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अब अपर मुख्य कार्यपालक की तैनाती पर उठापटक
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 28 Jun 2016 01:57 AM IST
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बाबा विश्वनाथ मंदिर
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी की तैनाती को लेकर उठापटक मची है। इस पद पर जहां कुछ दिन पहले शासन ने सेवानिवृत्त तहसीलदार को सेवा विस्तार दिया, वहीं इसी पद पर दूसरे अफसर की राजस्व परिषद से तैनाती करा दी गई है। एक अफसर के रहते दूसरे की तैनाती को लेकर ऊहापोह की स्थिति बन गई है। नई तैनाती न्यास के एक सदस्य ने कराई है, जबकि न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य पं. अशोक द्विवेदी ने राजस्व परिषद के आयुक्त/सचिव को भेजे पत्र में कहा है कि मंदिर में अपर कार्यपालक अधिकारी का कोई पद रिक्त नहीं है। इस पद पर प्रतिनियुक्ति के लिए किसी को भेजने की जरूरत नहीं है।
न्यास परिषद में प्रतिद्वंद्विता और वर्चस्व की जंग अरसे से चल रही है। अपर कार्यपालक अधिकारी के पद पर तैनाती को लेकर विवाद भी नया नहीं है। इस पद पर तैनात पीएन द्विवेदी दो वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त हो चुके हैं लेकिन उन्हें शासन से लगातार तीन बार छह-छह महीने का सेवा विस्तार मिलता गया। इस बार भी ऐसा ही हुआ। न्यास परिषद सदस्य प्रदीप कुमार बजाज के कड़े विरोध के बावजूद द्विवेदी को छह महीने का सेवा विस्तार अध्यक्ष की सिफारिश पर मिल गया। धर्मार्थ कार्य मंत्री विजय मिश्र के निर्देश पर प्रमुख सचिव धर्मार्थ कार्य नवनीत सहगल ने पीएन द्विवेदी को एसीईओ के पद पर तैनात करने का निर्देश दिया।
नौ जून को शासन के निर्देश पर पीएन द्विवेदी को नियुक्त किया गया। यह नियुक्ति संविदा पर सिर्फ 28 हजार रुपये महीने पर की गई। इसके पीछे तर्क है कि प्रतिमाह 55 हजार रुपये से अधिक की बचत हो रही है। जबकि न्यास सदस्य प्रदीप कुमार बजाज का कहना है कि पीएन द्विवेदी भ्रष्ट हैं और उन्हें हटाया जाना चाहिए। उन्होंने स्वीकार किया कि यह पद रिक्त था इसलिए मैंने राजस्व परिषद से नई तैनाती के लिए पत्र भेजा था।
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इस बीच न्यासी प्रदीप के पत्र पर राजस्व परिषद ने देवरिया में तहसीलदार के पद पर तैनात ओपी गोस्वामी को एसीईओ बनाकर भेज दिया है। हालांकि गोस्वामी को सोमवार की शाम तक रिलीव नहीं किया गया था। उधर, न्यास अध्यक्ष ने इस नियुक्ति को रद्द करने की सिफारिश राजस्व परिषद से की है।
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न्यास परिषद में प्रतिद्वंद्विता और वर्चस्व की जंग अरसे से चल रही है। अपर कार्यपालक अधिकारी के पद पर तैनाती को लेकर विवाद भी नया नहीं है। इस पद पर तैनात पीएन द्विवेदी दो वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त हो चुके हैं लेकिन उन्हें शासन से लगातार तीन बार छह-छह महीने का सेवा विस्तार मिलता गया। इस बार भी ऐसा ही हुआ। न्यास परिषद सदस्य प्रदीप कुमार बजाज के कड़े विरोध के बावजूद द्विवेदी को छह महीने का सेवा विस्तार अध्यक्ष की सिफारिश पर मिल गया। धर्मार्थ कार्य मंत्री विजय मिश्र के निर्देश पर प्रमुख सचिव धर्मार्थ कार्य नवनीत सहगल ने पीएन द्विवेदी को एसीईओ के पद पर तैनात करने का निर्देश दिया।
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नौ जून को शासन के निर्देश पर पीएन द्विवेदी को नियुक्त किया गया। यह नियुक्ति संविदा पर सिर्फ 28 हजार रुपये महीने पर की गई। इसके पीछे तर्क है कि प्रतिमाह 55 हजार रुपये से अधिक की बचत हो रही है। जबकि न्यास सदस्य प्रदीप कुमार बजाज का कहना है कि पीएन द्विवेदी भ्रष्ट हैं और उन्हें हटाया जाना चाहिए। उन्होंने स्वीकार किया कि यह पद रिक्त था इसलिए मैंने राजस्व परिषद से नई तैनाती के लिए पत्र भेजा था।
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इस बीच न्यासी प्रदीप के पत्र पर राजस्व परिषद ने देवरिया में तहसीलदार के पद पर तैनात ओपी गोस्वामी को एसीईओ बनाकर भेज दिया है। हालांकि गोस्वामी को सोमवार की शाम तक रिलीव नहीं किया गया था। उधर, न्यास अध्यक्ष ने इस नियुक्ति को रद्द करने की सिफारिश राजस्व परिषद से की है।