UP : साल के 366 दिन..., काशी में पाबंदियों के बगैर गुजरे सिर्फ 37; 2024 में 329 दिन लागू रही पुलिस की बंदिश
बीते वर्ष यानी 2024 में काशी के लोगों को 329 दिन पुलिस की बंदिशाें में गुजारनी पड़ी। पुलिस ने बीएनएसएस और दंड प्रक्रिया संहिता का पालन करवाया। इस दाैरान सख्ती भी बरती जा रही थी।
विस्तार
साल 2024 को बीते हुए पांच दिन होने को आए। साल 2024 के 366 दिनों में पाबंदियों के बगैर काशीवासियों ने महज 37 दिन ही गुजारे। शेष 329 दिन कमिश्नरेट की पुलिस की ओर से आमजन के लिए बंदिश लगी रहीं। साधारण शब्दों में कहें तो पांच या इससे ज्यादा लोगों के एकसाथ इकट्ठा होने पर रोक लगी रही। इसके अलावा सार्वजनिक जगहों पर विरोध-प्रदर्शन करने या धरना देने पर रोक लगी रही।
एक जुलाई 2024 से देश में नए आपराधिक कानून लागू हुए। इस क्रम में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) लागू हुई। इसके पहले 30 जून 2024 तक बीएनएसएस की जगह दंड प्रक्रिया संहिता लागू थी।
दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 उपद्रव या आशंकाग्रस्त खतरे के अत्यावश्यक मामलों में आदेश जारी करने की शक्ति जिला मजिस्ट्रेट, सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट या राज्य सरकार द्वारा विशेष रूप से सशक्त कार्यपालक मजिस्ट्रेट को देती है। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 से संबंधित प्रावधान बीएनएसएस में धारा 163 में किया गया है।
एक जनवरी से 30 जून 2024 तक कमिश्नरेट में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 पांच बार लगाई गई। इस दौरान जनवरी में 11 दिन और जून में 7 दिन ऐसे रहे, जब धारा 144 लागू नहीं थी। एक जुलाई से 31 दिसंबर 2024 तक बीएनएसएस की धारा 163 कमिश्नरेट में पांच बार लागू की गई। इस दौरान जुलाई में पांच दिन, अगस्त में दो दिन, नवंबर में 11 दिन और दिसंबर में एक दिन ऐसा रहा, जब धारा 163 लागू नहीं थी।
बोले अधिकारी
बीएनएसएस की धारा 163 सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने के साथ ही संभावित खतरे को रोकने के लिए है। काशी में स्नान पर्वाें व त्योहारों में उमड़ने वाले श्रद्धालुओं के हुजूम, वीवीआईपी आगमन और बोर्ड परीक्षा के अलावा अन्य महत्वपूर्ण आयोजनों के मद्देनजर समय-समय पर धारा 163 इस्तेमाल की जाती है। - मोहित अग्रवाल, पुलिस आयुक्त