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पांडुलिपियों को सहेजकर रखने की जरूरत
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वाराणसी। बीएचयू भोजपुरी अध्ययन केंद्र में शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में श्रीरामचरित मानस की पांडुलिपियों पर विस्तृत चर्चा हुई। बतौर मुख्य वक्ता जेएनयू में भारतीय भाषा के अध्यक्ष प्रो. ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि पांडुलिपियों को सहेजकर रखने की जरूरत है। इसके अलावा कई ऐसे अभिलेख हैं जो अभी तक पढ़े नहीं गए हैं, उनको भी सहेजना होगा।
भोजपुरी अध्ययन केंद्र और आधार प्रकाशन पंचकूला हरियाणा के तत्वावधान में शनिवार को श्रीरामचरित मानस की पांडुलिपियां पुस्तक का विमोचन किया गया। अध्यक्षता करते हुए बीएचयू के रेक्टर प्रो. वीके शुक्ल ने कहा कि श्रीरामचरित मानस जैसे ग्रंथ हमारे देश की महान परंपरा और संस्कृति का सूचक है।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल ने कहा कि श्रीरामचरित मानस की पांडुलिपियां पुस्तक ज्ञात-अज्ञात तथ्यों के आधार पर तैयार की गई हैं। इस दौरान पुस्तक के संपादक उदय शंकर दुबे और लेखक प्रो. विजय नाथ मिश्रा, कार्यक्रम समन्वयक प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल, प्रो. चंपा सिंह, डॉ. शिल्पा सिंह, प्रो. वशिष्ठ नारायण त्रिपाठी, शेफाली आभा, प्रो. अखिलेश कुमार आदि मौजूद रहे।
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भोजपुरी अध्ययन केंद्र और आधार प्रकाशन पंचकूला हरियाणा के तत्वावधान में शनिवार को श्रीरामचरित मानस की पांडुलिपियां पुस्तक का विमोचन किया गया। अध्यक्षता करते हुए बीएचयू के रेक्टर प्रो. वीके शुक्ल ने कहा कि श्रीरामचरित मानस जैसे ग्रंथ हमारे देश की महान परंपरा और संस्कृति का सूचक है।
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल ने कहा कि श्रीरामचरित मानस की पांडुलिपियां पुस्तक ज्ञात-अज्ञात तथ्यों के आधार पर तैयार की गई हैं। इस दौरान पुस्तक के संपादक उदय शंकर दुबे और लेखक प्रो. विजय नाथ मिश्रा, कार्यक्रम समन्वयक प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल, प्रो. चंपा सिंह, डॉ. शिल्पा सिंह, प्रो. वशिष्ठ नारायण त्रिपाठी, शेफाली आभा, प्रो. अखिलेश कुमार आदि मौजूद रहे।
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