फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   People watched online Sankat Mochan Music Festival in Varanasi

वाराणसी: सुर-लय ताल की श्रद्धा-भक्ति से झंकृत हुआ हनुमत दरबार, साढ़े नौ लाख दर्शकों तक पहुंचा संकटमोचन संगीत समारोह

Sat, 08 May 2021 09:41 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sat, 08 May 2021 09:41 AM IST
विज्ञापन
People watched online Sankat Mochan Music Festival in Varanasi
संगीत समारोह में दी गई प्रस्तुति। - फोटो : अमर उजाला।

वाराणसी में संकटमोचन संगीत समारोह की अंतिम निशा में कलाकारों ने आभासी मंच पर देर रात तक सप्त सुरों की प्रार्थना से हनुमत लला के चरणों में श्रद्धा भक्ति अर्पित की। कोरोना संक्रमण काल में आभासी दुनिया के मंच पर होने वाले आयोजन में श्रोताओं की संख्या भी निरंतर बढ़ती ही जा रही है। संगीत समारोह से अब तक साढ़े नौ लाख से अधिक जुड़े।

विज्ञापन

 
शुक्रवार को सातवीं निशा में संगीत मार्तंड पं. जसराज के शिष्य पं. सुमन घोष सभी के आकर्षण का केंद्र रहे। अमेरिका से ऑनलाइन जुड़े मेवाती घराने के गायक और संगीत मार्तंड पं. जसराज के शिष्य पं. सुमन घोष में दर्शकों ने पं. जसराज की झलक देखी। पं. सुमन ने कहा कि संकटमोचन दरबार में ही मैंने अपनी पहली प्रस्तुति दी। उस दौरान गुरुजी मेरे सामने थे और उन्होंने मुझे आशीर्वाद भी दिया। यह पहला मौका जब इस आयोजन में गुरु जी सशरीर मौजूद नहीं हैं लेकिन वह हमेशा हमारे साथ हैं।
विज्ञापन

 
उन्होंने संकटमोचन केदरबार में राग कौशिक कान्हड़ा में निबद्ध बंदिश पेश करके हनुमत चरणों में श्रद्धा-भक्ति निवेदित की। इसकेबाद उन्होंने कोरोना महामारी के शमन के लिए संकटमोचन हनुमान जी से गुहार लगाई। उन्होंने जय -जय हनुमान गोंसाई, कौन सो संकट मोर गरीब को जो तुमसे नहीं जात है टारो... की प्रस्तुति दी। समापन उन्होंने श्रीराम चंद्र कृपालु भजमन...से किया। इस दौरान श्रोताओं ने पं. जसराज के प्रसिद्ध भजन हनुमान लला मेरे प्यारे लला... की भी मांग की।

विज्ञापन
विज्ञापन

People watched online Sankat Mochan Music Festival in Varanasi

इसके पूर्व अंतिम निशा की पहली प्रस्तुति बेंगलुरू से जुड़ी श्रीविद्या के कुचिपुड़ी नृत्य की रही। उन्होंने मंदोदरी प्रसंग केजरिए मनमोहक नृत्य की प्रभावशाली प्रस्तुति से श्रोताओं की प्रशंसा बटोरी। इसके पश्चात उन्होंने आचार्य कृष्ण राय देव द्वारा रचित मंडूक शबदम की भावपूर्ण प्रस्तुति से हनुमत दरबार में अपनी सशक्त उपस्थित दर्ज कराई। इसकेबाद अगली प्रस्तुति में किराना घराने के वरिष्ठ कलाकार पं. नागराज हवलदार एवं उनके पुत्र ओंकार हवलदार स्वरांजलि की अभ्यर्थना के लिए संकटमोचन दरबार से जुड़े।
 
उन्होंने राग गोरख कल्याण में विलंबित एकताल एवं मध्य लय तीन ताल में बाजे मुरली मन बांवरा...की सुमधुर प्रस्तुति से श्रोताओं को भी भावों से भर दिया। इसके बाद उन्होंने राग भैरवी की रचना जय हो करुणानिधे सुनाया। इसके बाद मुंबई से पद्मविभूषण पं. हरिप्रसाद चौरसिया के शिष्य एवं बांसुरी वादक विवेक सोनार ने जब बंशी की मधुर तान छेड़ी तो हर कोई सम्मोहित सा हो गया। कमेंट बाक्स में तो बधाईयों के तांते लग गए।

हर किसी ने बांसुरी और तबले की युगलबंदी की जी भर सराहना की। उन्होंने राग हंसध्वनि में अद्धा ताल और दु्रत तीन ताल में निबद्ध बंदिश की सुमधुर प्रस्तुति दी। अगली प्रस्तुति के लिए पं. हरीश तिवारी को दिल्ली से जुड़ना था लेकिन दिल्ली में कोरोना के बिगड़े हालात को देखते हुए वह देवरिया शिफ्ट हो गए और वहीं से अपनी प्रस्तुति दी।
 
इस निशा की अंतिम प्रस्तुति मेडोलिन और ड्रम की जुगलबंदी रही। मेडोलिन वादक यू राजेश और ड्रमर शिवमणि का सदाबहार अंदाज श्रोताओं को आनंदित कर गया। संचालन सौरभ चक्रवर्ती ने किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed