मालवीय जयंती पर विशेष: बीएचयू को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखना चाहते थे महामना, पढ़ें- एनी बेसेंट से जुड़ी एक घटना
हिंदी तिथि के अनुसार 27 दिसंबर यानि पौष कृष्ण अष्टमी को बीएचयू के संस्थापक महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की जन्म जयंती है। आज विश्वविद्यालय परिसर में कई कार्यक्रम आयोजित हैं।
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय( बीएचयू) के संस्थापक महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की इच्छा थी कि विश्वविद्यालय राजनीतिक गतिविधियों से पूरी तरह दूर रहे। जून 1917 में जब मद्रास सरकार के आदेश से एनी बेसेंट, डॉ. अरुण्डेल और बीपी वाडिया को नजरबंद किया गया तो बनारस के नागरिकों ने अन्य लोगों की तरह कड़ा विरोध दर्ज कराया था।
सेंट्रल हिंदू स्कूल के कुछ पुराने शिक्षक जो एनी बेसेंट को मां समझते थे, उन्हें लगा कि वह भी इससे परे नहीं रह सकते हैं। उन्होंने भी विरोध दर्ज कराया। हिंदी तिथि के अनुसार 27 दिसंबर यानि पौष कृष्ण अष्टमी को महामना की जन्म जयंती है। ऐसे में लोग महामना से जुड़ी स्मृतियों की चर्चा कर रहे हैं।
बीएचयू की ओर से प्रकाशित काशी हिंदू विश्वविद्यालय के इतिहास के भाग दो की पुस्तक में महामना की जीवन से जुड़ी कई प्रमुख घटनाओं का जिक्र किया गया है। इसमें यह लिखा गया है कि 1917 में एनी बेसेंट समेत अन्य लोगों को नजरबंद करने के विरोध में सेंट्रल हिंदू स्कूल के तत्कालीन प्रधानाचार्य डॉ. आईजेएस तारापोरवाला ने विरोध स्वरूप एक बैठक बुलाई।
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केवल पढ़ाई पर ही अपना ध्यान केंद्रित करें छात्र
बैठक में एक संकल्प पारित किया गया, जिसे भारत सरकार और लंदन स्थित सेक्रेट्ररी ऑफ स्टेट को भेजा गया। महामना को यह सब पसंद नहीं था। वे चाहते थे कि विश्वविद्यालय से जुड़ा कोई भी कर्मचारी राजनीति में किसी तरह की सहभागिता न करें। कुछ लोगों को यह अपमानजनक लगा कि पंडित मदन मोहन मालवीय जब स्वयं देश के लोकप्रिय नेता है, तो उन्हें विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को राजनीति में भाग लेने से नहीं मना करना चाहिए।
बीएचयू चांसलर और महामना के प्रपौत्र गिरधर मालवीय ने कहा कि महामना हमेशा यही चाहते थे कि विश्वविद्यालय के जो छात्र हों, वह केवल पढ़ाई पर ही अपना ध्यान केंद्रित करें। शिक्षण संस्थानों में राजनीति न किए जाने के उनके विरोध के पीछे भी यही वजह थी। महामना की जयंती पर लोगों को यही संकल्प लेते हुए जीवन में सफलता के क्षेत्र में आगे बढ़ते रहना चाहिए। यह बिल्कुल सही है कि शिक्षण संस्थानों में राजनीति नहीं होनी चाहिए।
महामना ने किया असहयोग आंदोलन का विरोध, स्वराज-स्वदेशी का बांटा उपदेश
महामना मदनमोहन मालवीय ने असहयोग आंदोलन का विरोध भी किया। 1917 के बाद कुछ ही साल के भीतर देश में राजनीतिक स्थिति बिगड़ गई। सितंबर 1920 में कांग्रेस का विशेष अधिवेशन आहूत किया गया, जिसमें महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन का मुख्य संकल्प भी पारित हुआ।
इसमें एक प्रस्ताव यह भी था कि सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त संस्थान और राष्ट्रीय स्कूल एवं कॉलेज खोलने का बहिष्कार किया जाए। महामना ने अंग्रेजी हुकूमत और लोगों के बीच समझौता कराने की कोशिश की लेकिन वह असफल रहे। 1921 में देश के विभिन्न हिस्सों में राष्ट्रीय महाविद्यालय, राष्ट्रीय विद्यालय और विश्वविद्यालय शुरू किए गए।