पंचायत चुनाव : इस बार 66 गांवों में नहीं चुनी जाएगी सरकार, 2020 में 760 ग्राम पंचायतों में हुआ था इलेक्शन
जुलाई में मतदाता पुनरीक्षण का काम शुरू होगा और बीएलओ डोर टू डोर जाएंगी। वाराणसी में 40 जिला पंचायत सदस्य, 1007 बीडीसी, 694 पंचायतों में ग्राम प्रधान, 8978 वार्डों में ग्राम पंचायत सदस्यों के लिए चुनाव होंगे।
विस्तार
Panchayat Election UP: त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की तैयारियों का आगाज हो चुका है। जून में मतदाता सूची का संशाेधन होगा। अगले साल मई में ग्राम पंचायतों और जुलाई में क्षेत्र व जिला पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। पिछले पंचायत चुनाव की अपेक्षा इस बार 66 ऐसी ग्राम पंचायतें हैं, जहां चुनाव नहीं होंगे। ये ग्राम पंचायतें नगर निगम, नगर पालिका और निगम पंचायत क्षेत्रों में शामिल हो चुकी हैं।
इस बार पंचायत चुनाव से बाहर होने वाले गांवों में हरहुआ ब्लॉक के 21 गांव और काशी विद्यापीठ के 27 गांव और चिरईगांव के 18 हैं।
डीपीआरओ आदर्श ने बताया कि पिछले पंचायत चुनाव में जिले में 17.53 लाख मतदाता थे। इसमें चिरईगांव ब्लॉक में 198650, चोलापुर में 219550, हरहुआ में 165187, काशी विद्यापीठ में 207482, पिंडरा में 250170, बड़ागांव में 212963, आराजीलाइन में 290836 और सेवापुरी ब्लॉक में 208750 मतदाता थे।
पास की ग्राम पंचायत में शामिल होंगी छोटी ग्राम पंचायतें
डीपीआरओ आदर्श कुमार ने बताया कि एक हजार की आबादी पर एक ग्राम पंचायत होगी। ऐसी ग्राम पंचायत जिसका एक राजस्व गांव नगरीय निकाय में समाहित हो गया है और केवल एक ही राजस्व गांव बचा है और वह ग्राम पंचायत बनाने के मानक को पूरा नहीं करता तो उसे बगल की ग्राम पंचायत में सम्मिलित कर दिया जाएगा।
वहीं, यदि कोई ग्राम पंचायत नगरीय क्षेत्र में शामिल हो जाती है और उसका सम्मिलित राजस्व ग्राम अगर ग्राम पंचायत बनाने का मानक पूर्ण करता है तो उस दशा में राजस्व गांव को ग्राम पंचायत बनाया जा सकता है। ऐसे ही एकल राजस्व ग्राम के नाम से गठित ग्राम पंचायत यदि आंशिक रूप से प्रभावित हुई है और उसकी जनसंख्या एक हजार है तो उस दशा में ग्राम पंचायत यथावत शेष बनी रहेगी। उसके लिए सभी जिलों में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया जाएगा।