काशी में महाशिवार्चन: पहली बार होगा एक करोड़ पार्थिव शिवलिंगार्चन, पीएम मोदी भी हो सकते हैं शामिल
श्री विजयानंदा नाधा गुरु सेवा ट्रस्ट हैदराबाद की ओर से काशी के चेत सिंह किला में पार्थिव शिवलिंगार्चन के सभी अनुष्ठान होंगे। ट्रस्ट के महासचिव डॉ. जीके वैंकट ने बताया कि पार्थिव शिवलिंग बनाने के लिए तेलंगाना के 33 जिलों में 48 केंद्र बनाए गए हैं।
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लोक कल्याण के लिए कार्तिक मास में काशी में महाशिवार्चन होगा। इस महानुष्ठान में पहली बार एक करोड़ पार्थिव शिवलिंगार्चन होगा। इसके लिए तेलंगाना के 33 जिलों में 72 लाख पार्थिव शिवलिंग तैयार हो चुके हैं। अक्तूबर तक 28 लाख शिवलिंग और तैयार हो जाएंगे। चेत सिंह किला में 19 से 27 नवंबर तक आयोजित इस महानुष्ठान में देश-विदेश से 50 हजार से अधिक साधु, संत, शंकराचार्य और अनुयायी शामिल होंगे। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी शामिल होने की उम्मीद है।
श्री विजयानंदा नाधा गुरु सेवा ट्रस्ट हैदराबाद की ओर से काशी के चेत सिंह किला में पार्थिव शिवलिंगार्चन के सभी अनुष्ठान होंगे। ट्रस्ट के महासचिव डॉ. जीके वैंकट ने बताया कि पार्थिव शिवलिंग बनाने के लिए तेलंगाना के 33 जिलों में 48 केंद्र बनाए गए हैं। इसके निर्माण में 1200 लोग लगे हैं। इन एक करोड़ शिवलिंग को काशी लाया जाएगा। 19 नवंबर से शुरू होने वाले महानुष्ठान में 10 दिनों तक पार्थिव शिवलिंगों का विधिवत पूजन होगा। कांची कामकोटि के शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती, शृंगेरी पीठ के शंकराचार्य विदुशेखर भारती स्वामी, द्वारिका पीठ, पुरी पीठाधीश्वर और ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के अलावा आश्रमों व मठों के महंत, साधु और संत शामिल होंगे।
डॉ. जीके वैंकट ने बताया कि इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी आमंत्रित किया गया है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी, राज्यसभा सांसद जीवीएल नरसिंहा राव के अलावा तेलंगाना सरकार के मंत्री भी शामिल होंगे। काशी में आयोजन के संयोजक चक्रवर्ती विजय नावड़ ने बताया कि यहां भी तैयारी शुरू हो गई है। आयोजन स्थल चेत सिंह किला परिसर में अगले सप्ताह से पंडाल बनने लगेंगे। यूएसए, यूके, कनाडा, मलयेशिया, सिंगापुर, नीदरलैंड, दुबई, कुवैत आदि देशों के मंदिरों के महंत, संत और अनुयायी भी शामिल होंगे।
पंचभूत व पंच लौह लिंगार्चन भी होगा
पार्थिव शिवलिंगार्चन के साथ द्वादश ज्योतिर्लिंग, पंच भूत लिंगार्चन, लौह लिंगार्चन, नवधान्य लिंगार्चन, नवरत्न लिंगार्चन भी होगा। पंचभूत में पृथ्वी, आकाश, जल, वायु और अग्नि लिंगार्चन होगा। पंच लौह में स्वर्ण, रजत, कांस्य आदि धातुओं के बने शिवलिंगों का भी पूजन होगा।