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अब इंदौर करेगा काशी को साफ: अगस्त में मेयर के साथ इंदौर जाएगी नगर आयुक्त सहित तीन अफसरों की टीम, जानें खास

Sat, 19 Jul 2025 11:42 AM IST
अमन विश्वकर्मा राहुल दुबे, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
राहुल दुबे, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sat, 19 Jul 2025 11:42 AM IST
सार

Varanasi News: काशी की सफाई व्यवस्था को नया आयाम देने के लिए अब इंदौर के सरकारी सिस्टम का उपयोग किया जाएगा। वाराणसी की सर्वे रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है। अफसरों ने बैठक कर यहां के संसाधनों की जानकारी ली थी। 

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Now Indore will clean Kashi team of three officers including Commissioner will go to Indore with Mayor
अब इंदौर करेगा काशी को साफ। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Nagar Nigam Varanasi: स्वच्छता के मामले में देशभर में नंबर-1 इंदौर अब काशी को भी साफ करेगा। इसकी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इंदौर के डीएम, नगर आयुक्त समेत अफसरों की एक टीम पिछले सप्ताह ही शहर का सर्वे कर रिपोर्ट तैयार कर चुकी है। 

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अगस्त में बनारस के मेयर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त अक्षत वर्मा सहित तीन अफसरों की टीम इंदौर जाएगी। टीम इंदौर नगर निगम के कामकाज के तरीके को देखेगी और सफाई में प्रयोग होने वाले उपकरणों की समीक्षा रिपोर्ट तैयार करेगी। इंदौर के सामने चुनौती यह है कि वहां कूड़े का सेग्रिगेशन सौ फीसदी और बनारस में जीरो होता है। 
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बीते सप्ताह इंदौर के अफसरों की टीम ने काशी की गलियां, घाट, चौराहे और प्रमुख सड़कें देखी थीं। इसके बाद नगर निगम के अफसरों के साथ बैठक कर यहां के संसाधनों की जानकारी ली थी। इसकी रिपोर्ट तैयार करने के बाद टीम ने काशी को कैसे साफ किया जाए, स्वच्छता रैंकिंग में कैसे इसे ऊपर लाया जाए, इसका मॉडल बनाना शुरू कर दिया। काशी और इंदौर में क्या-क्या फर्क है, इसकी एक तुलनात्मक रिपोर्ट तैयार कर ली गई है।

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इस रिपोर्ट के मुताबिक काशी के सफाई का मॉडल टीम नए सिरे से तैयार कर रही है। इंदौर में संकरी गलियां नहीं हैं। इस तरह के घाट नहीं हैं। अब अफसर नगर निगम वाराणसी की टीम को प्रशिक्षण देंगे। उन्हें यह भी बताएंगे कि किस तरह इंदौर में हर घर से कचरा अलग-अलग एकत्र किया जाता है फिर उसे सीधे प्रोसेसिंग यूनिट तक पहुंचाया जाता है। बताया जाएगा कि वे गीला और सूखा कचरा जरूर अलग करें। 

पहली बार इंदौर करेगा दूसरे शहर की सफाई : इंदौर जब से सफाई व्यवस्था में नंबर वन बना है तभी से देशभर के कई नगर निगम, नगर पालिकाओं की टीम इंदौर का दौरा कर चुकी हैं। पहली बार इंदौर को यह जिम्मेदारी मिली है कि वह किसी शहर को साफ करने में प्रमुख भूमिका निभाए।

वरुणा नदी, अस्सी नदी की सफाई बनेगी चुनौती
इंदौर ओडीएफ प्लस से भी ऊपर वाटर प्लस की श्रेणी में शामिल हो चुका है। इंदौर की टीम के सामने पहली चुनौती यह होगी कि काशी की गंगा एकदम साफ रहे। इसमें किसी तरह का कचरा न जाए। उसके साथ ही सबसे बड़ी चुनौती वरुणा और अस्सी को साफ करना होगा। इन दोनों नदियों पर अवैध कब्जे हैं। 

नदियां लगभग नाले में तब्दील हो चुकी हैं। नगर निगम काशी को भी अगर वाटर प्लस श्रेणी में पहुंचना है तो गंगा के साथ-साथ वरुणा और अस्सी को भी गंदगी, अतिक्रमण मुक्त बनाना होगा। काशी ओडीएफ प्लस कैटेगरी में हैं तो इंदौर वाटर प्लस कैटेगरी पा चुका है। 

टीम ऐसे करेगी काशी में काम 

  • इंदौर के कूड़े को छह तरह से अलग किया जाता है, इसमें गीला, सूखा, कपड़ा, इलेक्ट्रिक कचरा अलग। इसे भी काशी में लागू कराया जाएगा।  
  • इंदौर डस्टबिन फ्री शहर है, काशी में हर चौराहे पर डस्टबिन है। इन्हें हटाकर दुकानों, संस्थानों को यह जिम्मेदारी दी जाएगी। यहां से नगर निगम उठाएगा कूड़ा। 
  • बनारस में एक रोड स्वीपर मशीन है तो इंदौर में 27 अल्ट्रा मॉडर्न स्वीपर मशीन हैं। मशीनों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
  • काशी में अभी घरों से कूड़ा अलग करके नहीं मिल रहा है। इसे नागरिकों को जागरूक कर लागू कराया जाएगा। कूड़ा अलग न करने वालों पर जुर्माना लगेगा। 
  • बनारस में 3500 सफाई मित्र हैं जबकि इंदौर में करीब 7500 ऐसे में काशी में संख्या बढ़ाने का सुझाव दिया जाएगा। 
  • बनारस में करीब 6500 अधिकारी-कर्मचारी हैं। इंदौर में करीब 1100 से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी हैं। काशी में संख्या बढ़ाने पर जोर होगा।

अगस्त में इंदौर जाएंगे। हमारे साथ नगर आयुक्त के साथ कुछ और अफसर रहेंगे। वहां जाकर देखेंगे कि यहां और वहां में क्या अंतर है। क्या सुविधाएं उनके पास हैं जो हमारे पास नहीं हैं। हमें और क्या सुधार करने हैं। स्वच्छता रैंकिंग नंबर के आधार पर तय होती है। उन्हें हर श्रेणी में कितना-कितना नंबर मिलता है और हमें कितना कितना मिलता है। उपकरणों को भी देखना है कि उनके पास क्या है और हमारे पास क्या नहीं है। जिन संसाधनों की कमी है, उन्हें पूरा करेंगे। - अशोक कुमार तिवारी, मेयर

इंदौर टीम की नजर में बनारस की चुनौतियां

  • अभी अधिकांश ड्रेन गंगा नदी में जा रहा है, उसे रोकना है। 
  • नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे अलग तरीके से काम कर सकें। 
  • गलियों में टहलने वाले सांड़ का उपाय तलाशना होगा। 
  • संसाधनों को बढ़ाने के लिए फंड जुटाया जाएगा। 
  • कचरा ट्रांसफर स्टेशन और प्रोसेसिंग प्लांट की संख्या बढ़ाना। 
  • शहर में यूरिनल की संख्या बढ़ाना, अभी 40 हैं, इन्हें बढ़ाकर करीब 300 के पार ले जाना। 
  • निगम कमिश्नर के वित्तीय पावर बढ़ाने के लिए संशोधन करना होगा। इसके लिए नगर निगम को बताना कि ऐसा क्यों जरूरी है। 
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