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वाराणसीः संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में अब होगी हिंदू विधि शास्त्र की पढ़ाई, नए पाठ्यक्रम के संचालन पर बनी सहमति 

Thu, 11 Nov 2021 10:09 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Thu, 11 Nov 2021 10:09 PM IST
सार

संपूर्णानंद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी की अध्यक्षता में विद्यापरिषद की बैठक हुई। इसमें विधि के स्नातकोत्तर एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रम निर्माण करने पर सदस्यों ने सहमति जताई। 

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Now the study of Hindu law will be done in Sampurnanand Sanskrit University,
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में अब विधि के स्नातकोत्तर और डिप्लोमा पाठ्यक्रम की भी पढ़ाई होगी। छात्र विश्वविद्यालय में हिंदू विधि शास्त्र का अध्ययन कर सकेंगे। विश्वविद्यालय की ओर से पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए विशेषज्ञों की समिति बनाने का निर्णय लिया है।

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बृहस्पतिवार को विश्वविद्यालय के योग साधना केंद्र में कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी की अध्यक्षता में विद्यापरिषद की बैठक हुई। इसमें विधि के स्नातकोत्तर एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रम निर्माण करने पर सदस्यों ने सहमति जताई। इसके लिए समिति का गठन किया जाएगा। एमए हिंदू अध्ययन पर भी सहमति बन गई।
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परीक्षा समिति की संस्तुति पर महाविद्यालय की छात्रा प्रियंका सिंह की शास्त्री की उपाधि एवं परीक्षाफल निरस्त कर दिया गया। छात्रा का इंटरमीडिएट यूपी बोर्ड से था और उसने संस्कृत विषय नहीं लिया था। 

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देश भर के पांच शिक्षाविद सम्मानित

विश्वविद्यालय में अध्यापकों की नियुक्तियों में पारदर्शिता रखने पर भी विचार किया गया। इस दौरान कुलपति द्वारा नामित देश भर के पांच शिक्षाविदों को सम्मानित किया गया। जम्मू कश्मीर से प्रो. सुदेश शर्मा, आंध्र प्रदेश के कुलपति प्रो. बी मुरलीधर शर्मा, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो. ललित कुमार त्रिपाठी, प्रो. कृष्णकांत शर्मा, संस्कृत भारती के राष्ट्रीय महासचिव पद्मश्री प्रो. चमू कृष्ण शास्त्री को सम्मानित किया गया।

पद्मश्री चमू कृष्ण शास्त्री ने कहा कि आज की डिजिटल शिक्षा को दृष्टि मे रखते हुए संस्कृत शिक्षा को डिजिटलीकरण करने की आवश्यकता है। इस दौरान प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो. रामपूजन, प्रो. हरिशंकर,प्रो. प्रेम नारायण, प्रो. हरिप्रसाद, प्रो. जितेन्द्र कुमार, प्रो. कमला कान्त आदि उपस्थित थे।

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