{"_id":"664195494bcb531b8e0a5d99","slug":"pm-modi-varanasi-roadshow-from-same-route-on-which-shankaracharya-traveled-1200-years-ago-2024-05-13","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"PM Modi Varanasi: रोड शो के रास्ते पर 40 घाट, 257 मंदिर, 60 आश्रम, 1500 संत, 18 हजार व्यापारी और 23 हजार घर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
PM Modi Varanasi: रोड शो के रास्ते पर 40 घाट, 257 मंदिर, 60 आश्रम, 1500 संत, 18 हजार व्यापारी और 23 हजार घर
Mon, 13 May 2024 03:16 PM IST
प्रगति चंद
आलोक कुमार त्रिपाठी, वाराणसी।
आलोक कुमार त्रिपाठी, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Mon, 13 May 2024 03:16 PM IST
सार
PM Modi Varanasi Roadshow News Today : पीएम नरेंद्र मोदी आज काशी में रोड शो करेंगे। पीएम का रोड शो आदि शंकराचार्य के विश्वनाथ वंदन यात्रा मार्ग पर होगा। असि से बाबा दरबार तक 1200 साल पहले शंकराचार्य ने विश्वनाथ वंदन यात्रा निकाली थी।
विज्ञापन
PM Modi Varanasi Roadshow
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
लगभग 12 सौ साल पहले आदि शंकराचार्य ने काशी में असि संगम से बाबा विश्वनाथ के धाम तक विश्वनाथ वंदन यात्रा की शुरूआत की थी। इसी रास्ते पर सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी का रोड शो होगा। काशी तीन खंड में बंटी है और यह केदारखंड से विश्वेश्वर खंड की यात्रा होगी।
विज्ञापन
मोदी बीएचयू गेट से रोड शो की शुरूआत कर रहे हैं वह पंचक्रोशी परिक्रमा के प्रथम पड़ाव का केंद्र बिंदु है। शास्त्रों में लिखा है पंचक्रोशी के स्थान को प्रणाम करने से सभी प्रकार के भय और शत्रुओं का विनाश होता है।
विज्ञापन
अस्सी घाट से श्री काशी विश्वनाथ धाम के बीच 40 घाट पड़ेंगे। रोड शो के दौरान प्रधानमंत्री पांच किलोमीटर के मार्ग में करीब डेढ़ लाख की आबादी से सीधे रूबरू होंगे। इस रास्ते पर काशी खंड के 28 मंदिरों के साथ ही वैष्णव व शैव संप्रदाय के 60 आश्रम के 1500 संत रहते हैं। अस्सी से विश्वनाथ मंदिर के मार्ग पर छोटे और बड़े 257 मंदिर हैं। यहां व्यापारियों की संख्या 18 हजार और घरों की संख्या 23 हजार से ज्यादा है।
विज्ञापन
PM Modi Varanasi Roadshow
- फोटो : अमर उजाला
यात्रा मार्ग पर अस्सी भदैनी क्षेत्र में गोस्वामी तुलसीदास की कर्मस्थली और रानी लक्ष्मीबाई की जन्मस्थली भी है। हरिश्चंद्र घाट पर स्वामी करपात्री महाराज का आश्रम, शिवाला पर मां आनंदमयी, मां अन्नदा का आश्रम और जैन धर्म के तीर्थंकर के मंदिर भी हैं। हनुमान घाट पर मिनी दक्षिण भारत तो सोनारपुरा में मिनी बंगाल बसता है। इसके आगे मदनपुरा में मुस्लिम बाहुल्य इलाके में बनारसी साड़ी का बड़ा कारोबार होता है।
काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष प्रो.वशिष्ठ त्रिपाठी ने बताया कि 12 सौ साल पहले आदि शंकराचार्य ने विश्वनाथ वंदन यात्रा की शुरूआत की थी। असि संगमेश्वर महादेव का आशीर्वाद लेकर बाबा विश्वनाथ के मंदिर तक यात्रा निकलती थी। आज भी वह यात्रा काशी के वैदिक बटुक व संत करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आदि शंकराचार्य के उसी मार्ग पर अपना रोड शो करेंगे।
काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष प्रो.वशिष्ठ त्रिपाठी ने बताया कि 12 सौ साल पहले आदि शंकराचार्य ने विश्वनाथ वंदन यात्रा की शुरूआत की थी। असि संगमेश्वर महादेव का आशीर्वाद लेकर बाबा विश्वनाथ के मंदिर तक यात्रा निकलती थी। आज भी वह यात्रा काशी के वैदिक बटुक व संत करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आदि शंकराचार्य के उसी मार्ग पर अपना रोड शो करेंगे।
काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि पंचक्रोशी के क्षेत्र से महामना को माल्यार्पण करके रोडशो की शुरूआत हो रही है। वह पंचक्रोशी परिक्रमा का केंद्र बिंदु है। इसके आगे असि संगम को प्रणाम करके वह काशी में प्रवेश करेंगे। आगे बढ़ने पर भद्रकाली देवी को प्रणाम करते हुए वह पंचनदों को प्रणाम करके बाबा के धाम पहुंचेंगे।
ग्राम देवता और स्थान देवता को प्रणाम करके कोई यात्रा व कार्य आरंभ होती तो वैश्विक स्तर पर यश व कीर्ति प्राप्त होती है। इसके बाद बाबा विश्वनाथ और मां गंगा को प्रणाम करके प्रधानमंत्री भारत की विकास यात्रा को यशस्वी बनाने की अनुमति लेंगे।
ग्राम देवता और स्थान देवता को प्रणाम करके कोई यात्रा व कार्य आरंभ होती तो वैश्विक स्तर पर यश व कीर्ति प्राप्त होती है। इसके बाद बाबा विश्वनाथ और मां गंगा को प्रणाम करके प्रधानमंत्री भारत की विकास यात्रा को यशस्वी बनाने की अनुमति लेंगे।
आजादी के पहले से ही था राजनीतिक रूट
वरिष्ठ चिंतक विजयनारायण ने बताया कि सिंहद्वार, अस्सी से गोदौलिया का मार्ग आजादी के पहले से ही राजनीतिक रूट था। आजादी के पहले महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू और नेताजी सुभाष चंद्र बोस इसी मार्ग से गए थे। 1960 में पं. जवाहर लाल नेहरू इरान के शाह के साथ खुली जीप में इसी मार्ग से गए थे। राजनारायण के नेतृत्व में छात्रों का पहला जुलूस भी 11 अगस्त 1942 को इसी मार्ग से निकला था।
कहां क्या होगा... 11 पॉइंट पर सर्व समाज करेगा स्वागत
- वीटू मॉल- सामाजिक संगठनों की ओर से पीएम का स्वागत किया जाएगा।
- संत रविदास द्वार- सर्व समाज के लोग स्वागत करेंगे।
- मुमुक्ष भवन- यहां दंडी स्वामी, सन्यासी, बटुक पुष्पवर्षा कर स्वागत करेंगे।
- अस्सी चौराहा- अस्सी से लेकर भदैनी तक कबीरपंथी, कबीरवाणी भजनों और पुष्पवर्षा से स्वागत करेंगे।
- शिवाला - गुरुकुल की छात्राएं प्रधानमंत्री का स्वागत करेंगी।
- सोनारपुरा- यहां बंगाली समुदाय व कुछ सन्यासी और मठ मंदिरों से जुड़े लोग पुष्पवर्षा कर स्वागत करेंगे।
- मदनपुरा- भारत रत्न बिस्मिल्लाह खां के परिजन शहनाई वादन से स्वागत करेंगे। यहीं पूर्व सांसद राजेश मिश्रा के नेतृत्व में मुस्लिम समाज के लोग पुष्प वर्षा कर स्वागत करेंगे।
- जंगमबाड़ी - वीर शैव संप्रदाय के लोग दक्षिण भारत के वाद्य यंत्रों व पुष्पवर्षा के साथ स्वागत करेंगे।
- गोदौलिया - डमरु वादन, शंखवादन से वटुक करेंगे स्वागत।
- बांसफाटक - यहां नेपाली समुदाय प्रधानमंत्री का करेंगे स्वागत।