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बीएचयू ट्रामा सेंटर में भर्ती युवक की मौत, परिजनों का आरोप- किडनी निकाल ली
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 10 Oct 2017 10:22 AM IST
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बीएचयू ट्रॉमा सेंटर के बाहर रोते बिलखते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
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बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान एक युवक की मौत के बाद उसके परिजनों ने सोमवार को जमकर हंगामा किया। परिवारीजनों ने डॉक्टरों पर किडनी निकालने का आरोप लगाते हुए थाने में तहरीर दी है। मृतक चंद्रिका पनिका सोनभद्र के बीजपुर का निवासी है।
मृतक के भाई रमेश कुमार पनिका के मुताबिक सड़क हादसे में उसके भाई को पैर के अंगूठे और सिर में चोट आने के बाद सोनभद्र से लाकर पांच अक्तूबर को यहां भर्ती कराया गया था। शनिवार को ऑपरेशन हुआ। इसके बाद देखा तो उसके पेट में लंबा चीरा लगाया गया था।
पूछने पर चिकित्सकों ने कुछ बताया भी नहीं। उधर, 100 नंबर पर इसकी सूचना देने के साथ ही परिजन पोस्टमार्टम के लिए परेशान रहे लेकिन सोमवार देर शाम तक पोस्टमार्टम नहीं हो सका।
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चंद्रिका प्रसाद (28) बीते पांच अक्तूबर की शाम बाइक से अपनी ससुराल बैढ़न जा रहा था। रास्ते में किसी वाहन से उसकी टक्कर हो गई और वह बेहोश हो गया। आसपास के लोगों ने इसकी सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दी। पुलिस की मौजूदगी में उसे एनटीपीसी के बीजपुर स्थित अस्पताल ले जाया गया।
वहां चिकित्सकों ने उसके अंगूठे और सिर में चोट लगने की जानकारी दी। कुछ देर इलाज के बाद उसे बीएचयू ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। रमेश ने बताया कि पांच अक्तूबर की रात 11:30 बजे वे ट्रॉमा सेंटर पहुंचे, जहां रेड जोन के एक चिकित्साधिकारी ने भर्ती कर इलाज किया। अगले दिन उसे दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया।
ताया कि चिकित्साधिकारी ने शनिवार को ऑपरेशन करने की बात कहकर दवा और उपकरण लाने को कहा। शाम को ऑपरेशन हुआ तब वह ठीक था। रमेश का कहना है कि आग्रह करने पर भी चिकित्सकों ने घरवालों को चंद्रिका से मिलने नहीं दिया।
रविवार की रात चिकित्सक ने चंद्रिका की हालत गंभीर होने की जानकारी दी और कुछ देर बाद ही उसकी मौत हो गई। रमेश ने बताया कि उसके पेट पर गहरा कटे का निशान था। आरोप लगाया कि ऑपरेशन के दौरान चिकित्सक ने उसकी किडनी निकाल ली है।
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मृतक के भाई रमेश कुमार पनिका के मुताबिक सड़क हादसे में उसके भाई को पैर के अंगूठे और सिर में चोट आने के बाद सोनभद्र से लाकर पांच अक्तूबर को यहां भर्ती कराया गया था। शनिवार को ऑपरेशन हुआ। इसके बाद देखा तो उसके पेट में लंबा चीरा लगाया गया था।
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पूछने पर चिकित्सकों ने कुछ बताया भी नहीं। उधर, 100 नंबर पर इसकी सूचना देने के साथ ही परिजन पोस्टमार्टम के लिए परेशान रहे लेकिन सोमवार देर शाम तक पोस्टमार्टम नहीं हो सका।
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चंद्रिका प्रसाद (28) बीते पांच अक्तूबर की शाम बाइक से अपनी ससुराल बैढ़न जा रहा था। रास्ते में किसी वाहन से उसकी टक्कर हो गई और वह बेहोश हो गया। आसपास के लोगों ने इसकी सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दी। पुलिस की मौजूदगी में उसे एनटीपीसी के बीजपुर स्थित अस्पताल ले जाया गया।
वहां चिकित्सकों ने उसके अंगूठे और सिर में चोट लगने की जानकारी दी। कुछ देर इलाज के बाद उसे बीएचयू ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। रमेश ने बताया कि पांच अक्तूबर की रात 11:30 बजे वे ट्रॉमा सेंटर पहुंचे, जहां रेड जोन के एक चिकित्साधिकारी ने भर्ती कर इलाज किया। अगले दिन उसे दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया।
ताया कि चिकित्साधिकारी ने शनिवार को ऑपरेशन करने की बात कहकर दवा और उपकरण लाने को कहा। शाम को ऑपरेशन हुआ तब वह ठीक था। रमेश का कहना है कि आग्रह करने पर भी चिकित्सकों ने घरवालों को चंद्रिका से मिलने नहीं दिया।
रविवार की रात चिकित्सक ने चंद्रिका की हालत गंभीर होने की जानकारी दी और कुछ देर बाद ही उसकी मौत हो गई। रमेश ने बताया कि उसके पेट पर गहरा कटे का निशान था। आरोप लगाया कि ऑपरेशन के दौरान चिकित्सक ने उसकी किडनी निकाल ली है।
ऑपरेशन के बाद हो गया था बिल्कुल ठीक, लेकिन मिलने नहीं दिया गया
बीएचयू ट्रॉमा सेंटर के बाहर रोते बिलखते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
इधर, सोमवार को उसकी पत्नी अनीता भी मां-बहन के साथ ट्रॉमा सेंटर पहुंची। रमेश ने बताया कि चिकित्सक पोस्टमार्टम करने को भी तैयार नहीं थे। 100 नंबर पर इसकी सूचना दी गई, कुछ देर बाद पुलिस भी वहां पहुंच गई। लंका थाने पर दी गई तहरीर में रमेश ने किडनी निकालने का आरोप लगाते हुए चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
मामले में बीएचयू के पीआरओ डॉ. राजेश सिंह ने कहा कि यह ट्रॉमा सेंटर को बदनाम करने की साजिश है। ट्रॉमा सेंटर में घायल मरीज का आपरेशन सतर्कता के साथ किया गया। ऐसे में मनगढ़ंत और बेबुनियाद आरोप लगाया जाना अनुचित है।
सर्जरी करने वाले न्यूरोसर्जरी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रविशंकर प्रसाद ने सात अक्तूबर को दुर्घटना में घायल मरीज चंद्रिका के सिर का ऑपरेशन किया था।
डॉ. रविशंकर प्रसाद का कहना है कि अक्सर दुर्घटना के बाद ब्रेन का प्रेशर अधिक रहता है, ऐसे में ब्रेन से हड्डी निकालकर पेट के आंतरिक हिस्से में रख दी जाती है। यदि मरीज बच जाता है तो प्रेशर कम होने के बाद उसे वापस ब्रेन में लगाया जाता है।
ऑपरेशन के बाद पोस्ट ऑपरेटिव यूनिट में ही आठ अक्तूबर की देर रात मरीज की मौत हो गई। मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।