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अस्सी से लेकर राजघाट के बीच कई जगह हुआ तर्पण
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पितृपक्ष की प्रतिपदा पर गया तीर्थ की मान्यता वाले पिशाच मोचन कुंड पर सन्नाटा पसरा रहा। सार्वजनिक आयोजनों पर रोक के कारण यजमान ही नहीं पहुंचे तो स्थानीय लोगों ने भी सतर्कतावश गंगा घाटों की ओर रुख किया। मंगलवार को अस्सी से लेकर राजघाट के बीच के कई घाटों पर श्रद्धालु प्रतिपदा का श्राद्ध करते हुए नजर आए।
गंगा के बढ़े हुए जलस्तर के कारण घाट के ऊपर से ही नेमियों ने पितरों के श्राद्ध व तर्पण की प्रक्रिया को पूर्ण किया। वहीं पिशाचमोचन कुंड की गद्दियों पर सन्नाटा पसरा रहा। तीर्थ पुरोहित समाज सुबह से ही खाली हाथ बैठा रहा। सतर्कतावश पुलिस भी पिशाचमोचन कुंड पर तैनात रही। सुबह में कुछ यजमानों को त्रिपिंडी श्राद्ध कुछ तीर्थ पुरोहितों के द्वारा कराया गया। दोपहर बाद तो एक भी यजमान पिशाच मोचन कुंड की तरफ नहीं आए। वहीं कुछ पुरोहितों ने मोबाइल व वीडियो कॉल के जरिए अपने यजमानों के प्रतिप्रदा के श्राद्ध को संपन्न कराया। तीर्थपुरोहितों का कहना है कि उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें त्रिपिंडी श्राद्ध कराने की अनुमति दी जाए। वह कोरोना मानकों का ध्यान रखते हुए श्राद्धकर्म कराएंगे।
श्राद्ध क्या है, क्यों आवश्यक है
श्रीमद्भागवत गीता में उल्लेख है कि संकरो नरकायैव कुलघ्नानां कुलस्य च। पतन्ति पितरो हैषां लुप्त पिंडोदकक्रिया। अर्थात लुप्त पिंड, तर्पण क्रिया और वर्णसंकरों, कुलघातियों से उनके पितर नरक में गिरते हैं तथा श्राप देते हैं जिससे उनकी पीढ़ी में कोई आपदा, आर्थिक, मानसिक, परेशानियां उत्पन्न होने लगती हैं और व्यक्ति पितृऋण का दोषी हो जाता है। इस हेतु पितरों का पूजन श्राद्ध आदि करने चाहिए।
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गंगा के बढ़े हुए जलस्तर के कारण घाट के ऊपर से ही नेमियों ने पितरों के श्राद्ध व तर्पण की प्रक्रिया को पूर्ण किया। वहीं पिशाचमोचन कुंड की गद्दियों पर सन्नाटा पसरा रहा। तीर्थ पुरोहित समाज सुबह से ही खाली हाथ बैठा रहा। सतर्कतावश पुलिस भी पिशाचमोचन कुंड पर तैनात रही। सुबह में कुछ यजमानों को त्रिपिंडी श्राद्ध कुछ तीर्थ पुरोहितों के द्वारा कराया गया। दोपहर बाद तो एक भी यजमान पिशाच मोचन कुंड की तरफ नहीं आए। वहीं कुछ पुरोहितों ने मोबाइल व वीडियो कॉल के जरिए अपने यजमानों के प्रतिप्रदा के श्राद्ध को संपन्न कराया। तीर्थपुरोहितों का कहना है कि उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें त्रिपिंडी श्राद्ध कराने की अनुमति दी जाए। वह कोरोना मानकों का ध्यान रखते हुए श्राद्धकर्म कराएंगे।
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श्राद्ध क्या है, क्यों आवश्यक है
श्रीमद्भागवत गीता में उल्लेख है कि संकरो नरकायैव कुलघ्नानां कुलस्य च। पतन्ति पितरो हैषां लुप्त पिंडोदकक्रिया। अर्थात लुप्त पिंड, तर्पण क्रिया और वर्णसंकरों, कुलघातियों से उनके पितर नरक में गिरते हैं तथा श्राप देते हैं जिससे उनकी पीढ़ी में कोई आपदा, आर्थिक, मानसिक, परेशानियां उत्पन्न होने लगती हैं और व्यक्ति पितृऋण का दोषी हो जाता है। इस हेतु पितरों का पूजन श्राद्ध आदि करने चाहिए।
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