फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   pishach mochan

कुंडों और घाटों पर पुरखों को अर्पित की श्रद्धा

Sun, 15 Sep 2019 01:42 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 15 Sep 2019 01:42 AM IST
विज्ञापन
pishach mochan
वाराणसी। पुरखों के प्रति श्रद्धा के अर्पण का पर्व शनिवार से काशी में आरंभ हो गया। प्रतिपदा और मध्याह्न व्यापिनी तिथि की उपलब्धता के आधार पर तर्पण और श्राद्ध का क्रम शुरू हो गया। तर्पण और श्राद्ध के अलावा पितृतीर्थ गया प्रस्थान के पूर्व पिशाचमोचन कुंड पर पिंडदान भी किया गया। दिन भर गंगा तट से लेकर शहर के कुंडों पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। गंगा का जलस्तर बढ़ा होने के कारण घाटों पर स्थान की कमी रही। ऐसे में सामूहिक तर्पण का कार्य अलग-अलग चरणों में पूरा किया गया।
विज्ञापन

श्रद्धालुओं ने तर्पण और श्राद्ध के लिए चावल, तिल, जौ, दूध, आसन, पोथी, कुशा की खरीदारी की। पुरोहितों के घर जाकर कुश की पवित्री पइंती प्राप्त की। बगल में कुश का आसन दबाए सुबह ही गंगा घाट, कुंड और सरोवरों की ओर तर्पण व श्राद्ध के लिए चल पड़े। पिशाचमोचन तीर्थ पर भी गया जाने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। प्रस्थान से पूर्व श्रद्धालुओं ने तीर्थ पर पिंडदान की रस्म पूरी की। पिशाचमोचन तीर्थ पर अत्यधिक भीड़ होने के कारण सुबह से ही श्राद्ध कर्म आरंभ हो गए थे। श्राद्ध और पिंडदान के पश्चात पिंड कुंड में प्रवाहित किए। पितृदोष निवारण और नारायण बलि के लिए भी पूजा कराई गई। पिशाचमोचन कुंड परिसर के प्रवेश छोर पर ही पिंडदानियों के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। तालाब के किनारे टेंट लगाए गए हैं। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से आए यात्रियों ने श्राद्ध कर्म के उपरांत ब्राह्मण भोजन कराने के लिए तालाब के किनारे ही मिट्टी के पात्रों में भोजन तैयार किया। ब्राह्मण भोजन से पूर्व गाय, कुत्ता, कौआ, चींटी और देवता के निमित्त दोनिया भी निकाली गईं।
विज्ञापन

तीर्थ पुरोहित दीपक पांडेय ने बताया कि प्रतिपदा तिथि पर नाना-नानी का श्राद्ध करने का विधान हमारे धर्म ग्रंथों में वर्णित है। यह भी कहा गया है कि नाना नानी के निधन की तिथि चाहे कोई भी हो लेकिन प्रतिपदा तिथि पर किया गया श्राद्ध उन तक पहुंचता है। श्राद्ध कर्म करने के उपरांत नेमियों ने श्रीमद्भागवत गीता के सप्तम अध्याय का पाठ भी किया। ऐसी मान्यता है कि श्राद्ध कर्म करने के उपरांत श्रीमद्भागत गीता के सप्तम अध्याय का पाठ करने से पितरों को शांति प्राप्त होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

देश के विभिन्न राज्यों से काशी आकर तर्पण करने वालों के आने का सिलसिला लगातार जारी है। घाट के आसपास धर्मशालाओं व गेस्ट हाउस पूरी तरह भर चुके हैं। पूजा-पाठ की दुकानों में अनुष्ठान से संबंधित वस्तुओं की काफ ी मांग रही।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed