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Varanasi News: क्षमावाणी पर्व पर जैन मंदिरों में तीर्थंकरों की पूजा, गले मिलकर गलतियों के लिए मांगी क्षमा
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वाराणसी। जैन धर्म का क्षमावाणी पर्व रविवार को श्रद्धा व उल्लास से मनाया गया। जैन मंदिरों में तीर्थंकरों के पूजन-अर्चन के साथ ही लोगों ने एक-दूसरे से मिलकर क्षमा मांगी। भेलूपुर श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन तीर्थ में भीड़ रही। लोगों ने जैन मुनि सागर महाराज और भाव सागर महाराज ने आशीष लिए।
दशलक्षण महापर्व के समापन के बाद मांगलिक क्रियाएं और तीर्थ क्षेत्र की स्मारिका का विमोचन हुआ। कमेटी ने दोनों मुनिराजों से क्षमा याचना की। भाव सागर महाराज ने क्षमा को आत्म-नियंत्रण की उच्चतम अवस्था बताया। कहा कि क्षमा से व्यक्ति हल्का हो जाता है। लोग संकल्प लें किसी एक व्यक्ति को, जिससे मन में मलिन भाव है, हृदय से क्षमा करें। यह केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, आपके अपने मानसिक शांति का द्वार है। उन्होंने कहा कि क्षमा धारण करने से 66 करोड़ उपवास का फल मिलता है। 10 मिनट का क्रोध 600 मिनट की खुशियां बर्बाद कर देता है।
भाव सागर ने कहा कि क्रोध से अनेक बीमारियां होती हैं, जैसे हार्ट अटैक और ब्लड प्रेशर। क्रोध आने पर 10 तक गिनती गिनें या मौन हो जाएं।धर्म सागर ने कहा कि हमें दूसरों के साथ वैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए जो हम अपने लिए नहीं चाहते। उन्होंने रिश्तों में गलतफहमियों और खटास को दूर करने के लिए हृदय से माफ करने पर जोर दिया। इस मौके पर आरसी जैन, राकेश जैन, प्रदीप जैन, संजय जैन आदि रहे।
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दशलक्षण महापर्व के समापन के बाद मांगलिक क्रियाएं और तीर्थ क्षेत्र की स्मारिका का विमोचन हुआ। कमेटी ने दोनों मुनिराजों से क्षमा याचना की। भाव सागर महाराज ने क्षमा को आत्म-नियंत्रण की उच्चतम अवस्था बताया। कहा कि क्षमा से व्यक्ति हल्का हो जाता है। लोग संकल्प लें किसी एक व्यक्ति को, जिससे मन में मलिन भाव है, हृदय से क्षमा करें। यह केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, आपके अपने मानसिक शांति का द्वार है। उन्होंने कहा कि क्षमा धारण करने से 66 करोड़ उपवास का फल मिलता है। 10 मिनट का क्रोध 600 मिनट की खुशियां बर्बाद कर देता है।
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भाव सागर ने कहा कि क्रोध से अनेक बीमारियां होती हैं, जैसे हार्ट अटैक और ब्लड प्रेशर। क्रोध आने पर 10 तक गिनती गिनें या मौन हो जाएं।धर्म सागर ने कहा कि हमें दूसरों के साथ वैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए जो हम अपने लिए नहीं चाहते। उन्होंने रिश्तों में गलतफहमियों और खटास को दूर करने के लिए हृदय से माफ करने पर जोर दिया। इस मौके पर आरसी जैन, राकेश जैन, प्रदीप जैन, संजय जैन आदि रहे।
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