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अब दृष्टिहीनों की उंगलियों के इशारे और हावभाव से चलेंगे कंप्यूटर

Fri, 17 Jun 2022 12:36 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jun 2022 12:36 AM IST
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Now the computer will run with the gestures and gestures of the visually impaired
अब दृष्टिहीन भी आम आदमी की तरह कंप्यूटर का इस्तेमाल कर सकेंगे। उनकी उंगलियों के इशारे पर कंप्यूटर एप्लीकेशन काम करेंगेे और वह किसी कुशल व्यक्ति की तरह संचालन कर सकेंगे। आईआईटी बीएचयू तथा सीडब्ल्यूआर विश्वविद्यालय अमेरिका के शोधकर्ताओं की टीम ने दृष्टिहीन के लिए डैक्टोइलोलॉजी के जरिये कंप्यूटर के इस्तेमाल को सहज बना दिया है। 2022 तक यह तकनीक लोगों की पहुंच में होगी।
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डैक्टोइलोलॉजी के इस्तेमाल से दृष्टिहीन बिना ब्रेल के उंगलियों के इशारे और अपने हावभाव से कंप्यूटर चला सकेंगे। आठ साल की शोध प्रक्रिया के बाद आईआईटी बीएचयू व अमेरिकी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की टीम को उत्साहजनक नतीजे मिले हैं। इससे दृष्टिहीन व्यक्तियों की दुनिया पूरी तरह से बदल जाएगी।
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बीएचयू मनोविज्ञान विभाग के सहायक आचार्य डॉ. तुषार सिंह तथा शोध छात्रा ऐश्वर्य जायसवाल शोध टीम के सदस्य हैं। डॉ. तुषार सिंह ने बताया कि इंजीनियरिंग जर्नल आईईईई ट्रांसएक्शन ऑन ह्यूमन-मशीन सिस्टम में प्रकाशित शोध ने दृष्टिहीनों के लिए कंप्यूटर इनपुट तकनीक ब्रेल पर हावभाव आधारित तकनीक के सापेक्ष महत्व का मूल्यांकन किया तो पता चला कि यह तकनीक उनके लिए ज्यादा बेहतर और आसान है।
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अंध विद्यालय के छात्रों पर परीक्षण रहा सफल
ऐश्वर्या जायसवाल ने बताया कि यह तकनीक बीएचयू के पूर्व शोध छात्र डॉ. गौरव मोदनवाल ने तैयार की है। उसे विकसित करने और टेस्टिंग में हम लोग शोध टीम का हिस्सा हैं। डैक्टाइलोलॉजी तकनीक का परीक्षण श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय के 40 छात्रों पर किया गया। परिणाम शत प्रतिशत उत्साहजनक रहे। 13 से 16 साल के ऐसे छात्रों को चुना गया था जो ना तो डैक्टाइलोलॉजी को जानते थे और न ही ब्रेल लिपि। 30 दिनों तक उन्हें डैक्टाइलोलॉजी और ब्रेल लिपि का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद डैक्टाइलोलॉजी तकनीक का प्रयोग करके कंप्यूटर का संचालन किया गया। प्रतिभागियों ने बिना किसी गलती हावभाव से कंप्यूटर पर टाइपिंग की और एप्लीकेशन का इस्तेमाल भी किया।
दूर होगी चुनौती
नेत्रहीनों के लिए तैयार हो रही डैक्टाइलोलॉजी बेस्ड एप्लीकेशन उनके लिए डिजिटल दुनिया के रास्ते खोलेगी। यह अध्ययन दृष्टिबाधितों की शिक्षा एवं रोजगार में योगदान कर उनके सशक्तिकरण की राह दिखाता है।
आसान नहीं है ब्रेल लिपि
विशेषज्ञों का कहना है कि बात करें पूरी दुनिया की तो ब्रेल लिपि को समझने वालों की संख्या महज 10 फीसदी है। ब्रेल सीखना मुश्किल होता है और इसके आधार पर कंप्यूटर का संचालन तो और भी ज्यादा मुश्किल है। डॉ. तुषार सिंह ने बताया कि ब्रेल का जब विकास हुआ तो वह सिर्फ लिखने व पढ़ने के लिए था। उसे कंप्यूटर के हिसाब से तैयार नहीं किया गया था। कंप्यूटर के कीपैड में 53 कीवर्ड होते हैं और उनको छूकर पहचान पाना आसान नहीं होता है। ऐसे में हावभाव और इशारोें पर आधारित यह तकनीक नेत्रहीनों की दुनिया को नया आयाम देगी।

बनानी पड़ी अलग भाषा
आठ साल तक कांसेप्ट पर काम हुआ। इसके बाद दो साल से ऊपर लग गए एप्लीकेशन तैयार करने में। सबसे पहले तो इसके लिए भाषा बनानी पड़ी। हर अक्षर के लिए एक अलग भाषा, जब भाषा तैयार हो गई तो इसका परीक्षण किया गया। अभी गणित और अंग्रेजी के अक्षरों पर आधारित भाषा तैयार हुई है। एप्लीकेशन लांच होने के बाद दूसरी भाषाओं पर भी काम किया जाएगा।
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