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हाई टेक्नोलॉजी से नहीं जन सहयोग से अविरल होगी गंगाः पद्मश्री सींचेवाल
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 08 Feb 2017 10:00 PM IST
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बीएचयू में आयोजित गंगा चौपाल में बोले पद्मश्री बाबा बलबीर सिंह सींचेवाल
- फोटो : अमर उजाला
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कालीबेन नदी को फिर से जीवन देने वाले पद्मश्री बाबा बलबीर सिंह सींचेवाल ने गंगा के निर्मलीकरण में अपना पूरा सहयोग देने का वादा किया है।
बुधवार को वो काशी में थे। महामना मालवीय गंगा, नदी विकास एवं जल संसाधन शोध केंद्र बीएचयू की ओर से संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में आयोजित गंगा चौपाल में उन्होंने कहा कि गंगा का निर्मलीकरण कठिन नहीं और किसी हाई टेक्नोलॉजी की भी जरूरत नहीं। सिर्फ जनसहयोग जरूरी है। महज री-साइकल और री-यूज की तकनीक अपनाकर न सिर्फ गंगा को अविरल बनाया जा सकता है बल्कि खेती किसानी को भी प्रोत्साहित किया जा सकता है।
कहीं सड़क वाले बाबा तो कहीं वेलफेयर बाबा, कहीं नदी वाले बाबा तो कहीं इको बाबा के नाम से ख्यात बलबीर सिंह सींचेवाल ने कहा कि गंगा निर्मलीकरण के लिए आप आगे आएं। हम हर कदम आपके साथ हैं।
कहा कि केंद्र सरकार के बीस हजार करोड़ का ‘नमामि गंगे’ प्रोजेक्ट चल रहा है।
जाहिर है पैसों की कमी नहीं, समस्या हमारे आपके साथ है। सरकार के भरोसे बैठने के बजाए गंगा संरक्षण के लिए एकजुट कदम बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि गंगा में जाने वाले सीवेज और कल-कारखानों के दूषित जल का शोधन कर उसे किसानों को दें।
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उन्होंने बताया कि हर गांव में सींचेवाल मॉडल को लागू कराना ही उनकी कोशिश है।
अब तक डेढ़ सौ गांवों में उन्होंने इस मॉडल को लागू किया गया है।
पर्यावरण चुनावी मुद्दा बने, यह जरूरी है। जनता को पर्यावरण और नदियों के संरक्षण के मुद्दे पर भी बात करनी चाहिए।
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बुधवार को वो काशी में थे। महामना मालवीय गंगा, नदी विकास एवं जल संसाधन शोध केंद्र बीएचयू की ओर से संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में आयोजित गंगा चौपाल में उन्होंने कहा कि गंगा का निर्मलीकरण कठिन नहीं और किसी हाई टेक्नोलॉजी की भी जरूरत नहीं। सिर्फ जनसहयोग जरूरी है। महज री-साइकल और री-यूज की तकनीक अपनाकर न सिर्फ गंगा को अविरल बनाया जा सकता है बल्कि खेती किसानी को भी प्रोत्साहित किया जा सकता है।
कहीं सड़क वाले बाबा तो कहीं वेलफेयर बाबा, कहीं नदी वाले बाबा तो कहीं इको बाबा के नाम से ख्यात बलबीर सिंह सींचेवाल ने कहा कि गंगा निर्मलीकरण के लिए आप आगे आएं। हम हर कदम आपके साथ हैं।
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कहा कि केंद्र सरकार के बीस हजार करोड़ का ‘नमामि गंगे’ प्रोजेक्ट चल रहा है।
जाहिर है पैसों की कमी नहीं, समस्या हमारे आपके साथ है। सरकार के भरोसे बैठने के बजाए गंगा संरक्षण के लिए एकजुट कदम बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि गंगा में जाने वाले सीवेज और कल-कारखानों के दूषित जल का शोधन कर उसे किसानों को दें।
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उन्होंने बताया कि हर गांव में सींचेवाल मॉडल को लागू कराना ही उनकी कोशिश है।
अब तक डेढ़ सौ गांवों में उन्होंने इस मॉडल को लागू किया गया है।
पर्यावरण चुनावी मुद्दा बने, यह जरूरी है। जनता को पर्यावरण और नदियों के संरक्षण के मुद्दे पर भी बात करनी चाहिए।