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Varanasi News: जीरो विजिबिलिटी में भी एयरपोर्ट पर उतरेंगे विमान
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विस्तारीकरण में कैट-थ्री प्रणाली से लैस होगा बाबतपुर एयरपोर्ट, कोहरे में भी उतर सकेंगे विमान
एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के मास्टर प्लान में शामिल है कैट-थ्री आईएलएस
संवाद न्यूज एजेंसी
बाबतपुर। कोहरा छाते ही दृश्यता जहां कम हुई कि उड़ानें हवा में चक्कर काटने के बाद डायवर्ट होती हैं। वहीं, अधिकतर विमान देरी से उड़ान भरते हैं। एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के दौरान कैट-थ्री आईएलएस (इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम) से एयरपोर्ट को लैस करने की तैयारी है। इससे घने कोहरे में भी उड़ानें रनवे पर उतर सकेंगी।
एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार विस्तारीकरण के मास्टरप्लान में कैट-थ्री आईएलएस को भी शामिल किया गया है। इस पर काम जारी है। आईएलएस के लिए जमीन की आवश्यकता होती है। अब तक जमीन की कमी के चलते यह व्यवस्था नहीं हो पा रही थी। अब जमीन की कमी को दूर कर लिया गया है।
दिल्ली-मुंबई जैसा होगा बाबतपुर एयरपोर्ट
कैट-थ्री प्रणाली जैसी व्यवस्था दिल्ली, मुंबई एयरपोर्ट पर है। घने कोहरे में भी विमान आसानी से दिल्ली-मुंबई में उतरते और उड़ान भरते हैं। लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट आईएलएस कैट-वन प्रणाली का है। कैट वन प्रणाली में विमानों के उतरने और उड़ान भरने के लिये 800 मीटर से अधिक दृश्यता की आवश्यकता होती है। जबकि देश के सभी महत्वपूर्ण और मैट्रो हवाईअड्डों पर कैट थ्री ए, कैट थ्री बी तक के आईएलएस सिस्टम इंस्टाॅल किए जा चुके हैं।
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जानिए कैसे काम करता कैट सिस्टम
कैट वन में दृश्यता 800 मीटर से अधिक होनी चाहिए
कैट सेकेंड में दृश्यता 300 मीटर से अधिक होनी चाहिए
कैट थ्री-ए में दृश्यता 180 मीटर से अधिक होनी चाहिए
कैट थ्री-बी में दृश्यता 46 मीटर से अधिक होनी चाहिए
कैट थ्री-सी प्रणाली में शून्य दृश्यता में भी विमान उतरते और उड़ान भरते हैं
वर्जन
एयरपोर्ट विस्तारीकरण के मास्टरप्लान में कैट-थ्री प्रणाली शामिल है। एयरपोर्ट को कैट-थ्री प्रणाली से लैस करने की तैयारियां चल रही हैं। - पुनीत गुप्ता, एयरपोर्ट निदेशक
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एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के मास्टर प्लान में शामिल है कैट-थ्री आईएलएस
संवाद न्यूज एजेंसी
बाबतपुर। कोहरा छाते ही दृश्यता जहां कम हुई कि उड़ानें हवा में चक्कर काटने के बाद डायवर्ट होती हैं। वहीं, अधिकतर विमान देरी से उड़ान भरते हैं। एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के दौरान कैट-थ्री आईएलएस (इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम) से एयरपोर्ट को लैस करने की तैयारी है। इससे घने कोहरे में भी उड़ानें रनवे पर उतर सकेंगी।
एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार विस्तारीकरण के मास्टरप्लान में कैट-थ्री आईएलएस को भी शामिल किया गया है। इस पर काम जारी है। आईएलएस के लिए जमीन की आवश्यकता होती है। अब तक जमीन की कमी के चलते यह व्यवस्था नहीं हो पा रही थी। अब जमीन की कमी को दूर कर लिया गया है।
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दिल्ली-मुंबई जैसा होगा बाबतपुर एयरपोर्ट
कैट-थ्री प्रणाली जैसी व्यवस्था दिल्ली, मुंबई एयरपोर्ट पर है। घने कोहरे में भी विमान आसानी से दिल्ली-मुंबई में उतरते और उड़ान भरते हैं। लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट आईएलएस कैट-वन प्रणाली का है। कैट वन प्रणाली में विमानों के उतरने और उड़ान भरने के लिये 800 मीटर से अधिक दृश्यता की आवश्यकता होती है। जबकि देश के सभी महत्वपूर्ण और मैट्रो हवाईअड्डों पर कैट थ्री ए, कैट थ्री बी तक के आईएलएस सिस्टम इंस्टाॅल किए जा चुके हैं।
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जानिए कैसे काम करता कैट सिस्टम
कैट वन में दृश्यता 800 मीटर से अधिक होनी चाहिए
कैट सेकेंड में दृश्यता 300 मीटर से अधिक होनी चाहिए
कैट थ्री-ए में दृश्यता 180 मीटर से अधिक होनी चाहिए
कैट थ्री-बी में दृश्यता 46 मीटर से अधिक होनी चाहिए
कैट थ्री-सी प्रणाली में शून्य दृश्यता में भी विमान उतरते और उड़ान भरते हैं
वर्जन
एयरपोर्ट विस्तारीकरण के मास्टरप्लान में कैट-थ्री प्रणाली शामिल है। एयरपोर्ट को कैट-थ्री प्रणाली से लैस करने की तैयारियां चल रही हैं। - पुनीत गुप्ता, एयरपोर्ट निदेशक