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सामने आए वाराणसी पुलिस के दो चेहरे, आम आदमी हवालात में और रसूखदार को चाय-नाश्ता

Thu, 25 Jul 2019 05:11 PM IST
Sayali Maurya पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी Published by: Sayali Maurya Updated Thu, 25 Jul 2019 05:11 PM IST
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Police treatment about common man and reputed person in varanasi
आम आदमी को हिरासत में लेकर फोटो खिंचवाती पुलिस - फोटो : अमर उजाला

समरथ को नहीं दोष गोसाईं....! इस वाक्य को वाराणसी पुलिस ने सार्थक कर दिया है। जो रसूखदार हैं पुलिस उसे हाथ भी नहीं लगा पाई और जो आम आदमी है उसके हाथों में हथकड़ियां सबसे पहले डाली गईं। एक ही जिले में पुलिस दो तरह से काम करती है। इसका उदाहरण बीते 20 दिन के भीतर की दो घटनाएं हैं।

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हुआ कुछ यूं है कि रोहनिया थाना क्षेत्र में एक आम आदमी की पत्नी आग लगा कर मर जाती है। जैसे ही पति अपनी पत्नी के शव को मुखाग्नि देता है उसके तुरंत बाद ही पुलिस उसे गिरफ्तार कर लेती है। पुलिस पति को दहेज हत्या के आरोप में घाट से ही उठा लेती है।
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पुलिस आरोपी पति को उसी हाल में हिरासत में ले लेती है जिस हाल में वो अपनी पत्नी का अंतिम संस्कार करता है। इसके बाद पुलिस आरोपी पति के साथ फोटो खिंचवा कर अपनी कुशल कार्यशैली का दंभ भरती है।

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रसूखदार को वीआईपी ट्रीटमेंट

Police treatment about common man and reputed person in varanasi
डॉ. आलोक को बिस्किट देते इंस्पेकटर - फोटो : अमर उजाला

उधर कैंट थाना क्षेत्र में एक रसूखदार शख्स की पत्नी की मौत होती है। 20 दिनों पहले बेटी का पिता अपने दामाद पर बेटी की हत्या करने का मुकदमा दर्ज कराता है और सीएम से लेकर एसपी तक से न्याय की गुहार लगाता है। इसके बाद पति को न्यायालय भी फरार घोषित करता है।

इसी बीच 23 दिन बाद वह पुलिस के सामने पेश होता है तो उसके सम्मान में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जाती है। उसे इंस्पेकटर के बराबर की कुर्सी पर बैठा कर बाकायदे चाय-नाश्ता पूछा जाता है।

यहां तक कि पूछताछ करने वाले इंस्पेक्टर खुद आरोपी को बिस्किट परोसते हैं। उसे वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जाता है। इसी बीच उसके करीबी लोग समाचार संकलन के लिए गए पत्रकारों से पुलिस के सामने ही बदसलूकी करते हैं। लेकिन पुलिस मूकदर्शक बन कर बैठी रहती है।

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