूबर को मनाई जाए, इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखी जाएगी।

एक नवंबर को सूर्यास्त के पहले खत्म होगी अमावस्या
काशी विद्वत परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रो. रामचंद्र पांडेय ने कहा कि इस साल के सभी पारंपरिक और दृश्य गणित पंचांगों में दीपावली की तारीख 31 अक्तूबर ही है। लेकिन, पश्चिमी राज्यों के पंचांगों में ऐसा संदेह था। इसे अब खत्म कर दिया गया है। पारंपरिक गणित के पंचांगों में किसी भी प्रकार का भेद नहीं है, क्योंकि उन सभी पंचांगों के अनुसार अमावस्या की शुरुआत 31 अक्तूबर को सूर्यास्त के पहले होकर एक तारीख को सूर्यास्त के पूर्व ही समाप्त हो रही है।

प्रो. चंद्रमौलि उपाध्याय ने कहा कि इस निर्णय को सभी स्वीकार करते हुए धर्म और संस्कृति की सबको रक्षा करनी चाहिए। श्री काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि शास्त्रों की मर्यादा के पालन में 31 को ही दीपावली मनाया जाना शास्त्र सम्मत है।

स्थान बदलने से आ जाता है तारीख में अंतर
ज्योतिष विभागाध्यक्ष प्रो. शत्रुघ्न त्रिपाठी ने कहा कि सनातन धर्म में व्रत पर्व के निर्धारण में तिथि, ग्रह, नक्षत्रादि के मानों का भी मूल्यांकन किया जाता है। ऐसे में स्थान बदलने से व्रत पर्व आदि की तिथियों में अंतर पड़ना भी स्वाभाविक है। धर्मशास्त्र कहते हैं कि 31 अक्तूबर ही सबसे बेहतर तारीख है। डॉ. सुभाष पांडेय ने कहा कि बीएचयू द्वारा प्रकाशित विश्व पंचांग सहित काशी के सभी पंचांगों में इसका स्पष्ट निर्देश है। इस दौरान डॉ. रामेश्वर शर्मा, डॉ. सुशील गुप्ता जी, विश्व पंचांगकार डॉ. अजय कुमार पांडेय आदि मौजूद रहे।

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