शिकायतों का भ्रष्टाचार: शिकायतकर्ताओं को पता ही नहीं, शिकायतों का हो जा रहा समाधान; ऐसे तैयार कर रहे रिपोर्ट
Varanasi Latest News: वाराणसी जिले में शिकायतों का भ्रष्टाचार सामने आया है। यहां अफसर खानापूर्ति कर शिकायतों के निस्तारण की रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।
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अदम गोंडवी की पंक्तियां तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है... को जिले के अफसर कागज पर चरितार्थ कर रहे हैं। आईजीआरएस पोर्टल पर आ रही शिकायतों का फर्जी निस्तारण किया जा रहा है। कागज पर आई शिकायतों का निस्तारण भी कागज पर ही हो जा रहा है और रिपोर्ट भी लखनऊ चली जा रही है।
यह हाल तब है जब खुद सीएम योगी आदित्यनाथ लगातार शिकायतों के निस्तारण पर जोर दे रहे हैं। काशी में पिछले सप्ताह जनसुनवाई के दौरान उन्होंने अफसरों को मौके पर जाकर शिकायतों के निस्तारण के निर्देश दिए थे। इस मामले में डीएम सत्येंद्र कुमार ने निलंबन तक की कार्रवाई की है, कई अफसरों को प्रतिकूल प्रविष्टि दी है लेकिन अधिकारी सुनने को तैयार नहीं हैं।
कागज में सफाई, सीडीओ का निर्देश भी नहीं माना
कछवा रोड सेवापुरी ब्लॉक के प्रधानमंत्री सांसद आदर्श ग्राम पुरे के बसंत लाल सरोज ने 16 अगस्त को मुख्यमंत्री पोर्टल आईआरएस पर शिकायत दर्ज कराई कि गांव के तालाब में सफाई नहीं हो रही है। उनसे किसी अफसर ने संपर्क नहीं किया। 31 अगस्त को लखनऊ से उनके पास फोन आया कि आपकी शिकायत का निस्तारण हो गया है। आप कार्रवाई से संतुष्ट हैं। उन्होंने बताया कि संफाई तो हुई नहीं, फिर कैसे संतुष्ट। इससे पहले ही 25 जुलाई को सीडीओ हिमांशु नागपाल ने भी गांव के निरीक्षण के दौरान तालाब की सफाई के निर्देश दिए थे लेकिन अब तक तालाब की स्थिति जस की तस है।
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शिकायतकर्ता से मिले बिना ही हो गया निस्तारण
केस दो
चिरईगांव की ग्राम पंचायत विशुनपुरा सरैया के महाबली मिश्र ने गांव में सीवरलाइन जाम होने से मुख्य मार्ग पर गंदा पानी लगने की शिकायत की। कोई अफसर मौके पर निरीक्षण करने नहीं गया, महाबली मिश्र से बात भी नहीं की और शिकायत का निस्तारण हो गया। इसी गांव के अभिषेक मिश्र ने इंटरलॉकिंग रिपेयर की शिकायत कई बार दर्ज कराई, लेकिन कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा और न ही अभिषेक से संपर्क किया गया, लेकिन कागज में शिकायत का निस्तारण हो गया।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि की शिकायत में भी फर्जीवाड़ा
काशी विद्यापीठ ब्लॉक के के महमूदपुर गांव के प्रधान प्रतिनिधि इम्तियाज हाशमी ने बताया कि उन्होंने आईजीआरएस पर शिकायत की थी कि गांव में ग्राम पंचायत सचिव नहीं आते हैं। मनमाने तरीके से काम करते हैं, इससे गांव के विकास कार्य रुके हुए हैं। पोर्टल के माध्यम से शिकायत निस्तारण की जिम्मेदारी एडीओ पंचायत सुनील कुमार को सौंपी गई। वह जांच करने गांव आए ही नहीं, रिपोर्ट में लिख दिया कि सचिव हर बुधवार को गांव आते हैं। प्रधान प्रतिनिधि का कहना है कि एडीओ पंचायत को शिकायतकर्ता से मिलना चाहिए लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया।
बिना बात किए ही लेखपाल ने लगा दी रिपोर्ट
केस चार
चौबेपुर थाना क्षेत्र के रामचंदीपुर गांव निवासी सुनील कुमार यादव ने गांव की सरकारी भूमि पर कब्जे की शिकायत की। लेखपाल ने शिकायतकर्ता से संपर्क ही नहीं किया। बिना मिले ही लेखपाल ने रिपोर्ट लगाकर भेज दी कि आराजी नंबर 426 एक बहुत बड़ा नंबर है और कई खातों में बंटा हुआ है।
समस्या जस की तस कर दिया निस्तारित
केस पांच
चिरईगांव के जाल्हूपुर निवासी सोनू यादव ने कच्चे मार्ग पर इंटरलॉकिंग निर्माण की मांग की थी। उन्होंने बताया कि उनकी शिकायत पर कोई अफसर निरीक्षण करने नहीं आया, उनसे संपर्क भी नहीं किया गया। समस्या जस की तस है और शिकायत का निस्तारण कागज पर हो गया।
एसडीएम ने कागज पर निस्तारित कर दी शिकायत
केस छह
ग्राम पंचायत काशीपुर के सेवानिवृत्त शिक्षक स्वर्गीय रामाश्रय पांडेय (उम्र 85 वर्ष) ने 11 अप्रैल 2019 को नक्शा संशोधन का वाद दाखिल किया था। 2023 में उनका निधन हो गया। निधन के बाद पुत्र रत्नेश पांडेय ने प्रकरण को आगे बढ़ाया। तो तहसील प्रशासन की ओर से यह कहते हुए रिपोर्ट जारी की गई कि फाइल उपलब्ध नहीं है। इसके बाद तहसील प्रशासन ने जनसुनवाई पोर्टल पर 7 दिनों में निस्तारित दिखा दिया। लेकिन समस्या बरकरार है।
क्या बोले डीएम
कई अधिकारी बिना मौके पर गए ही समाधान की रिपोर्ट पोर्टल पर भेज देते हैं। यदि आगे ऐसी शिकायत मिली तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। -सत्येंद्र कुमार, जिलाधिकारी