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काशी विश्वनाथ की सप्तऋषि आरती पर मंदिर प्रशासन को मिली काशी की पुरातन परंपरा की खुली चुनौती

Tue, 12 May 2020 07:51 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Tue, 12 May 2020 07:51 PM IST
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Open challenge to the Kashi Vishwanath temple administration for debate on Saptrishi Aarti controversy
काशी के विद्वान अर्चकों द्वारा की जा रही काशी विश्वनाथ की सप्तऋषी आरती । - फोटो : अमर उजाला

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की सप्तऋषि आरती पर महंत परिवार के मुखिया डॉ. कुलपति तिवारी ने मंदिर प्रशासन को काशी की पुरातन परंपरा शास्त्रार्थ की खुली चुनौती दी है। उन्होंने कहा है कि मंदिर प्रशासन सभी को यह समझाने में लगा है कि सप्तऋर्षि आरती एक सामान्य आरती होती है जो कोई भी व्यक्ति शास्त्र और विधि-विधान के साथ संपादित कर सकता है।

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डॉ. तिवारी ने कहा कि मंदिर प्रशासन को लग रहा है कि महंत परिवार अपने व्यक्तिगत लाभ और पूजन-अर्चन के लिए ड्रामा कर रहा है। वास्तविकता यह है कि इस विधान का उद्देश्य पहले महादेव को प्रसन्न करना है और इसका संबंध महंतों से बाद में है। द्वादश ज्योर्तिलिंगों में से एक श्री काशी विश्वनाथ की सप्तऋषि आरती की परंपरा इसको प्रधानता की श्रेणी में लाती है।
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वर्तमान में मंदिर के पुजारियों द्वारा सप्तऋषि आरती की परंपरा का विधिवत व शास्त्रवत निर्वहन नहीं किया जा रहा है। इसलिए महंत परिवार मंदिर प्रशासन को यह खुली चुनौती देता है कि काशी विद्वत परिषद या देश के किसी भी विद्वान की उपस्थिति में वर्तमान सप्तऋषि अर्चकों व महंत परिवार के बीच सार्वजनिक शास्त्रार्थ कराया जाए। वर्तमान में जिन अर्चकों से सप्तऋषि आरती कराई जा रही है उन्हें इसके बारे में कोई ज्ञान है, तो इसका परीक्षण भी हो जाएगा।

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Open challenge to the Kashi Vishwanath temple administration for debate on Saptrishi Aarti controversy
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala

पुरातत्व विभाग से कराएं जांच

उन्होंने कैलाश महादेव मंदिर के क्षतिग्रस्त हिस्सों की जांच महंत परिवार की उपस्थिति में सार्वजनिक रूप से पुरातत्व विभाग से कराने की मांग की है। जांच में सारा मामला साफ हो जाएगा और हम लोगों को भी अपना पक्ष रखने मौका मिलेगा।

सात स्टेट की डलिया से फैला रहे भ्रम

मंदिर प्रशासन द्वारा सात स्टेट की पूजा की डलिया को सप्तऋषि आरती से जोड़कर अनावश्यक रूप से भ्रम फैलाया जा रहा है। यह सरासर गलत है। सप्तऋषि के प्रतिनिधियों का बैठना और अन्य प्रतिनिधियों द्वारा आरती का संपादन अलग-अलग विषय है। सप्तऋषि आरती में सात स्टेटों की पूजा की डलिया रखना मूल विषय नहीं है। यह तो विषय से भटकाने का प्रयास है।

जानें सप्तर्षि आरती के विधि-विधान के बारें में

पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया कि सप्तर्षि आरती का एक विशिष्ट विधि-विधान होता है। इसको करने वाले एक विशेष परंपरा के तहत दीक्षित होते हैं। यहां तक कि सप्तर्षि आरती एक विशेष लय, सुर और ताल में होती है जिसमें मंत्रों की ध्वनि न्यूनतम से उच्चतम स्तर पर उच्चारित होती है। सप्तर्षि आरती का सीधा संबंध ग्रह और नक्षत्रों के योग पर निर्धारित करता है।

 

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ajay rai - फोटो : अमर उजाला

धर्मार्थ कार्य मंत्री मौन, निरीक्षण कर रहे स्टांप मंत्री

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक अजय राय ने कहा कि काशी विश्वनाथ मंदिर के विवाद में प्रदेश सरकार के भीतर ही मतभेद उभरकर सतह पर आ गया है। सप्तऋषि आरती प्रकरण में मंदिर प्रशासन की कार्रवाई के बचाव में स्टांप एवं निबंधन मंत्री मैदान में उतरे हैं, जबकि मंदिर क्षेत्र के विधायक स्वयं संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य मंत्री नीलकंठ तिवारी पूरे विवाद में मौन हैं।

पूर्व विधायक ने वक्तव्य जारी करते हुए कहा है कि काशी की जनता जानना चाहती है कि धर्मार्थ कार्य मंत्री इस पूरे प्रकरण में मौन क्यों हैं। शहर के ही दूसरे क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले अन्य मंत्री क्यों मौका का निरीक्षण और बयान जारी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र होने के कारण सीएम को खुद पहल करके प्रकरण का मर्यादित पटाक्षेप करना चाहिए।

उन्होंने कहा है कि मंदिर प्रशासन अपने आक्रामक कदम को मूंछ का सवाल न बनाए। उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि वह मंदिर के स्वामी नहीं है और उसके समुचित प्रबंधन की सहयोगी भूमिका में है। उनकी सीमाएं भी निर्धारित हैं। आखिर मंदिर अधिग्रहण के बावजूद शासन ने उन परंपराओं के समादर का सिलसिला कायम रखा, तो उसके भी तो कुछ मायने हैं। किन्हीं अन्य मतभेदों या गलतफ हमियों की वेदी पर किसी परंपरा की बलि नहीं चढ़ाई जानी चाहिये।

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