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Dalmandi Varanasi: दालमंडी के चाैड़ीकरण को लेकर पक्षपात का आरोप, कांग्रेस नेताओं को पुलिस ने रोका

Mon, 28 Jul 2025 01:22 AM IST
वाराणसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Mon, 28 Jul 2025 01:22 AM IST
सार

वाराणसी में सोमवार को पीडब्ल्यूडी की टीम ने दुकानदारों से बातचीत की। इसके पहले कांग्रेस नेताओं को पुलिस ने घर पर ही रोक दिया। वे लोग दालमंडी जाकर प्रदर्शन करते थे। पुलिस ने उनसे रास्ते में ही ज्ञापन ले लिया।

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Dalmandi Varanasi Accusation of bias regarding widening Congress leaders stopped by police
कांग्रेस नेताओं ने पुलिस को साैंपा ज्ञापन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Varanasi News: दालमंडी चौड़ीकरण मामले में पड़ताल करने जा रहे कांग्रेस नेताओं को पुलिस ने रोक दिया। पुलिस प्रशासन ने सुबह से ही कांग्रेस नेताओं के घरों पर पहरा लगा दिया। महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे और कांग्रेस पार्षद दल नेता गुलशन अली के आवास पर पहरा बैठाया गया था।

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महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे की अगुवाई में कांग्रेस जन बेनिया पार्क तक पहुंच गए लेकिन एसीपी दशाश्वमेध डॉ. अतुल अंजान त्रिपाठी ने कांग्रेस जनों को धारा 163 का हवाला देते हुए दालमंडी के पहले ही रोक कर ज्ञापन लिया। महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि यह केवल अतिक्रमण का मामला नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति के तहत व्यापारियों को परेशान करने की कार्रवाई है। इससे लगभग 10 हजार दुकानदार प्रभावित होंगे। 
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महानगर अध्यक्ष ने कहा कि  जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन साैंपा जाएगा। इसके साथ ही राज्यपाल से भी मिलने की उन्होंने मांग की। कहा कि हम दालमंडी के हर व्यापारी के साथ खड़े हैं, और यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी के साथ अन्याय न हो। प्रतिनिधि मंडल में फसाहत हुसैन बाबू, सतनाम सिंह, अब्दुल हमीद डोडे, वकील अंसारी, अरुण सोनी, रमजान अली  मौजूद रहे।

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प्रतिनिधिमंडल ने की कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, संविदा कर्मचारी नगरीय परिवहन सेवाएं के प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात की। उन्होंने पत्रक के माध्यम से प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को बताया कि आज 500 कर्मचारी बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए इस प्रकरण पर आवाज उठाने का निवेदन किया।

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के शासन काल में जनहित में 130 बसों का बेड़ा वाराणसी सिटी ट्रांसपोर्ट को संचालन के लिए दिया गया था, जिसमें करीब 500 कर्मचारियों को रोजगार का अवसर मिला था। परंतु 15 वर्ष का रजिस्ट्रेशन पूर्ण होने के पश्चात बसों को रोक दिया गया और इसी कार्यकाल में इलेक्ट्रॉनिक बसों को लाया गया।

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