फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Played role of Shri Ram age of three Lakshmi Narayan was part Leela for 78 years portrayed various roles

तीन वर्ष की उम्र में बने थे श्रीराम: 78 साल तक लीला का हिस्सा रहे 85 वर्षीय लक्ष्मी नारायण, कई भूमिकाएं निभाई

Mon, 05 Oct 2026 12:20 PM IST
Aman Vishwakarma अभिषेक सेठ, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अभिषेक सेठ, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Mon, 05 Oct 2026 12:20 PM IST
सार

तीन वर्ष की उम्र में श्रीराम की भूमिका निभाने वाले 85 वर्षीय लक्ष्मी नारायण ने करीब 78 वर्षों तक रामलीला में हिस्सा लिया। पांडेय परिवार की रामलीला से गहरी परंपरा जुड़ी है। परिवार के करीब 10 सदस्य हर साल इंद्र, हनुमान समेत विभिन्न किरदार निभाते हैं। पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी धार्मिक आस्था और संस्कृति को जीवंत बनाए हुए है।

विज्ञापन
Played role of Shri Ram age of three Lakshmi Narayan was part Leela for 78 years portrayed various roles
रामलीला में पांडेय परिवार आठ पीढि़यों से सेवा कर रहा है। - फोटो : संवाद

विस्तार

रामनगर की रामलीला में पांडेय परिवार आठ पीढि़यों से सेवा कर रहा है। इनमें सबसे बुजुर्ग 85 वर्षीय लक्ष्मी नारायण पांडेय हैं। जिन्होंने जीवन के 78 वर्षों तक रामलीला में विभिन्न भूमिकाएं निभाईं। कभी व्यास बने तो कभी विश्वामित्र और जनक तो बचपन में बालकांड के दौरान राम की भूमिका भी निभाई। 

विज्ञापन


उन्हें तीन वर्ष की उम्र में वर्ष 1944 में राम बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। हालांकि पिछले पांच वर्ष से वह स्वास्थ्य कारणों से रामलीला में नहीं जा पाते हैं। पांच वर्ष पहले 2021 में उन्हें ब्रेन हैमरेज आया, इसके बाद से वह रामलीला में कोई पात्र नहीं निभाते हैं।

विज्ञापन

लक्ष्मी नारायण पांडेय के भतीजे रजनीश पांडेय बताते हैं कि समय बीता तो बड़े पिता लक्ष्मी नारायण पांडेय की रामलीला में सक्रियता बढ़ती गई। वह मुख्य पात्रों राम, सीता, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के अलावा कई पात्रों की भूमिका निभा चुके हैं। उन्हें रामलीला के संस्कार परदादा पं. पदार्थ पांडेय से मिले। उनके परदादा के पिता और दादा भी लीला से जुड़े थे। वह अपने दादा पं. क्षेत्रपाल पांडेय की अंगुलियां पकड़ कर रामलीला में जाया करते थे। 

दादा के बाद उनके पिता पं. अनिरुद्ध पांडेय और चाचा पं. लक्ष्मण पांडेय की निभाई भूमिकाओं से प्रेरणा मिली। पहली बार वर्ष 1970 में हनुमान की भूमिका निभाई थी। बावजूद इसके वह घर पर ही मानस की चौपाइयों का पाठ करते हैं। रजनीश बताते हैं कि जब उनके बड़े पिता जी मंच से व्यास की भूमिका निभाते थे, तो उन्हें केवल उसमें व्यास जी ही नजर आते थे।

विज्ञापन

एक महीने की छुट्टी लेकर प्रोफेसर निभाते हैं व्यास की भूमिका
रजनीश पांडेय ने बताया कि एक ही परिवार के 10 सदस्य हर वर्ष रामलीला में इंद्र, हनुमान, शिव, जनक, विश्वामित्र की भूमिका निभाते हैं। वर्तमान में 42 वर्षीय उनके भाई डॉ. विरेश्वर पांडेय व्यास की भूमिका निभा रहे हैं। वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कॉमर्स विभाग में सहायक प्रोफेसर हैं। एक महीने की रामलीला के दौरान वह छुट्टी लेकर अपना समय रामनगर में ही बिताते हैं। इसके अलावा वह वेद और पुरवासी की भी भूमिका निभाते हैं। 

विज्ञापन

बिन पग धोये नहीं गंगा पार करइहो... यूं नहीं नाव चढ़इहो...
रामलीला के दसवें दिन रविवार को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के गंगा और यमुना पार कर चित्रकूट पहुंचने की मनोहारी लीला का मंचन किया गया। गंगा तट पर प्रभु श्रीराम और केवट के बीच का संवाद लीला का प्रमुख आकर्षण रहा। जब वन गमन के दौरान प्रभु ने केवट से पार ले जाने का आग्रह किया तो साधारण नाविक केवट ने बिना चरण धोए उन्हें नाव पर बिठाने से साफ इनकार कर दिया। अहिल्या उद्धार की कथा स्मरण करते हुए उसे डर था कि प्रभु के स्पर्श से कहीं उसकी आजीविका का एकमात्र साधन यानी नाव भी स्त्री न बन जाए। केवट के अनन्य प्रेम और दृढ़ हठ को देखकर प्रभु श्रीराम मंद-मंद मुस्कुराए और उसे पांव धोने की अनुमति दे दी।

काशी में 483वें रामलीला संस्करण का मुकुट पूजन से शुभारंभ
श्री आदि रामलीला लाट भैरव, वरुणा-संगम का 483वां संस्करण रविवार को मुकुट पूजन के साथ शुरू हुआ। विशेश्वरगंज स्थित लीलास्थल पर लीला प्रेमियों ने मंगलाचरण का सस्वर गान किया। व्यास दयाशंकर त्रिपाठी के आचार्यत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मुकुट पूजन आरंभ हुआ। रामलीला समिति के प्रधानमंत्री कन्हैयालाल यादव मुख्य यजमान रहे। चयनित मूर्ति पात्रों को तिलक कर माल्यार्पण किया गया। रामायण मंडली ने मानस पोथी को नमन कर बालकांड के पांच दोहे गाए। तुलसीदास के समकालीन संत मेधा द्वारा स्थापित इस प्राचीन लीला में राजसी लीला का मंचन नहीं होता। यहां प्रभु राम के जीवन के संघर्षों से जुड़ी गाथाएं प्रस्तुत की जाती हैं।

रामलीला में आज

रामनगर : श्री अवध में भरतागमन, सभा, श्रीभरत का चित्रकूट प्रयाण, निषाद मिलन, गंगावतरण 
काशीपुरा : धनुष यज्ञ, परशुराम संवाद
चिरईगांव : श्री अवध में भरतागमन, सभा, श्रीभरत का चित्रकूट प्रयाण, निषाद मिलन, गंगावतरण
शिवपुर : सुमंत विदाई, केवट संवाद 
औरंगाबाद : धनुष यज्ञ, परशुराम संवाद
खोजवां : रावण जन्म, क्षीर सागर की झांकी

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed