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बेटियों को बालिका वधू बना रहे बाबुल, हरियाणा-पश्चिमी यूपी से आते हैं उम्रदराज, दलदल में फंसने से बचाई गईं 18 किशोरियां

Thu, 25 Feb 2021 02:00 PM IST
गीतार्जुन गौतम पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Thu, 25 Feb 2021 02:00 PM IST
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Old people come from hariyana and west up for marriage with teen girl in varanasi purvanchal
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के अलग-अलग जिलों के लोग कम उम्र की बच्चियों से शादी करने के लिए बनारस और इसके आसपास के जिलों का रुख कर रहे हैं। सिर्फ बनारस में ही बीते एक साल में ऐसी 18 किशोरियों को बचाया गया है, जिनकी शादी उनसे 15 से 20 साल ज्यादा उम्र के युवक के साथ करने के लिए उनके मां-पिता ने हामी भर दी थी। इसके बावजूद पुलिस और प्रशासन के स्तर से कोई ठोस निगरानी तंत्र विकसित नहीं किया जा सका है।

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इस बीच एक सुखद बात यह जरूर सामने आई है कि अब बेटियां ही अपनी जिंदगी के खतरे को भांप कर पुलिस या जिला बाल संरक्षण इकाई को फोन कर खुद का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए प्रयास कर रही हैं। वहीं, इस संबंध में पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि बच्चों से संबंधित कहीं भी कोई गलत बात हो तो आमजन को एक अच्छे नागरिक की भूमिका का निर्वहन करते हुए आवाज उठानी चाहिए। आमजन से सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के स्तर से कार्रवाई में देरी नहीं की जाएगी।
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केस-1 : किशोरी को सोनीपत में ब्याहने की थी तैयारी
30 जनवरी 2021 को आराजीलाइन विकास खंड के एक गांव की 15 वर्ष नौ माह की किशोरी को हरियाणा के सोनीपत जिले में ब्याहने की तैयारी थी। गांव के किसी जागरूक व्यक्ति ने जिला बाल संरक्षण अधिकारी को सूचना दे दी तो कड़ी मशक्कत के बाद 26 जनवरी को किशोरी के पिता को पाबंद किया गया कि बेटी जब तक 18 साल की नहीं हो जाएगी तब तक उसका विवाह नहीं करेंगे।
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केस-2 : 35 साल के युवक से ब्याह रहा था 15 साल की बेटी
चोलापुर क्षेत्र के एक गांव में बीते हफ्ते मुरादाबाद से तीन लोग आए थे। वह अपने 35 साल के बेटे से शादी करने वाली लड़की के पिता को पैसे और उसका घर बनवा कर देने को तैयार थे। 15 वर्षीय एक किशोरी के पिता ने इसके लिए हामी भी भर दी। किशोरी को जब इसकी भनक लगी तो उसने देर न की और सीधे पुलिस को फोन करके पिता को गिरफ्तार करा दिया।

केस-3 : नाबालिग को ब्याहने के लिए पिता ले जा रहा था हरियाणा
शिवपुर क्षेत्र की एक किशोरी को ब्याहने के लिए हाल ही में उसका पिता दिल्ली होते हुए हरियाणा ले जाने की तैयारी में था। बाल संरक्षण इकाई से जुड़े एक सामाजिक कार्यकर्ता को इसकी सूचना मिली तो वह सक्रिय हुए। आननफानन इकाई और पुलिस की संयुक्त टीम घर पहुंची और पिता को कार्रवाई की चेतावनी दी गई, तब जाकर वह बेटी का ब्याह उसके बालिग होने से पहले न करने के लिए तैयार हुआ।

बाल विवाह के लिए गरीबी और अशिक्षा एक बड़ा कारण
जिला बाल संरक्षण अधिकारी निरुपमा सिंह ने बताया कि हमारी टीम ने अब तक जो भी बाल विवाह रुकवाए हैं, उनके पीछे एक बड़ा कारण यह सामने आया है कि अभिभावक गरीब और अशिक्षित हैं। गरीबी से त्रस्त मां-बाप यह सोचते हैं कि बेटी को तो एक दिन पराए घर जाना ही है। अगर बेटी के ब्याह के बदले कुछ पैसे मिल जाएं और घर वगैरह बन जाए तो इससे बढ़िया बात क्या होगी। यह पूरी तरह से गलत है। कम उम्र में बच्चियों का ब्याह होने से उनको स्वास्थ्य संबंधी तमाम तरीके की दिक्कतें होती है।

बाल विवाह सामाजिक बुराई, हर स्तर पर विरोध जरूरी
दीवानी कचहरी के अधिवक्ता नित्यानंद राय, अंशुमान त्रिपाठी और वरुण प्रताप सिंह प्रिंस ने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में लिंगानुपात में असमानता है। इसी वजह से यहां से ऐसे कई उदाहरण सामने आते रहते हैं जहां लड़कों का विवाह बड़ी ही मुश्किल से होता है। इसलिए वह पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों में रहने वाले गरीब परिवारों को पैसे सहित तमाम अन्य तरह के झांसे देकर उनकी बेटियों को ब्याहने के लिए रजामंद कर लेते हैं। बाल विवाह एक सामाजिक बुराई है और इसका हर स्तर पर विरोध होना चाहिए।

एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि किसी बच्चे के साथ कहीं भी गलत होता दिखे तो एक जागरूक और जिम्मेदार नागरिक के तौर पर आमजन नजदीकी थाने या 112 नंबर पर फोन जरूर कर दें। पुलिस बच्चों और महिलाओं से जुड़े प्रत्येक प्रकरण को लेकर बेहद ही संवेदनशील है और प्रभावी तरीके से कार्रवाई करती है।

जिले में एक साल में बच्चों के साथ क्या हुआ, उनके लिए क्या किया गया
- 2020 में बाल यौन शोषण के 84, बाल श्रम के 42 और बाल भिक्षावृत्ति में लिप्त 38 बच्चों को न्याय दिलाया गया।
- 2020 में बाल कल्याण समिति के समक्ष 903 बच्चे प्रस्तुत हुए, इसमें 830 बच्चों को उनके माता-पिता या अभिभावकों के साथ पुनर्वास किया गया। 
- 2020 में कानून का उलंघन करने वाले कुल 439 बच्चे किशोर न्याय बोर्ड में प्रस्तुत हुए और 630 बच्चों के मामलों में अंतिम निर्णय लिया गया।
- रेलवे स्टेशनों पर बाल कल्याण समिति, चाइल्ड लाइन, जिला बाल संरक्षण इकाई, जीआरपी और आरपीएफ के सहयोग से 312 बच्चों को बचाया गया।
- बेसिक शिक्षा विभाग ने 2020 में शिक्षा से वंचित 4,459 बच्चों को शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत स्कूल से जोड़ा है।
- विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रम का आयोजन कर 27 बच्चों को रोजगार से जोड़ा गया है। 130 बच्चे रोजगार परक प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।

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