Pollution: बनारस को बीमार बना रहा प्रदूषण, रोज 300 मरीज पहुंच रहे अस्पताल; कागजों पर ऑल इज वेल
Varanasi News: प्रदूषण से फेफड़ों की सूजन, सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द और खांसी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। लंबे समय तक ऐसी हवा में सांस लेना जानलेवा रोगों का कारण भी बन सकता है।
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जिले के सड़कों पर उड़ रही धूल और प्रदूषण से लोग बीमार हो रहे हैं। बीएचयू, जिला, मंडलीय अस्पताल समेत सभी सीएचसी और पीएचसी की ओपीडी में प्रतिदिन 300 से अधिक मरीज इससे पीड़ित आ रहे हैं। इनमें स्कूल जाने वाले बच्चे, बुजुर्ग और हर उम्र के शामिल हैं।
इन लोगों में सांस संबंधी समस्या, एलर्जी, आंखों में जलन और चुभन जैसी समस्याएं आ रही हैं। चिकित्सक इन मरीजों के इलाज के साथ-साथ इन्हें मास्क लगाने की सलाह दे रहे हैं।
दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. मनीष यादव बताते हैं कि हवा में मौजूद सूक्ष्म कण, जहरीली गैसें और धुआं न केवल सर्दी-खांसी बढ़ा रहे हैं, बल्कि दमा, ब्रोंकाइटिस और एलर्जी जैसी पुरानी बीमारियों को और गंभीर बना रहे हैं।
वरिष्ठ बाल रोग चिकित्सक डॉ. ओपी सिंह बताते हैं कि बच्चों को इन इलाकों में भेजते समय उन्हें मास्क का प्रयोग करने की सलाह देनी चाहिए। प्रदूषण से बच्चों में कई बीमारियां हो सकती हैं। बचाव ही इसका सटीक इलाज है।
जिले में सरकारी महकमे के मुताबिक, सबकुछ ठीक चल रहा है, लेकिन प्रदूषण कम करने के लिए एक भी अभियान धरातल पर नहीं चलाए जा रहे हैं। बृहस्पतिवार को शहर का एक्यूआई 161 (अस्वस्थ) तक रहा, जो कि सामान्य से 111 इकाई अधिक था।
शहर में बड़ी-बड़ी मशीनें दिन-रात काम कर रही हैं और सड़कों को पांच से दस फीट तक खोदकर नई संरचनाओं को आकार दिया जा रहा है। शहर में भले ही विकास का काम तेजी से चल रहा हो, लेकिन इसका दुष्प्रभाव नागरिकों की सेहत पर पड़ रहा है।
इन इलाकों में सबसे अधिक समस्या : लहरतारा, विनायका-बड़ी गैबी मार्ग, कमच्छा-शंकुलधारा, छित्तूपुर, रविंद्रपुरी, बीएचयू ट्रॉमा सेंटर क्षेत्र, चांदपुर चौराहा, ककरमत्ता फ्लाईओवर, पहड़िया मंडी, सिद्धगिरीबाग, औरंगाबाद, सोनिया, पांडेयपुर, पुलिस लाइन–कचहरी रोड और मंडुआडीह सहित कई इलाकों में स्थिति खराब है।
प्रदूषण रोकने के लिए नहीं हुई कार्रवाई
प्रदूषण रोकने के मानकों के अनुसार, निर्माणस्थल पर लगातार पानी का छिड़काव और प्लास्टिक कवर से घेराबंदी जरूरी है, लेकिन शहर में अधिकांश जगह इन नियमों का पालन होता हुआ नज़र नहीं आ रहा है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। शहर में प्रदूषण रोकने के लिए विभाग तो मौजूद है, अधिकारी-कर्मचारी भी तैनात हैं, लेकिन धूल और धुएं की इस विकराल समस्या पर कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
प्रदूषण विभाग के ओर से हवा शुद्ध रखने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। विकास कार्यों वाले स्थलों पर धूल कम करने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। इसके अलावा यदि कहीं प्रदूषण की शिकायत आती है, तो वहां अभियान चलाने का प्रयास किया जाएगा। - रोहित सिंह, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रक