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पितृपक्ष: पितरों को तृप्त करने घाट व कुंडों पर उमड़े लोग
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वाराणसी में रविवार को पिशाचमोचन पर पितृपक्ष में अपने पितरों के तर्पण के लिए श्राद्ध करते लोग। अ
- फोटो : Archive
वाराणसी। पितृपक्ष रविवार से शुरू हो गया। पिशाचमोचन कुंड व घाटों पर पितरों को तृप्त करने के लिए उनके कुल-वंशजों की भीड़ रही। पिशाचमोचन कुंड पर सुबह से देर शाम तक श्राद्धकर्म के लिए दूर-दराज से आए महिलाएं, पुरुष और युवा श्राद्धकर्म करवाते दिखे। 40 हजार से अधिक लोग पहुंचे थे। गया श्राद्ध के लिए सबसे ज्यादा भीड़ रही। लोग यहां श्राद्ध कर गया के लिए रवाना हुए।
भीड़ के चलते पिशाचमोचन क्षेत्र के आसपास के मार्ग जाम की चपेट में रहे। वाहनों की कतार लगी थी। 10 अक्तूबर तक पितरों का उत्सव लगा रहेगा। पौराणिक मान्यता के अनुसार पिशाचमोचन तीर्थ पर पितरों के श्राद्धकर्म का विशेष महत्व है। इसलिए यहां भीड़ होती है। इस बार एक तिथि के क्षय होने से 14 दिनों तक ही पितृपक्ष है। कुंड पर सुबह से ही भीड़ रही। तीर्थ पुरोहितों के सात घाटों के अलावा कुंड के चारों तरफ पितरों के तर्पण के लिए भीड़ रही। श्राद्धकर्म के मंत्र गूंजते रहे। चारों तरफ वेदियों पर कलश सजे थे। पुरोहित संजीव तिवारी ने बताया कि भोर से ही गया श्राद्ध के लिए लोग पहुंचने लगे। रात 11 बजे तक गया श्राद्ध करवाते रहे। उनके गया जाने का सिलसिला भी चलता रहा। इसके बाद प्रेत योनि में भटक रहे पितरों को तृप्त करने के लिए नारायण बलि श्राद्ध और पितरों की कृपा के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध करवाए।
2 से 500 रुपये तक बढ़े श्राद्ध सामग्री के दाम
बारिश के चलते पूजन सामग्री के दाम में वृद्धि रही। अलग-अलग श्राद्धकर्म के लिए 40 से 65 तरह की पूजन सामग्री लगती है। बारिश से बाहर से कुछ पूजन सामग्री कम आने व फूलों के खराब होने से दुकानदारों ने दो सौ से पांच सौ रुपये महंगा कर दिया। त्रिपिंडी के लिए दो हजार रुपये तक तथा नारायण बलि के लिए 2500 रुपये तक बिका। श्राद्धकर्म में त्रिदेवों की सोने, चांदी व तांबे की मूर्तियां भी लगती हैं।
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भीड़ के चलते पिशाचमोचन क्षेत्र के आसपास के मार्ग जाम की चपेट में रहे। वाहनों की कतार लगी थी। 10 अक्तूबर तक पितरों का उत्सव लगा रहेगा। पौराणिक मान्यता के अनुसार पिशाचमोचन तीर्थ पर पितरों के श्राद्धकर्म का विशेष महत्व है। इसलिए यहां भीड़ होती है। इस बार एक तिथि के क्षय होने से 14 दिनों तक ही पितृपक्ष है। कुंड पर सुबह से ही भीड़ रही। तीर्थ पुरोहितों के सात घाटों के अलावा कुंड के चारों तरफ पितरों के तर्पण के लिए भीड़ रही। श्राद्धकर्म के मंत्र गूंजते रहे। चारों तरफ वेदियों पर कलश सजे थे। पुरोहित संजीव तिवारी ने बताया कि भोर से ही गया श्राद्ध के लिए लोग पहुंचने लगे। रात 11 बजे तक गया श्राद्ध करवाते रहे। उनके गया जाने का सिलसिला भी चलता रहा। इसके बाद प्रेत योनि में भटक रहे पितरों को तृप्त करने के लिए नारायण बलि श्राद्ध और पितरों की कृपा के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध करवाए।
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2 से 500 रुपये तक बढ़े श्राद्ध सामग्री के दाम
बारिश के चलते पूजन सामग्री के दाम में वृद्धि रही। अलग-अलग श्राद्धकर्म के लिए 40 से 65 तरह की पूजन सामग्री लगती है। बारिश से बाहर से कुछ पूजन सामग्री कम आने व फूलों के खराब होने से दुकानदारों ने दो सौ से पांच सौ रुपये महंगा कर दिया। त्रिपिंडी के लिए दो हजार रुपये तक तथा नारायण बलि के लिए 2500 रुपये तक बिका। श्राद्धकर्म में त्रिदेवों की सोने, चांदी व तांबे की मूर्तियां भी लगती हैं।
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