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निकाय चुनावः वाराणसी में बढ़े वोटिंग प्रतिशत ने बढ़ाई सभी दलों की बेचैनी

Mon, 27 Nov 2017 12:23 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Mon, 27 Nov 2017 12:23 AM IST
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Political parties are in tension after increasing voting percentage
मतदान प्रतिशत बढ़ने के चलते हार-जीत का अंतर कम होने के आसार - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी नगर निगम में 2012 के मुकाबले इस बार मतदान प्रतिशत में तकरीबन दस फीसदी की बढ़ोतरी ने राजनीतिक दलों की बेचैनी बढ़ा दी है। खासकर भाजपा, सपा और कांग्रेस की ओर से इसे अपने-अपने हक में बताने की होड़ लगी है। जीत सुनिश्चित होने के दावे किए जा रहे हैैं लेकिन सियासी सूत्रों का दावा है कि अंदरखाने सबकी बेचैनी बढ़ी है।
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बढ़े वोट प्रतिशत का गुणा-गणित बैठाने के लिए बूथवार मतदान प्रतिशत की समीक्षा की जा रही है लेकिन अलग-अलग वार्डों में समीकरणों के उतार-चढ़ाव को लेकर पार्टियां उलझन में हैं।  1995 में वाराणसी के नगर निगम बनने के बाद से चुनाव का यह पांचवां मौका है। अब तक नगर निगम की महापौर सीट पर चारों बार भाजपा का ही कब्जा रहा है।
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शहर में भाजपा के परंपरागत वोटरों की अच्छी-खासी तादाद है। पिछड़ा वर्ग और निमभन आय वर्ग के वोटरों तक अपनी पहुंच के लिए हाल के वर्षों में पार्टी ने लगातार कोशिशें की हैं और परंपरागत छवि को भी तोड़ा है। तीन तलाक के मसले पर कुछ मुस्लिम महिलाओं के भी समर्थन की बात चर्चा में रही है। नगर निगम पर लगातार कब्जा होने के बावजूद यहां की बुनियादी सुविधाओं की खस्ताहाली विपक्षियों के लिए प्रमुख चुनावी मुद्दा बनी।
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खासकर सपा और कांग्रेस ने भाजपा के नगर निगम के 22 साल के कार्यकाल को मुद्दा बनाया। दोनों ही पार्टियों के लिए परंपरागत वोटरों के साथ ही मुस्लिम मतों का भरोसा है। इस बार जातिगत समीकरणों के आधार पर भी वोटरों के बंटने की बात कही जा रही है। मुस्लिम बहुल इलाकों में वोटिंग प्रतिशत बेहतर रहा है। आम तौर पर भाजपा विरोधी मतदान का रुझान होने के नाते माना जा रहा है कि मुस्लिम मत सपा और कांग्रेस के बीच बंटे।

सियासी रणनीतिकारों के मुताबिक इस बार हार-जीत का अंतर कम रह सकता है। भाजपा को कांग्रेस और सपा ने कांटे की टक्कर दी है लेकिन मुस्लिम मत कहीं एक जगह नहीं गए। मतों के इस बंटवारे से भाजपा को लाभ होगा। 2012 के चुनाव में तकरीबन 33 फीसदी वोटिंग हुई थी और भाजपा के रामगोपाल मोहले मेयर चुने गए थे। 
 

धीमी शुरुआत मगर बढ़ते समय के साथ बढ़ी मतदान की रफ्तार

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पन्नालाल चौबे उच्च प्राथमिक विद्यालय में शाम साढ़े पांच बजे तक हुई वोटिंग - फोटो : अमर उजाला
वरुणापार जोन के मतदान केंद्रों पर मतदान की शुरुआत बेहद धीमी रही लेकिन सुबह दस बजे के बाद मतदाताओं की कतार लगनी शुरू हुई। दोपहर बाद मतदान में और तेजी आई। पन्नालाल चौबे उच्च प्राथमिक विद्यालय में लंबी कतार होने के नाते यहां शाम साढ़े पांच बजे तक वोटिंग हुई।

जोन के अधिकतर मतदान केंद्रों को अति संवेदनशील की श्रेणी में रखा गया था, जहां वेब कास्टिंग के जरिए चुनाव आयोग की ओर से सीधी नजर रखी जा रही थी।  रमरेपुर वार्ड नंबर 35 के पन्नालाल चौबे उच्च प्राथमिक विद्यालय स्थित मतदान केंद्र पर सुबह आठ बजे मतदान शुरू होने के साथ ही दो दलों के अभिकर्ता आपस में भिड़ गए। सुरक्षाकर्मियों ने बीच्रबचाव कर उन्हें अलग किया।

सुधाकर महिला कॉलेज के पांच बूथों पर दिन में दस बजे तक भीड़ नहीं थी। इसके  बाद यहां मतदाताओं की भीड़ बढ़ी। 104 वर्षीय देवराजी देवी भी यहां मतदान के लिए पहुंचीं। दोपहर सवा दो बजे राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ चुके वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र नाथ दुबे अडिग जेपी मेहता इंटर कॉलेज पहुंचे। यहां एक बूथ पर सुबह से लेकर शाम तक लाइन लगी रही। इस बूथ में सिकरौल और भीमनगर के मतदाता आते हैं।

यहां करीब 1343 मतदाता थे जिनमें करीब 50 प्रतिशत ने वोट डाले। दो दलों के प्रत्याशियों में यहां किसी बात को लेकर विवाद भी हुआ लेकिन जल्द ही माहौल सामान्य हो गया। पांडेयपुर में प्रसाद इंटरमीडिएट कालेज में भी दस बजे के बाद लोगों की भीड़ आनी शुरू हुई।

एलटी कालेज परिसर में बने एक बूथ की ईवीएम खराब हो गई थी। शिकायत के करीब आधे घंटे बाद मतदान शुरू हो सका। सदर तहसील में बने दो मूक बधिर वोटर लिस्ट में नाम न होने से काफी परेशान हुए। नहीं मिला, जिससे वह काफी परेशान रहे। 

वार्डों में पार्षद पद पर उलटफेर की संभावना

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आदमपुर क्षेत्र में गुस्साए लोगों ने कमिश्नर से की फर्जी मतदान की शिकायत - फोटो : अमर उजाला
नगर निकाय चुनाव में मेयर पद के अलावा वार्डों में पार्षद प्रत्याशी अपने-अपने इलाके में एक दूसरे को खूब टक्कर दी है। स्थानीय और अपने व्यक्तिगत व्यवहार पर भी पार्षदों ने मतों को अपने पाले मेें किया है।

चुनाव के दौरान ऐसी भी चर्चा रही कि मुहल्ले के पार्षद प्रत्याशी को मतदान हुआ है तो मेयर सीट के लिए किसी दूसरे को। इसका फायदा भी मेयर और पार्षद दोनों प्रत्याशियों को मिला है। ऐसे में इस बार सदन में पार्षदों की संख्या किसी दल की घट-बढ़ सकती है। पिछली बार सदन में सपा के 38 पार्षद थे जबकि भाजपा के 26 थे। बाद में पांच पार्षद भाजपा में शामिल हो गए थे तो उनकी संख्या सदन में 31 हो गई थी। वहीं दो पार्षद में एक-एक निर्दल और बसपा के थे। 

सदन संचालित करने की होगी दिक्कत
जापान सरकार के सहयोग से कंवेंशन सेंटर बनाने के लिए नगर निगम सदन और प्रेक्षागृह को तोड़ा जा रहा है। ऐसे में नगर निगम ने सदन को चौकाघाट स्थित सांस्कृतिक संकुल में चलाने का निर्णय लिया था। लेकिन अब वहां भी सदन चलाने में दिक्कत आएगी।

वजह, मुख्यमंत्री के आदेश पर संकुल का रिडेवलपमेंट किया जाना है। इसके लिए वीडीए 47 करोड़ से अधिक रुपये का प्रस्ताव भी शासन को भेज चुका है। शासन से धन जारी होने के बाद संकुल के मरम्मत का काम शुरू हो गया तो सदन चलाने के लिए निगम प्रशासन को अब कहीं दूसरी जगह तलाश करनी पड़ेगी। 
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