वाराणसी: फार्मासिस्ट ने बुखार आने पर कराई जांच तो मिले डेंगू जैसे लक्षण, प्राइवेट अस्पताल में मौत
वाराणसी के रामनगर स्थित लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में कार्यरत फार्मासिस्ट निजी अस्पताल में मौत हो गई। वह पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। डेंगू होने की चर्चा को सीएमओ ने खारिज करते हुए मौत की वजह लीवर डैमेज होना बताया
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वाराणसी के रामनगर स्थित लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में कार्यरत फार्मासिस्ट सुरेंद्र पाल (42) की निजी अस्पताल में मौत हो गई। वह पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। डेंगू होने की चर्चा को सीएमओ ने खारिज करते हुए मौत की वजह लीवर डैमेज होना बताया।
अखरी बाईपास निवासी सुरेंद्र शास्त्री का करीब सप्ताह भर पहले तेज बुखार के साथ ही बेचैनी की शिकायत पर पहले शास्त्री अस्पताल में इलाज कराया गया। यहां से जब कोई राहत नहीं मिली तो परिजनों ने घर के पास के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। इस दौरान सुरेंद्र की डेंगू की जांच कराई गई। जिसमें एनएस1 पॉजिटव की रिपोर्ट आई। यानी कि डेंगू जैसे लक्षण थे। इसके बाद परिजन उसे सुंदरपुर और ककरमत्ता स्थित एक निजी अस्पताल ले गए। यहां इलाज के दौरान सुरेंद्र की मौत हो गई।
एलाइजा जांच से ही डेंगू की पुष्टि
सीएमओ डॉ.संदीप चौधरी ने कहा कि फॉर्मासिस्ट की मौत लीवर डैमेज होने से हुई है। जहां तक डेंगू की बात है तो उनकी एनएस1 जांच ही हुई थी। एलाइजा जांच नहीं हुई थी। जब तक एलाइजा रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आ जाती तब तक डेंगू से मौत की पुष्टि नहीं की जा सकती है। शास्त्री अस्पताल के सीएमएस ने भी लीवर डैमेज होने की जानकारी दी है।
हर घर में मौसमी बीमारी,लापरवाही पड़ रही भारी
तेजी से बदल रहा मौसम लोगों की सेहत पर इस कदर असर डाल रहा है कि लगभग हर घर में एक से दो लोग वायरल फीवर की चपेट में हैं। किसी को तेज बुखार, जोड़ों में दर्द है तो कोई सर्दी, जुकाम और पेट संबंधी बीमारी से ग्रसित है। बीमारी किस कदर बढ़ी है, इसका अंदाजा अस्पतालों में हर दिन बढ़ती जा रही भीड़ को देख लगाया जा सकता है। अस्पतालों के वार्ड भी मरीजों से फुल हो गए हैं। साथ ही पैथालॉजी में भी जांच के लिए लंबी कतार लग रही है। डॉक्टरों के मुताबिक इस समय जरा सी लापरवाही सेहत के लिए भारी पड़ सकती है।
120 से ज्यादा डेंगू के मामले
वाराणसी जिले में डेंगू का संक्रमण बढ़ने के साथ ही स्वास्थ्य विभाग की चुनौतियां बढ़ गई हैं। शुक्रवार को भी एक महिला समेत चार नये मरीज मिले हैं। जिसके बाद जिले में कुल मरीजों का आंकड़ा 121 पहुंच गया। इधर सरकारी अस्पतालों के ब्लड बैंक समेत आईएमए ब्लड बैंक पर भी प्लेटलेट्स की मांग बढ़ गई है। मंडलीय और जिला अस्पताल से औसतन 15 से 20 यूनिट और आईएमए से 50 यूनिट से अधिक प्लेटलेट्स की आपूर्ति रोज की जा रही है।