खुलासा: जीजा ने दोस्तों और नौकरों के साथ मिलकर की हत्या, चापड़ से पैरे काटे, साले से लेना था सिर्फ बदला
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वाराणसी में साले की मारपीट से अपमानित महसूस करते हुए जीजा ने उसे शराब पिलाकर दोस्तों के साथ गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद चापड़ से पैर काट कर शव को बोरे में भर कर ऑटो में लादकर मिर्जापुर के अहरौरा क्षेत्र के फेंक दिया। यह खुलासा शुक्रवार को लंका थाने की पुलिस ने साकेत नगर निवासी आलोक राय की हत्या के संबंध में किया।
प्रकरण में आलोक के जीजा कश्मीरीगंज खोजवा निवासी डिब्बाबंद पानी बेचने का काम करने वाले अविनाश राय उर्फ अंशू, गणेशू कुमार भारतीय, विष्णु शर्मा, राजेश कुमार भारती और एक नाबालिग नौकर को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के पास से पुलिस ने आलोक का आधार कार्ड, पैन कार्ड और वारदात में प्रयुक्त बोरे, चाकू, चापड़, बाइक व एक ऑटो बरामद किया है।
बिहार के कैमूर का मूल निवासी आलोक राय साकेत नगर क्षेत्र में किराये के मकान में रहता था। बीते आठ नवंबर को आलोक गायब हो गया था। परिजनों की तहरीर के आधार पर 11 नवंबर की रात लंका थाने में उसके अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया। इंस्पेक्टर लंका महेश पांडेय ने बताया कि तफ्तीश शुरू की गई तो सामने आया कि आठ नवंबर को आलोक दावत खाने के लिए अपने जीजा के घर गया था।
जीजा से कड़ाई से पूछताछ की गई और सर्विलांस व सीसीटीवी कैमरे की फुटेज चेक की गई तो वारदात की गुत्थी परत दर परत सुलझती चली गई। पांचों आरोपियों की गिरफ्तारी में इंस्पेक्टर लंका महेश पांडेय के नेतृत्व में दरोगा दुर्गेश यादव, श्रीप्रकाश सिंह व शशिप्रताप सिंह और सिपाही दीनबंधु खरवार व सुमित सिंह की टीम शामिल थी।
शराब में नशे की गोली पिलाकर गला दबाया, चापड़ से काटा पैर
अविनाश ने पूछताछ में बताया कि आलोक ने उसे लगभग दो माह पूर्व लंका चौराहे के पास दो-तीन थप्पड़ मारा था। इसके बाद दुर्गाकुंड पर भी सबके सामने मारा था। जिससे वह काफी अपमानित महसूस कर रहा था और बदला लेने को ठान लिया था। आठ नवंबर की शाम उसने अपने दोस्त राजेश भारती को आलोक को घर लाने के लिए भेजा। राजेश और आलोक के आने से पहले वह, गणेशू, विष्णु और उसका नाबालिग नौकर इकट्ठा हो गए थे।
घर में जिस जगह आरओ प्लांट लगा है उसकी छत पर आलोक को ले जाकर शराब पिलाने लगे। अविनाश ने बताया कि इसी बीच आलोक के ग्लास में उसने नशे की गोली भी डाल दी थी, जिससे कुछ देर बाद वह बेहोश हो गया। फिर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। रात भर हम लोग मकान पर ही रहे। नौ नवंबर की सुबह जब हम लोग शव को बोरे में भर रहे थे तो उसका पैर मुड़ नहीं रहा था। तब चापड़ से उसके दोनों पैर काटकर बोरे में भर दिया गया। इसके बाद शव को अहरौरा क्षेत्र में ले जाकर जंगल में फेंक दिया गया।
क्राइम पेट्रोल और सीआईडी देखकर पुलिस को खूब छकाया
लंका इंस्पेक्टर के अनुसार, अविनाश क्राइम पेट्रोल और सीआईडी धारावाहिक खूब देखता है। आलोक की हत्या के बाद उसने पुलिस को खूब छकाया। आलोक के गायब होने की सूचना देने के साथ ही पुलिस से रोजाना अविनाश पूछता था कि उसके साले का क्या हुआ। आलोक की हत्या करने के बाद अविनाश ने उसके मोबाइल से उसकी महिला मित्र को मैसेज भेजा।
आलोक बनकर लिखा कि मुझे पुलिस पकड़ ले गई है। मेरे जीजा मेरा नंबर ब्लैक लिस्ट में डाले हुए हैं, इसलिए तुम उन्हें फोन कर कहो कि हमसे बात करें। पुलिस वाले कह रहे हैं कि 40 हजार रुपये मंगवाओ तो छोड़ देंगे। आलोक की महिला मित्र ने मैसेज के आधार पर अविनाश को फोन किया। फिर 10 नवंबर को आलोक के मोबाइल से अविनाश ने दोबारा उसकी महिला मित्र को मैसेज किया कि एक चाय की दुकान पर आओ।
15 नवंबर को अविनाश ने अपने दो साथियों को 300 रुपये देकर गाजीपुर भेजा। कहा कि वहां किसी से विनती कर उसके मोबाइल से आलोक के पिता को फोन कर कहना कि 40 हजार रुपये लेकर आओ। नहीं तो तुम्हारे बेटे को मार देंगे। हालांकि सर्विलांस और सीसी कैमरे की फुटेज से अविनाश का कारनामा उजागर हो गया।