पीएम के पौधरोपण से लौटेगा काशी का वैभव, पंचक्रोशी यात्रा मार्ग पर बेहतर होंगे ठौर-ठिकाने
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इसे पावन पथ के रूप में विकसित किया जाएगा। पंचक्रोशी यात्रा मार्ग के पांचों पड़ाव के ठौर ठिकाने बेहतर होंगे। यहां से गुजरने वाले श्रद्धालुओं का बतौर सांसद पीएम ने ध्यान रखा। 84 किमी की यह यात्रा शिवरात्रि और पुरुषोत्तम मास में होती है। एक से लेकर पांच दिनों के भीतर लोग यात्रा करते हैं।
पंचक्रोशी यात्रा की शुरुआत मणिकर्णिका घाट स्थित चक्र पुष्कर्णी कुंड से होती है। मान्यताओं के अनुसार यात्रा शुरू करने के पूर्व गंगा स्नान, बाबा विश्वनाथ का दर्शन कर उनसे अनुमति लेते हैं। नदी तट के सभी तीर्थों का दर्शन करते हैं।
दुर्गाकुंड से कंदवा में देवायतनों का दर्शन-पूजन और रात्रि विश्राम करते हैं। दूसरे पड़ाव भीमचंडी में दर्शन, तीसरे पड़ाव वरुणा नदी में स्नान कर रामेश्वर का दर्शन पूजन और विश्राम करते हैं। इसके बाद चौथे पड़ाव शिवपुर में रुककर पांचवें पड़ाव कपिलधारा होते हुए मणिकर्णिका पर यात्रा का समापन होता है।
यात्रा के दौरान 108 तीर्थस्थल पड़ते हैं। इनमें 56 शिवलिंग, 11 विनायक, 10 शिवगण, 10 देवियां, 4 विष्णु, 2 भैरव और 15 तीर्थ शामिल हैं।