छात्रा से यौन अपराध: ट्यूशन टीचर को 20 साल की सजा, नौ गवाह, मेडिकल रिपोर्ट बनी कड़ी; इस बहाने से बुलाया था घर
छात्रा से यौन अपराध के मामले में अदालत ने ट्यूशन टीचर को 20 साल की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष ने नौ गवाह पेश किए। कंप्यूटर कोर्स पूरा कराने के बहाने आरोपी ने छात्रा को घर बुलाकर कमरे में ले जाकर यौन शोषण किया था। मामले में मेडिकल रिपोर्ट अहम कड़ी बनी। कोर्ट ने दोषी पर जुर्माना भी लगाया।
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गुरु-शिष्य के भरोसे को तार-तार करने वाले ट्यूशन टीचर को पॉक्सो एक्सक्लूसिव कोर्ट ने 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। 12 साल से कम उम्र की छात्रा से यौन अपराध के मामले में विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट)/ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नितिन पाण्डेय की अदालत ने ईश्वरगंगी निवासी टीचर को दोषी करार देते हुए 1.53 लाख का अर्थदंड भी लगाया। 80 प्रतिशत राशि पीड़िता को प्रतिकर के रूप में देने का आदेश दिया है।
अभियोजन की ओर से नौ गवाह पेश किए गए। अभियोजन के मुताबिक, पीड़िता आरोपी के घर ट्यूशन पढ़ने जाती थी। 22 सितंबर 2024 को दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया कि घटना वाले दिन आरोपी ने कंप्यूटर कोर्स पूरा कराने के बहाने छात्रा को घर बुलाया और कमरे में यौन उत्पीड़न किया।
मामले की विवेचना जैतपुरा पुलिस ने की। गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अभियोजन की ओर से दस्तावेज के आधार पर मामले को साबित करने का प्रयास किया गया। अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद मुकेश श्रीवास्तव को दोषी पाया।
बचाव पक्ष ने कहा
मुख्य अभियुक्त टीचर ने बयान में आरोपों को गलत बताया। कहा कि उसने पीड़िता को पढ़ाई न करने पर डांटा था, क्योंकि वह 22 सितंबर, 2024 को गणित की किताब नहीं लाई थी। टीचर ने दावा किया कि उसने पीड़िता को घर से किताब लाने और अपने पिता को बुलाने के लिए कहा था।
इसके बाद पीड़िता के पिता उसके घर आकर लड़ने लगे और पीड़िता के परिवार वालों ने उसके और परिवार के साथ मारपीट की। इसके बाद मुकदमा दर्ज कराया गया। लेकिन अदालत में एक भी दलील टिक नहीं सकी।
फैसले में अदालत ने जताई गंभीर चिंता
फैसले में अदालत ने गुरु-शिष्य संबंध की महत्ता पर टिप्पणी की। अदालत के अनुसार, शिक्षक विद्यार्थी के जीवन में मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है और इस रिश्ते में विश्वास महत्वपूर्ण होता है। अदालत ने माना कि छात्रा के साथ अपराध इस विश्वास के विपरीत है।