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अब अरहर का ‘कुदरत-करिश्मा’

Fri, 05 Feb 2016 02:06 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी Updated Fri, 05 Feb 2016 02:06 AM IST
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Now Red 'nature-charisma'
 दाल के संकट से जूझ रहे देश के लिए अरहर की नई प्रजाति वरदान साबित होगी। अब तक की अरहर की प्रजातियों की तुलना में करीब दो गुना अधिक पैदावार देने वाली किस्म ‘कुदरत-करिश्मा’ तैयार की गई है। वाराणसी के टंड़िया गांव के प्रगतिशील किसान श्रीप्रकाश सिंह रघुवंशी ने वर्षों के प्रयास के बाद इसका विकास बीएचयू के कृषि संस्थान द्वारा विकसित की गई प्रजाति मालवीय अरहर-13 से किया है। एक एकड़ में जहां अब तक सात-आठ कुंतल अरहर की पैदावार होती थी, वहीं अब ‘कुदरत-करिश्मा’ प्रजाति से किसान इतने ही क्षेत्रफल में 15-16 कुंतल उपज हासिल कर सकेंगे।
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श्रीप्रकाश ने मालवीय अरहर-13 के बीज से ही इस नई प्रजाति को विकसित करने में सफलता पाई है। साल भर पहले टंड़िया गांव में प्रायोगिक तौर पर पहली बार इसकी खेती की गई। उत्साहजनक परिणाम आने के बाद इस साल ‘कुदरत-करिश्मा’ की खेती टंड़िया गांव के अलावा महाराष्ट्र के जलगांव, जालना, अमरावती, वर्धा क्षेत्र के कुछ किसानों ने की है। बीजों के विकास पर काम करने वाले श्रीप्रकाश इस नई प्रजाति को लेकर बेहद उत्साहित हैं। कुदरत-करिश्मा का पौधा अन्य प्रजातियों की तुलना में दो फीट तक छोटा हो गया है। करीब पांच फुट तक के पौधे में 20-25 शाखाएं निकलकर झाड़ी के आकार में फैल रही हैं। इसके दाने भी दूसरी प्रजाति की अरहर की तुलना में दो गुना बड़े पाए गए हैं।
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बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. यूपी सिंह ने अरहर की इस प्रजाति के विकास को किसानों के लिए वरदान बताया। उन्होंने बताया कि कुदरत-करिश्मा प्रजाति से अरहर की उपज में दो गुना की वृद्धि होने की उम्मीद है। एक एकड़ में कुदरत-करिश्मा की खेती कर किसान 16  कुंतल अरहर पैदा कर सकेंगे। जबकि अभी तक इतने खेत में औसतन सात कुंतल तक ही पैदावार मिलती रही है। काली, दोमट मिट्टी के इलाके वाले किसानों के लिए अरहर की इस प्रजाति की खेती ज्यादा फायदेमंद रहेगी।
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कुदरत करिश्मा प्रजाति की अरहर जुलाई -अप्रैल के बीच 240 दिन में तैयार होगी। आकार में छोटे और अधिक फलियों वाले पौधे के दाने अब तक की अरहर की प्रजातियों से दो गुना अधिक बड़े मिले हैं। -प्रो. यूपी सिंह, पूर्व विभागाध्यक्ष-कृषि संस्थान, बीएचयू

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टंड़िया और महाराष्ट्र के गांवों में फसल तैयार होने के बाद कुदरत-करिश्मा के बीज का भंडारण किया जाएगा ताकि उसे अगले वर्ष इसे अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाकर अरहर के उत्पादन को बढ़ाया जा सके। - श्रीप्रकाश सिंह रघुवंशी, प्रगतिशील किसान
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