वाराणसी: पीएम मोदी ने किया सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना का उद्घाटन, कहा- अब गरीब के बच्चे भी बनेंगे डॉक्टर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को वाराणसी से देश की दूसरी बड़ी योजना आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन की शुरुआत की। मेहंदीगंज में जनसभा को संबोधित करते हुए पूर्व की सरकारों पर हमला बोला।
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जनसभा को संबोधित करते हुए इस योजना की खासियतों का बखान किया। कहा कि आज काशी की धरती से देश की जनता को बधाई देता हूं। शरीर को स्वस्थ रखने का निवेश सर्वोत्तम है। आजादी के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया गया। जिनकी लंबे समय से सरकार रही उन्होंने जनता को स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रखा। गांव से लेकर शहर तक स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत बेहद खराब रही।
मरीज और उसका परिवार परेशानियों से जूझता रहता था। हेल्थ केयर सिस्टम की कमी ने गरीब और मध्यम वर्ग को परेशान किया। इसी समस्या का समाधान है हेल्थ मिशन। पीएम मोदी ने कहा कि आनेवाले चार पांच वर्षों में गांव, ब्लॉक, जिला, शहर, महानगर तक क्रिटिकल केयर यूनिट को सशक्त किया जाएगा। पहाड़ी राज्य और पूर्वी देश के राज्यों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।
समय से बीमारियों का पता चलेगा तो इलाज में आसानी होगी
प्रधानमंत्री ने कहा कि गांव और शहरों में हेल्थ और वेलनेस सेंटर खोले जा रहे हैं। समय से बीमारियों का पता चलेगा तो इलाज में आसानी होगी। राष्ट्रीय स्तर पर 12 केंद्रीय अस्पतालों में योजना तैयार की जा रही है। 24 घंटे चलने वाले इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर तैयार किए जाएंगे। देश में 80 वायरल डायग्नोस्टिक लैब हैं और इनको और सशक्त बनाया जायेगा।
पीएम मोदी ने कहा कि आयुष्मान हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधाओं को विकसित किया जाएगा। देश के हर नागरिक को स्वस्थ रखने का मिशन लेकर काशी से निकल रहे हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ ही रोजगार का सृजन भी होगा। आयुष्मान भारत योजना में दो करोड़ से अधिक गरीबों का मुफ्त इलाज कराया गया है। हमसे पहले जो स्वास्थ्य सेवाओं में रहे उनके लिए स्वास्थ्य घोटालों और पैसा कमाने का जरिया रहा है।
स्वास्थ्य सुविधाओं को विकसित करने के लिए दिन रात मेहनत कर रहे हैं। पहले जनता का पैसा घोटालों में जाता था, लेकिन आज जनता के लिए खर्च हो रहा है। आज गरीब माता पिता का बच्चा भी डॉक्टर बनने का सपना देख सकेगा।
आजादी के 70 साल बाद जितने डॉक्टर निकले हैं, उससे कहीं अधिक आनेवाले दस वर्षों में मिलेंगे। जिस प्रकार अतीत में काम हुआ वैसे ही काम होता तो क्या हाल होता। लटकते तार, उबड़ खाबड़ सड़कें, गंगा मैया की दुर्दशा होती। जितना काम सात सालों में हुआ उतना कई दशकों में नहीं हुआ।