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'दिव्यांग' स्वास्थ्य महकमा: जिसके दादा व पापा पद्मश्री, उसका डेढ़ साल से नहीं बन पाया दिव्यांगता का सर्टिफिकेट

Wed, 04 Feb 2026 05:12 PM IST
प्रगति चंद आराधना पांडेय, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी।
आराधना पांडेय, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Wed, 04 Feb 2026 05:12 PM IST
सार

Varanasi News: वाराणसी में जिसके दादा और पापा पद्मश्री हैं, उसका डेढ़ साल से ज्यादा समय से दिव्यांग सर्टिफिकेट नहीं बना पाया। 11 जून 2024 को सीएमओ को पत्र लिखा, लेकिन विभागीय टीम जांच करने घर तक नहीं पहुंची।  

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Padma Shri Shribhas Chandra daughter disability certificate not issued by health department in varanasi
विकलांगता प्रमाणपत्र - फोटो : AI

विस्तार

जिसके दादा और पिता पद्मश्री, उसका भी दिव्यांगता सर्टिफिकेट नहीं बन पा रहा है। पद्मश्री श्रीभास चंद्र सुपकार डेढ़ साल से ज्यादा समय से दौड़-भाग कर रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य महकमा कोई हल नहीं निकाल सका। व्यवस्था से नाराज श्रीभास ने कहा कि यह सिर्फ उनकी बेटी का मामला नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की तस्वीर है जहां सम्मान तो, मिल जाता है लेकिन जरूरत के वक्त इंसाफ नहीं मिल पाता।

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बनारसी हथकरघा और वस्त्रों को देश-दुनिया में पहचान दिलाने वाले पद्मश्री श्रीभास स्वास्थ्य महकमे के आगे बेबस हैं। उनकी बेटी 25 वर्षीय बेटी वेदमती सुपकार जन्म से दिव्यांग हैं लेकिन दिव्यांग सर्टिफिकेट नहीं बन पा रहा। वह सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित है। श्रीभास के पिता जदुनाथ सुपकार भी पद्मश्री से सम्मानित थे फिर भी वेदमती को दिव्यांग सर्टिफिकेट बनवाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा।
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श्रीभास सुपकार ने बताया कि दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग में पंजीकरण कराया था। वहां से कहा गया कि सीएमओ को पत्र लिखना होगा। 11 जून 2024 को सीएमओ को पत्र भी लिखा और अनुरोध किया कि बेटी की गंभीर हालत को देखते हुए मेडिकल परीक्षण के लिए टीम को घर भेज दें ताकि दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाने की औपचारिकता पूरी हो सके। इसके बावजूद नतीजा शून्य रहा। कई बार अधिकारियों से संपर्क किया गया। हर बार कहा गया कि आपकी बात सीएमओ तक पहुंचा दी जाएगी। सीएमओ ही फोन करके समस्या का समाधान करेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कभी फोन नहीं आया।

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दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग में वेदमति का पंजीकरण हो चुका है। दिव्यांग के रूप में मान्यता मिल चुकी है। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग दिव्यांग सर्टिफिकेट जारी करने की औपचारिकता नहीं पूरी कर रहा है। वेदमती जन्म से ही दिव्यांग है। उन्हें कॉर्पस कैलोसम की समस्या है। दस्तावेजों के मुताबिक वेदमती का जन्म 17 मई 2000 को हुआ। वह सामान्य वर्ग की हैं। बौद्धिक दिव्यांगता की श्रेणी में पंजीकृत हैं।

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नियम है कि गंभीर दिव्यांगता के मामलों में डॉक्टरों की टीम घर जाकर जांच कर सकती है या वीडियो कॉल के जरिये सत्यापन कर दिव्यांग सर्टिफिकेट जारी किया जा सकता है, लेकिन बेटी से जुड़ी फाइल अब तक दबाकर रखी गई है।  

क्या है पूरा मामला
प्रकरण की जानकारी ली जाएगी। देखा जाएगा कि मामला लटका क्यों है। अगर सब कुछ ठीक मिला तो दिव्यांगता की जांच करके सर्टिफिकेट बनवाने की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। -डॉ. राजेश प्रसाद, एडिशनल सीएमओ

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