डेढ़ महीने की खोज: कंदवा नहीं शुकुलपुरा में है असि नदी का उद्गम, जगन्नाथपुरी की तलाश जारी; मिले रोचक तथ्य
Varanasi News:
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पुराणों से भी प्राचीन नगरी काशी अर्थात वाराणसी की पहचान असि नदी के वास्तविक उद्गम स्थल की पहचान हो गई है। असि नदी का उद्गम कंदवा ना होकर शुकुलपुरा है। आनंदकानन काशी ढूंढे की टीम ने डेढ़ महीने के अध्ययन के बाद इस पर अपनी मुहर लगा दी है। वर्तमान में असि नदी अपने मूल स्थान से लगभग दो किलोमीटर दूर बह रही है।
आनंदकानन काशी ढूंढे की टीम ने डेढ़ महीने में 15 से अधिक पौराणिक पुस्तकों के अध्ययन के बाद असि नदी के वास्तविक उद्गम स्थल की खोज शुरू की। खोज के दौरान पता चला कि अब तक असि का उद्गम स्थल जो कंदवा पोखरे को बताया जाता था वह सही नहीं है।
असि नदी का उद्गम खोजवां के शुकुलपुरा से किसी कालखंड में हुआ था। असि या शुष्का नदी ने अपने तट पर शुक्लेश्वर महादेव को स्थापित किया है। बगल में ही राजा जनक ने जनकेश्वर महादेव को विराजमान किया था जिसे काशी की जनकपुरी भी कहते हैं। असि का उद्गम जिस पोखरे से हुआ था वह अब पट गया है।
असि नदी शुकुलपुरा से होते हुए दुर्गा मंदिर के पीछे से घूमकर अस्सी चौराहे से होते हुए असि संगमेश्वर महादेव के पास ही गंगा से मिलती थी। वर्तमान में सड़क और आबादी बसने के कारण नदी को पाट दिया गया। अब वर्तमान में असि नदी नाले के रूप में अपने मूल स्थान से लगभग दो किलोमीटर से अधिक दूर पर नाले के रूप में है।
काशी की जगन्नाथपुरी की तलाश जारी
काशी की जगन्नाथपुरी की तलाश पिछले तीन महीने से चल रही है। आनंदकानन काशी ढूंढे टीम ने रामघाट और चौखंभा में जगन्नाथपुरी होने की संभावना जताई है। चौखंभा में मकान बिक जाने के कारण मूर्ति व स्थान का पता नहीं चल रहा है। उसी क्षेत्र में कुछ स्थान पर पत्थर व लकड़ी की मूर्तियां भगवान जगन्नाथ की मिली हैं। मूल जगन्नाथपुरी की तलाश जारी है और जल्द ही इसे भी सामने लाया जाएगा।
बनारस में 218 वर्ष पूर्व अस्सी क्षेत्र में हुई थी स्थापना
साल 1780 के आसपास पुरी जगन्नाथ मंदिर के पुजारी नित्यानंद तिवारी काशी आए थे। उन्होंने ही अस्सी क्षेत्र में भगवान जगन्नाथ के काष्ठ विग्रह को स्थापित किया था। इसके बाद भव्य रथ का निर्माण हुआ और पुरी जैसी ही रथयात्रा की परंपरा का निर्वहन काशी में भी शुरू हो गया। 1802 में रथयात्रा मेला भव्य स्वरूप में आया।
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान जगन्नाथ असि क्षेत्र के बाहर आते हैं। बीएचयू के प्रो. माधव जनार्दन रटाटे का कहना है कि भगवान शिव ने असि व वरुणा नदी के बीच काशी बसाई थी। इसलिए काशी की जगन्नाथपुरी जब भी होगी तो असि व वरुणा की सीमा के अंदर ही होगी।
इंद्र ने वरणा नदी और अग्नि ने किया था असि नदी का निर्माण
काशी खंड के अनुसार लोलार्क कुंड के पास अर्क-विनायक हैं। उनके पश्चिम करन्धमेश्वर शिवलिंग हैं। उसके पश्चिम (दुर्गाकुंड पर) महादुर्गा विराजती हैं। उनके पश्चिम शुष्का (असि) नदी के पूजित शुष्केश्वर हैं। उनसे पश्चिम जनकेश्वर हैं। काशी की डेहरी पर देहली विनायक की तैनाती और देवताओं द्वारा काशीक्षेत्र की रक्षा के लिए इंद्र ने उत्तर में वरणा नदी और अग्नि ने दक्षिण में असि नदी का निर्माण किया था।
टीम में ये रहे शामिल
आनंदकानन काशी ढूंढे टीम में बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के प्रो. माधव जनार्दन रटाटे, काशी करवत मंदिर के महेश उपाध्याय, मंगला गौरी के महंत नरेंद्र पांडेय, भृगु संहिता विशेषज्ञ वेदमूर्ति शास्त्री, विद्वान मनीष पांडेय,राम जानकी मंदिर महंत संजय मिश्रा एवं काशी विद्यापीठ संस्कृत विभाग के डाॅ. उपेंद्र देव पांडेय, सुधांशु पांडेय, उमेश मिश्रा, केंद्रीय ब्राह्मण महासभा के प्रदेश अध्यक्ष अजय शर्मा शामिल हैं।